Monday, 30 October 2023

रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी ने छीन ली मासूमों की जान

हादसे की जड़ में जिम्मेदारों के संरक्षण में पल रहा भ्रष्टाचार - रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी।

आज एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। हादसे में चार बच्चे और एक चालक की मौत हो गई। कई बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

वैसे तो नित्य हादसे होते हैं, नागरिक प्राण गंवाते हैं। किंतू यह हादसा नित्य होने वाले हादसों से अलग है। क्योंकि इस हादसे में दो स्कूल वाहनों में आमने सामने की टक्कर हुई।
बडे़ प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। शासन ने भी चिंता वयक्त की।

तमाम सवाल भी उठेंगे कि इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार कौन ? वाहन मानकों पर खरा था या नहीं, बच्चे अधिक क्यों बैठाए गए और परिवहन विभाग के अधिकारियो पर ठीकरा फोड़ दिया जायगा, जो निर्धारित शुल्क पर डग्गामारी कराते हैं, स्कूल वाहनों की जांच इसलिए नही करते क्योंकि उनसे बर्ष भर का शुल्क एकमुश्त मिल जाता है।

एक प्रश्न यह भी उठना लाजमी है कि सड़क मे गड्डे थे, सड़क के दोनों ओर पाइप लाइन के लिए गहरी नाली खोदी गई है। यदि सड़क मे गड्डे नहीं होते तथा सड़क के दोनों ओर खोदी गई नाली बंद कर दी गई होती तो भी यह हादसा टल सकता था। लेकिन जिम्मेदारों ने कमीशन लेकर गड्ढों और पाइप लाइन के लिए खोदी गई नाली को नहीं देखा। अक्सर देखा गया है कि भुमिगत विद्युतीकरण , गैस व इंटरनेट, जलापूर्ति के लिए सड़के खोदी जाती है किंतु उन्हें यथावत करने के बजट का बंदरबांट इसलिए कर लिया जाता है कि नई सड़क बनने पर गड्ढे स्वत: भर जायेगे।

अब तीसरा गंभीर सवाल खड़ा होता है कि जब गांव गांव सरकारी स्कूल हैं फिर अभिभावक अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में मानक के विरुद्ध संचालित वाहनों से भेजने का जोखिम क्यों उठाते हैं। ऐसे अनेक बच्चे हैं जो प्रतिदिन एक से दो घंटे की यात्रा करके स्कूल बस से विद्यालय पहुंचते हैं और इतने समय में ही घर लौटते हैं, प्रतिदिन दो से चार घंटे की यात्रा करने वाले बच्चे घर पर कितनी पढ़ाई कर पाते होगे, उनके स्वास्थ्य पर इस प्रतिदिन की यात्रा का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सरकारी और निजी विद्यालयों के मान्यता के मानक अलग अलग है। हर जगह सरकारी स्कूल होने के बाद भी अभिभावक निजी स्कूलों की ओर इसलिए रुख करते हैं कि सरकारी स्कूलों में कक्षावार, विषयवार शिक्षक नहीं है। मिड डे मील, फ्री किताबे, ड्रेस, जूता मोजा, बैग, फर्नीचर सहित स्कूलों के कायाकल्प पर ध्यान दिया जा रहा है, निगरानी भी हो रही है, लेकिन नीति नियंता यह भूल गए कि स्कूलों का कायाकल्प तभी होगा जब कक्षावार और विषयवार शिक्षक नियुक्त होगे।

आज के इस ह्रदय विदारक हादसे के तीन कारण मेरी समझ में आए और इन तीनों कारणों की जड़ में है जिम्मेदारों के संरक्षण में पल रहा भ्रष्टाचार -रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी ।

रास्ता निहार ती रहीं माएं तमाम रात,
बच्चे स्कूल से सीधे जन्नत चले गए ।।

Tuesday, 17 October 2023

नारी शक्ति मिशन...?

नारी शक्ति मिशन.....?
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पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य एवम जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, मेयर व सभासद एवम पार्षद के ३३ प्रतिशत पद महिलाओ के लिए आरक्षित हैं।

पंचायतों और नगर निकायों में ३३ प्रतिशत पदो पर महिलाओ के आसीन होने के साथ ही प्रधान पति, प्रधान पुत्र, प्रमुख पति, प्रमुख पुत्र, जिला पंचायत सदस्य पति, जिला पंचायत सदस्य पुत्र, जिला पंचायत अध्यक्ष पति, जिला पंचायत अध्यक्ष पुत्र, चेयरमैन पति, चेयरमैन पुत्र जैसे नवीन पद चलन में आ गए। यहां तक कि सरकारी बैठकों में भी इन महिला प्रतिनिधियों के पति व पुत्र भाग लेने लगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी महिला प्रतिनिधियों के पति और पुत्रों द्वारा ही सहभागिता की जाती है। इस संबंध मे शासन द्वारा भी समय समय पर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजन कार्य नही करेगे, सरकारी बैठकों में भी यही व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

जिन पंचायतों और नगर निकायों में महिलाएं निर्वाचित हुई है, वे अपने निकट संबंधियों पर ही पूरी तरह आश्रित हैं। स्वतंत्र रूप से कार्य कर पाने में पूरी तरह समर्थ नहीं है। उनको समर्थ बनाने हेतु उपाय भी नहीं किए गए हैं। पंचायतों और नगर निकायों में महिला आरक्षण के अनुपात में अधिकारियों व अन्य कार्मिकों की नियुक्ति न होना भी इसका एक बड़ा कारण है।

नारी शक्ति मिशन तभी सार्थक होगा जब पंचायतों और नगर निकायों में महिला आरक्षण के अनुपात में महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही, परिजनों पर आश्रित रहने की प्रवृत्ति परिवर्तित करने तथा स्वतन्त्र रूप से कार्य करने की इच्छा शक्ति उत्पन्न करने के लिए आवश्यक उपाय करने पड़ेंगे तभी महिला आरक्षण सार्थक हो सकेगा।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
९५३६१६२४२४ 


Monday, 16 October 2023

कैसा नारी शक्ति वंदन...?

कैसा नारी शक्ति वंदन.....?
क्या आम चुनाव में एक तिहाई टिकट महिलाओं को मिलेंगे ?

संसद और राज्य विधानमंडलों में नारी को ३३ प्रतिशत आरक्षण देने हेतु लम्बे अंतराल के बाद बर्ष २०२३ में देश की संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर दिया, लेकिन इस कानून के लागू होने मे अभी कई बर्ष लगेगे।

प्रारंभकाल से ही सभी राजनैतिक दल महिला आरक्षण के समर्थन में रहें हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित कराने में सभी राजनैतिक दलों की भूमिका रही है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने से नागरिकों को लगा कि ये आरक्षण तत्काल लागू हो जायगा, साथ ही २०२४ के आम चुनाव में ३३ प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगी। किंतु ऐसा नहीं हुआ।

अब देखना यह है कि राजनैतिक दल वास्तव में महिलाओ की राजनैतिक भागीदारी चाहते हैं, यदि ऐसा होता तो महिला आरक्षण की चर्चा के समय से ही सभी राजनैतिक दल महिलाओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर,  विभिन्न चुनावों में तिहाई टिकट महिलाओं को देकर महिला आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता सकते थे।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के पश्चात पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। इन चुनावों में राजनैतिक दलों द्वारा महिला प्रत्याशियों को वरीयता नहीं दी गई, यहां तक कि इनमें से किसी भी राज्य में महिला को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, यहां तक कि मंत्रिपरिषद में भी पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। कानून पारित होने के बाद लगा था कि राजनैतिक दल इन चुनावों में महिला प्रत्याशियों को वरीयता देगे, किंतु राजनैतिक दलों का रवैया निराश करने वाला रहा है। 

आम चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की घोषणा सभी दलों द्वारा की जा रही है, किंतु महिलाओं को टिकट देने के प्रति सभी दल उदासीन है। अभी संपन्न हुए राज्य सभा चुनावों में भी अपेक्षा के अनुरूप महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

बहुजन समाज पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को छोड़ दे तो किसी भी राजनैतिक दल मे राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला नही है। इन दोनों दलों में महिला नेतृत्व होने के बाबजूद भी पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। अन्य दलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महिला मोर्चा तक ही सीमित है, दलों की नीति निर्धारण में महिलाओ की भूमिका नगण्य ही है।

२०२४ में पांच महानुभावों को भारत रत्न दिया गया है। इनमें एक भी महिला सम्मिलित नही है।

आम चुनाव २०२४ में राजनैतिक दलों द्वारा नारी शक्ति वंदन मे रूचि न दिखाना "नारी शक्ति वंदन अधिनियम २०२३" के भविष्य को प्रश्नचिन्हित करता है।


हरि प्रताप सिंह राठोड़, अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) 
९५३६१६२४२४