Monday, 31 August 2020

आंकड़ों का महाखेल - वृक्षारोपण ( पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार ।)

3. वन-विभाग (अंतिम भाग 5- अगस्त 29 की पोस्ट के आगे)

आंकड़ों का महाखेल- वृक्षारोपण 

         वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण शासन का वार्षिक कार्यक्रम है। इमरजेंसी में संजय गांधी द्वारा चलाये गये वृक्षारोपण अभियान के पश्चात हर वर्ष बिला नागा प्रत्येक जनपद में लाखों वृक्ष लगाये जाते हैं- कुछ ज़मीन पर और ज़्यादा काग़ज़ पर। पर दोनो में एक बात कामन होती है – वृक्षों को पानी किसी में नहीं दिया जाता है जिससे ज़मीन पर लगाये वृक्ष सूख जायें और अगले वर्ष वृक्षारोपण हेतु ज़मीन उपलब्ध रहे, तथा कागज़ पर लगाये गये वृक्षों का आंकड़ा कभी भी निरीक्षण हेतु यथावत कड़क रहे। इससे पिछले वर्षों में अरबों पेड़ ‘लग जाने’ के बाद भी पेड़ लगाने हेतु भूमि वर्षानुवर्ष यथापूर्व खाली मिल जाती है। वृक्षारोपण कार्यक्रम वन विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग के लिये हर वर्ष एक उत्सव जैसा होता है क्योंकि इसमें रोपित दिखाये गये वृक्षों के सीधे अनुपात में सम्बंधित अधिकारियों पर लक्ष्मी कृपालु होतीं हैं। वर्ष 2010 से वृक्षारोपण के आंकड़ों में एक महाखेल और प्रारम्भ हुआ है। उस वर्ष वन विभाग को 5 करोड़ वृक्ष लगाये जाने का टार्गेट दिया गया था। इस हेतु ज़मीन हो न हो और इतने पौधे हों न हों, टार्गेट को पूरा होना था, सो हुआ। उसकी पूर्ति की रिपोर्ट शासन में पहुंचते ही देश-विदेश के समाचार पत्रों में हंगामा मच गया कि उत्तर प्रदेश के वन-विभाग ने एक बरसात में 5 करोड़ वृक्ष लगाकर विश्व रिकार्ड कायम किया है। उ. प्र. के अधिकारियों को लंदन में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल गया। तब से रिकार्ड तोड़ने की होड़ लग गई है और प्रति वर्ष यह रिकार्ड टूट रहा है। इस वर्ष तो एक दिन में ही 25 करोड़ वृक्ष लग जाने का समाचार छपा है। मैं आशा कर रहा हूं कि इतने महान कार्य पर तो अंतर्राष्ट्रीय के बजाय कोई अंतर्ग्रहीय पुरस्कार मिलना चाहिये।          
                 इतनी महती सफलता की बात पढ़कर मेरा मन रोमांचित हुआ था। जब मैं रोमांचित होता हूं तो मेरा गणित का पुराना शौक जाग जाता है। मैने हिसाब लगाया कि उत्तर प्रदेश में कुल 58909 ग्राम पंचायत हैं। सुविधा हेतु इस संख्या को 60000 मान लिया जाये, तो वृक्षारोपण अभियान के दिन प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में यदि 4000 वृक्ष लगाये गये हों, तो 24 करोड़ लग पायेंगे। शेष 1 करोड़ छोटे-बड़े नगरों में लगाया जाना मान लेता हूं। मैने अपने ग्राम एवं अन्य आस-पास के गावों में लगाये गए वृक्षों के विषय में पूछताछ की, तो किसी गांव में सौ-पचास वृक्ष से अधिक लगाये जाने की पुष्टि नहीं हुई। अब आगे मुझे हिसाब बताने की आवश्यकता नहीं है कि कितने वृक्ष ज़मीन पर लगे होंगे और कितने कागज़ पर। 
                वृक्षारोपण के आंकड़ों का यह महाखेल तो साल-दर-साल चलता है। कभी कोई यह नहीं पूछता है कि गत वर्षों के वृक्ष किस ज़मीन पर लगते रहे हैं और हर वर्ष कहां ज़मीदोज़ हो जाते रहे हैं। नये लगाये जाने वाले वृक्षों की संख्या बढ़ाने के बजाय यदि प्रशासन पहले लगाये गये वृक्षों को जीवित रखने पर ज़ोर दे, तो वनाच्छादित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है। परंतु यह कार्य कोई क्यों करे जब कि यह कार्य दुरूह है, त्वरित लक्ष्मी-कृपा का साधन नहीं है और इस कार्य में अंतर्राष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की सम्भावना नगण्य है।

Friday, 28 August 2020

आंकड़ों का खेल (पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार।)

आंकड़ों का खेल- (भाग 4- अगस्त 27 की पोस्ट स आगे)

सामान्य  प्रशासन विभाग-

ब. मेलों में ‘पुण्यार्जन’  
 
            यह सर्वविदित है कि मेले और विशेषकर कुम्भ जनसामान्य के लिये बड़े पुण्यार्जन के अवसर होते हैं।  जिस प्रकार ईसाइयों द्वारा संडे को चर्च जाकर पादरी के समक्ष पिछले सप्ताह भर के पापों को स्वीकार लेने पर हफ़्ते भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार हिंदुओं के पिछले सभी पाप मेलों के अवसर पर गंगा मैया में स्नान करने से धुल जाते  हैं। परंतु यह बात सर्वविदित नहीं है कि कतिपय विभागों के कर्मियों (मुख्यतः सामान्य प्रशासन विभाग के)  के लिये ये मेले   पुण्यार्जन से कहीं अधिक नोटार्जन के अवसर होते हैं। चूंकि अर्जित नोटों का परिमाण उतना ही बड़ा होता है जितना मेला प्रबंध पर हुआ व्यय काग़ज़ों पर दिखाया जाता है, अत: प्रशासन को 'मजबूरन' आने वाले यात्रियों के आंकड़े दस-बीस गुना बढ़ाकर दिखाने पड़ते हैं।   

              वर्ष 1974 में हरिद्वार में कुम्भ मेला आयोजित था। तब मैं पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर नियुक्त था। यद्यपि हरिद्वार उस समय जनपद सहारनपुर का अंग था, तथापि कुम्भ मेला क्षेत्र को अलग जनपद घोषित कर दिया गया था और उसके लिये अलग एक अनुभवी पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की गई थी। जहां तक मुझे याद है मेला के उपरांत डी. एम./एस. पी., कुम्भ मेला ने लगभग 12 लाख यात्रियों के आने की सूचना शासन को भेजी थी। उस वायरलेस की प्रतिलिपि जब मुझे प्राप्त हुई, तब मेरा गणित का विद्यार्थी जीवन का शौक जाग गया था। मैने हरिद्वार आने वाली समस्त ट्रेनो, बसों, स्पेशल बसों, कारों, स्कूटरों, रिक्शों, बुग्गियों में और पैदल आने वाले यात्रियों का खूब बढ़ा चढ़ा कर योग लगाया, तो भी आंकड़ा किसी प्रकार दो लाख से आगे नहीं बढ़ सका था। एस. पी, कुम्भ मेला से मुलाकात होने पर मैने अनौपचारिक ढंग से यह विषय छेड़ा, तो अनुभवी एस. पी. बोले,

              “यह अनुमान केवल मेरा नहीं होता है, समस्त मेला प्रशासन का होता है। प्रशासन ने 10 लाख यात्रियों की व्यवस्था हेतु बजट स्वीकृत कराया था और पूरे का खर्च दिखाया है। अब दस लाख से कम यात्रियों का अनुमान कैसे दिया जा सकता है? यात्रियों का आंकड़ा अधिक होने पर प्रदेश शासन को प्रशंसा मिलेगी और भविष्य में केंद्र से अधिक अनुदान मांगने का अवसर भी।“

            अपने आगे के सेवाकाल में मैने अनुभव किया कि अनुभवी एस. पी. की बात में बड़ा दम था। तभी प्रत्येक आने वाले कुम्भ मेले में यात्रियों की संख्या का आंकड़ा ऐसी लम्बी छलांगें लगाता रहा है जैसी शेर द्वारा पीछा किये जाने पर हिरन छलांग लगाता है। मैने समाचार पढ़ा है कि वर्ष 2021 में  हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेला के लिये प्रशासन ने 12 करोड़ यात्रियों के आने का अनुमान दिया है। मैं जानता हूं कि मेले के अंत में प्रशासन का आंकड़ा इसके ऊपर ही जायेगा, जिसकी परिणति इसे मानव इतिहास में विश्व का सबसे बड़ा मेला घोषित होने,  शासन की विश्व भर में वाहवाही होने और अनेक व्यक्त्तियों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो जाने में होगी। 

                          पर मैं अपने गणित के पुराने शौक के लिये क्या करूं? वह जागृत हो गया है और मैने हिसाब लगाया है कि  भारत की आबादी लगभग 132 करोड़ है और उसका 1/11 वां भाग होता है 12 करोड़। इसका अर्थ हुआ कि मेरे 2200 आबादी वाले गांव से औसतन 200  (2200/11) लोग कुम्भ स्नान हेतु जाने चाहिये। मैने गांव से पता लगाया तो पाया कि पिछले वाले कुम्भ में तो 20 भी नहीं गये थे; मैं अचम्भित हूं कि इस बार एकदम भक्तिभाव में दस-बारह गुना वृद्धि कैसे हो जायेगी जो 200 चले जायेंगे?

                                                                                -क्रमशः

Thursday, 27 August 2020

अपराध: कानून व्यवस्था, लोक व्यवस्था । ( पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की फेसबुक वॉल से साभार।)

*अपराध* - *कानून व्यवस्था* - *लोक व्यवस्था*
हमारे बहुत से मित्र, जिनमें पत्रकार मित्र भी शामिल हैं, अपराध स्थिति, लोक व्यवस्था और कानून व्यवस्था के बीच भ्रमित रहते हैं। अतः मैंने इसे सामाजिक, पुलिसिंग और विधिक दृष्टिकोण से स्पष्ट करना जरूरी समझा।

अपराध स्थिति (Crime control)- जब कोई अपराध एकल रूप से घटित होता है तो वह शुद्ध आपराधिक मामला होता है। अगर पेशेवर अपराधी बहुतायत में अपराध करें या पहले से स्थिति ज्ञात होने पर भी पुलिस कार्यवाही न करे या अधिकांश अज्ञात अपराध न खुल पायें, तो यह कहा जा सकता है कि उस क्षेत्र में अपराध स्थिति ठीक नहीं है और अपराध नियंत्रण में नहीं हैं। किन्तु इस आधार पर यह कहना गलत होगा कि उस क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है या अनियंत्रित है।

कानून व्यवस्था (Law and Order)- इसके अन्तर्गत बलवा, दंगा, रोड जाम करना, सार्वजनिक स्थान पर हत्या/हमला, तोडफ़ोड़, किसी संस्थान/कार्यालय पर हमला, लोकसेवकों/व्यापारियों/व्यवसायियों से धन वसूली इत्यादि घटनाओं का अधिक होना और/या सख्त कार्यवाही न होना खराब कानून व्यवस्था का द्योतक है।

लोक व्यवस्था- जब अपराध या कानून व्यवस्था की ऐसी घटनाएं हों जिनसे समाज में भय और आतंक व्याप्त हो जाये या समाज का आम जीवनढर्रा (even tempo of life in society) अव्यवस्थित हो जाये तो ऐसी घटनाएं लोक व्यवस्था की घटनाएं कही जाती हैं। उदाहरण के लिए- कुछ अपराधी भीड़भाड़ वाले स्थान/बाजार में हत्या करते हैं और धमकी तथा चेतावनी देते हैं कि जो कोई इस केस में गवाही देगा या उनके आपराधिक कृत्यों में बाधक बनेगा, उसका यही हाल होगा। 
यदि किसी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं नियंत्रित न हो पायें और सख्त वैधानिक कार्यवाही न की जाये तो यह मत बनता है कि उस क्षेत्र में लोक व्यवस्था नियंत्रण से बाहर हो गई है।

उम्मीद है कि इस व्याख्या से सही स्थिति और मापदंडों को समझने में सहायता मिलेगी।

नौकरशाही के भ्रष्टाचार और अन्याय पूर्ण कार्य और राजनैतिक दबाव।( पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की फेसबुक वॉल से साभार।)

नौकरशाह कहते हैं कि बड़ा टेंशन है, बड़ा प्रेशर है, पर तैनाती जिले में ही चाहिये। अब तो वरिष्ठ सरकारी अधिकारी खुलकर कहते हैं कि मंत्री जी का या फलां फलां का दबाव था। वे अपने भ्रष्टाचार और अन्यायपूर्ण कार्यों के लिए राजनैतिक दबाव को सही और पर्याप्त औचित्य मानते हैं।

कथित ईमानदार अधिकारी भी राजनैतिक इशारे पर गलत काम करने या गलत रिपोर्ट बनाने को सही मानते हैं। श्री हरीशचंद्र गुप्ता, तत्कालीन कोयला सचिव इसी तरह गलत रिपोर्ट बनाने के कारण सजायाब हुये। आश्चर्य है कि नौकरशाही की पूरी लाबी उन्हें बचाने में ईमानदारी से लगी रही। आगे ऐसी अनहोनी न हो, इस उद्देश्य से नौकरशाही ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम को, जो वर्ष 1988 में सुदृढ़ प्रारूप में बनाया गया था, नख-दन्त विहीन कर दिया। दबाव और प्रलोभन में गलत रिपोर्ट बनाने और फर्मों को नाजायज लाभ पहुँचाना अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया। और भी व्यापक और विस्तृत संसोधन करके भ्रष्टाचार के लिए सजा होने के सारे रास्ते बन्द कर दिये गए।

वरिष्ठ नौकरशाहों खासकर आई.ए.एस., आई.पी.एस. और प्रथम श्रेणी की सेवाओं के अधिकारियों द्वारा दबाव या तनाव की दलीलें औचित्यरहित एवं शरारतपूर्ण हैं। इस स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को दबाव/तनाव बर्दाश्त करने ही होंगे। इस विषय पर मुझे उत्तर प्रदेश संवर्ग के वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी श्री विजय शंकर पाण्डेय का कथन याद आ रहा है। वर्ष 2011 में वरिष्ठ अधिकारियों (डी.एम./एस.पी./कमिश्नर/डी.आई.जी./आई.जी.) की बैठक में कुछ अधिकारियों द्वारा इसी तरह दबाव/तनाव की दलीलें दी गईं। इस पर श्री विजय शंकर पाण्डेय, जो उस समय अपर कैबिनेट सचिव थे, ने कहा कि-

"ये सेवाएं कमजोर कलेजे वालों के लिए नहीं हैं। जो दबाव/तनाव नहीं झेल सकते, उन्हें दूसरी नौकरी ढूंढ़ लेनी चाहिए अथवा हल्की/शांतिपूर्ण पोस्ट पकड़ लेनी चाहिए"।

मैं यह बातें पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान हमेशा बताया करता था। मैं शोले फिल्म के एक डायलॉग के जरिये भी इस बात को समझाया करता था-
 "शोले में ठाकुर जब जय और वीरू से गब्बर सिंह को पकड़ने के लिए बीस हजार रुपये की बात कहता है तो वीरू कहता है कि गब्बर कोई बकरी का बच्चा है जो दौड़े और पकड़ लिया? इस पर ठाकुर कहता है, "जानता हूँ कि काम मुश्किल है लेकिन आसान काम के इतने पैसे नहीं दिये जाते"। मै प्रशिक्षु अधिकारियों को कहा करता था कि माना कि पुलिस का काम बहुत कठिन है पर याद रखिये कि आसान काम के लिए 'थानेदार या कप्तान' नहीं लगाये जाते।

जिला मैजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को प्रदत्त कानूनी शक्तियां, संसाधन और सुविधायें एवं कार्यभार अत्यंत वृहत और व्यापक होते हैं। इसकी तुलना बड़े-बड़े पदों से भी नहीं की जा सकती है। लिहाजा ये पदाधिकारी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं कर सकते। सरकार और सरकार के माध्यम से अन्ततः जनता यह उम्मीद करती है कि ये पद धारक दृढ़तापूर्वक कार्य करेंगे।

एक बात और मैं अपने तजुर्बे से कहूंगा कि सच्चे, ईमानदार और परिश्रमी अधिकारियों का कोई उत्पीड़न नहीं होता है। अधिकतर यह होता है कि उन्हें किनारे कर दिया जाता है। ठीक है, जो काम मिला है उसे मन लगाकर करिये और चैन से रहिये। इन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को उच्च वेतन, उच्च सुविधाएं, सभी संसाधन मिलते हैं। और सबसे ऊपर, इन अधिकारियों को नागरिक,  बहुत ज्यादा सम्मान देते हैं और विश्वास करते हैं। इसके बाद जनता की यह उम्मीद न्यायपूर्ण है कि ये अधिकारी इतना सब गरीब  जनता के पैसों से पाने के बाद कुछ असुविधायें बर्दाश्त करेंगे। यह सामान्य बात है कि कई अधिकारी ये असुविधायें बर्दाश्त नहीं कर सकते। तब ऐसे अधिकारियों को चाहिए कि वे शान्तिपूर्ण पोस्टिंग लेलें।

यह लिखने का मेरा उद्देश्य यह है कि आम नागरिक और प्रबुद्धजन, नौकरशाही के इन बहानों को स्वीकार न करें। ऐसे उच्च पदाधिकारियों के ये बहाने नहीं सुने/माने जाने चाहिए। ऐसे अधिकारियों को चाहिए कि वे शान्तिपूर्ण/सुरक्षित तैनाती पकड़ लें; बहुत से पद ऐसे हैं!

आंकड़ों का खेल ( पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार।)

आंकड़ों का खेल (भाग 3- अगस्त 25 की पोस्ट के आगे)

2. सामान्य प्रशासन विभाग

अ. आंकड़े का चहुंदिश खेल-  

            यद्यपि सभी विभाग आंकड़ों का खेल खेलते हैं परंतु इनके समन्वयक होते हैं सामान्य प्रशासक अर्थात ज़िलाधिकारी, एस. डी. एम., सी. डी. ओ., तहसीलदार आदि। व्यवहारिक रूप में ये विभिन्न विभागों एवं शासन के बीच के बिचौलिये हैं। हम जानते ही हैं कि बिचौलिये न तो माल के उत्पादक होते हैं और न उपभोक्ता, परंतु माल सबसे अधिक वे ही काटते हैं। शराब, तेल, बंदूक, फ़ैक्ट्री, होटल, मेला, सर्कस, सिनेमा, पत्थर, मौरंग आदि किसी का लाइसेंस देना हो, या  बाढ़, सूखा, आग, दुर्घटना, कन्या शिक्षा, निर्धन विवाह, ओल्ड-एज पेंशन आदि किसी प्रकार का अनुदान देना हो अथवा मनरेगा, कौशल-विकास, मध्यान्ह-भोज, शिशु-सुरक्षा आदि किसी प्रकार के विकास की मद का पैसा आवंटित करना हो, गंगा बहेगी कलक्टर रूपी गोमुख से ही। अब यदि उस गंगा में कलक्टर आफ़िस के कर्मी डुबकी लगाकर अपने हक का पुण्य अर्जित कर लेते हैं, तो आपत्ति की क्या बात है?  इस गंगा स्नान का ‘पुण्य’ अनुदान को खर्च करने के आंकड़े के अनुपात में मिलता है। क्या आंकड़ों में खेल करने का यह पर्याप्त कारण नहीं है?    
               ग्रामीण विकास की अधिकांश योजनायें उन अधिकारियों द्वारा बनाई जाती हैं, जिहोंने पिकनिक के अवसर के अतिरिक्त ग्राम देखे ही नहीं होते हैं। अतः अधिकांश योजनायें कागज़ पर कार्यान्वित होतीं हैं, उदाहरणार्थ- 1. मेरे ग्राम की आंगनबाड़ी प्रभारी प्रति माह वेतन पातीं थीं, परंतु ग्वालियर में ब्याही थीं और वहीं ससुराल में रहती थीं। 2. एक छोटी सी पोखरी के अतिरिक्त मेरे गांव में ग्राम समाज की कोई ख़ाली ज़मीन ही नहीं है, जहां कोई काम किया जा सके, पर मनरेगा का कार्यक्रम वर्षानुवर्ष चल रहा है और ‘हक’ के अनुसार समस्त भागीदारों का नियमित भुगतान हो रहा है। 3. सरकारी स्कूल में बच्चों को मध्यान्ह भोज बच्चों के आंकड़ों के अनुसार बंट जाता है, चाहे बच्चे आयें या न आयें।
 
              योजनायें इतनी हैं कि अधिकांश अधिकारीगण उन सबके नाम भी नहीं गिना सकते हैं। पर इनके कार्यान्वन को सफल दर्शाने हेतु आंकड़ों का खेल करना उन बिचारों की मजबूरी होती है। और जब आंकड़े बनते हैं, तो अनुदान भी ‘खर्च’ होता ही है। 'खर्च' होकर कहां जाता है, इससे किसी को क्या मतलब?

-  क्रमशः

आंकड़ों का खेल (पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार)

आंकड़ों का खेल (भाग-2- दि. 24 अगस्त की पोस्ट से आगे)

1. पुलिस विभाग
 
अ. अपराध नियंत्रण 
                पुलिस की दक्षता का मुख्य मापक अपराधों में कमी होता है। समयाभाव के कारण थाना का निरीक्षण करने वाले अधिकारी को अपराधों में वास्तविक कमी या बढ़ोत्तरी का ज्ञान हो पाना अत्यधिक दुरूह होता है| मजबूरन वह वर्तमान वर्ष के अपराध के आंकड़ों को विगत वर्ष के आंकड़ों से तुलना कर समीक्षा करता है। अतः अधिकांश थानेदारों का ध्यान अपराधों को कम रखने पर उतना नहीं रहता है, जितना अपराध के आंकड़ों को कम रखने पर रहता है। पुलिस के उच्चाधिकारी एवं शासक बात तो एफ़. आई. आर. अविलम्ब दर्ज़ किये जाने की कहते हैं, परंतु उनमें बहुत से मन ही मन आंकड़ा-नियंत्रण के खेल के पक्षधर होते हैं। आंकड़े कम रहने पर वे प्रेस एवं विपक्ष की आलोचना का डटकर सामना कर लेते हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि बढ़ती आबादी, नये आपराधिक कानून एवं समाज की बदलती सोच के कारण अपराधों का बढ़ना स्वाभाविक है, परंतु कम शासक ही साहसपूर्वक यह बात कह पाते हैं। जनमानस भी इस तथ्य को अंगीकार नहीं करता है। उत्तर प्रदेश पुलिस के वर्ष 1970 के आई. जी. श्री एन. एस. सक्सेना ने घोषित कर दिया था कि उ. प्र. में वर्ष में केवल डेढ़ लाख अपराध ही दर्ज होते हैं जब कि लगभग 4 लाख संज्ञेय अपराध घटित होते हैं। उन्होंने भरसक प्रयत्न भी किया कि सभी अपराध पंजीकृत हों। परिणाम यह हुआ कि एक वर्ष में ही आई. जी. बदल दिये गये। इसके विरुद्ध उ. प्र. की एक मुख्य मंत्री ने कार्यभार सम्हालते ही निर्देश निर्गत कर दिया था कि 6 माह में अपराधों में 70 प्रतिशत की कमी हो जानी चाहिये। मुख्य मंत्री के आदेश का अक्षरशः पालन करने हेतु कुछ कारगुज़ार पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट लिखाने आये लोगों को दूर से ही गरियाना और दौड़ाना प्रारम्भ कर दिया| जो नहीं कर पाये, वे मुख्य मंत्री की समीक्षा बैठक के दौरान दंडित हो गये और उनके स्थान पर अधिक कारगुज़ार अधिकारियों की नियुक्ति हो गई। परिणामतः उन मुख्य मंत्री ने अपराध-नियंत्रण में दक्ष होने की सुख्याति अर्जित कर शान से अपना कार्यकाल पूर्ण किया था। 
             
ब. चुनावी सभा का गणित
              मैं वर्ष 1974 में पुलिस अधीक्षक सहारनपुर के पद पर नियुक्त था। एक दिन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी सभा आयोजित हुई। सभा के उपरांत उसमें लगभग 20000 की भीड़ होने की सूचना एल. आई. यू. इंस्पेक्टर द्वारा इंटेलीजेंस मुख्यालय को भेज दी गई। उस वायरलेस की प्रतिलिपि जब म्रेरे अवलोकन हेतु प्रस्तुत हुई, तो मेरा गणित का स्कूली शौक जागृत हो गया। मैने हिसाब लगाया कि प्रधान मंत्री के मंच के सामने के चार सेक्टर्स में अधिकतम एक हज़ार व्यक्ति प्रति सेक्टर के हिसाब से चार हज़ार व्यक्ति आ सकते थे, उसके पीछे के चार सेक्टर्स में अधिकतम डेढ़ हज़ार प्रति सेक्टर के हिसाब से 6 हज़ार लोग आ सकते थे। उनके पीछे खड़े हुए लोग और दायें-बांये खड़े पुलिसजन एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों को जोड़ते हुए खींचतान कर दो हज़ार लोग और हो सकते थे। इस प्रकार किसी भी प्रकार 12 हज़ार से अधिक का योग नहीं बनता था। मैने एल. आई. यू. इंस्पेक्टर को बुलाकर कहा कि 10-12 हज़ार की संख्या को 20000 क्यों रिपोर्ट किया गया?   मेरी अपेक्षा कहीं अधिक अनुभवी इंस्पेक्टर ने उत्तर दिया,
             “सर, मैने तो फिर भी कम संख्या लिखकर भेजी है। अपनी जनप्रियता साबित करने हेतु नेता तो लखनऊ में 30 हज़ार के ऊपर की संख्या बतायेंगे। उ. प्र. शासन भी प्रधान मंत्री के सामने शासन की जनप्रियता की अच्छी छवि प्रस्तुत करने हेतु बढ़ी हुई संख्या ही रखना चाहेगा। 10-12 हज़ार की संख्या पर तो नेता प्रश्नचिन्ह लगा देंगे। उनमें जो आप से नाख़ुश होंगे, वे मुख्य मंत्री को यह भी कह देंगे कि एस. पी., सहारनपुर विपक्षी मानसिकता के हैं।“
              अनुभवी इन्स्पेक्टर की बात में मुझे दम लगा। 

स. चुनावी परिणाम का अनुमान 
            
                 वर्ष 1977 में मैं इंटेलीजेंस मुख्यालय, लखनऊ में नियुक्त था। इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी ने संसद का चुनाव होना घोषित कर दिया था। उन दिनो इंटेलीजेंस के मुखिया श्री श्रीष चंद्र दीक्षित, डी. आई. जी. थे। वह अत्यंत समझदार एवं सुलझे हुए अधिकारी थे। उनसे मुख्य मंत्री ने चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान पूछा था। अतः डी. आई. जी. साहब ने मुख्यालय में नियुक्त पुलिस अधीक्षकों की मीटिंग बुलाई थी। प्रदेश के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के कांग्रेसी उम्मीदवार की स्थिति के विषय में सूचना एकत्र कर हम डी. आई. जी. को अवगत करा रहे थे। डी. आई. जी. साहब तदनुसार उनके नाम के आगे V (Victory), L (Lose)  अथवा D (Doubtful) लिख देते थे| यदि कहीं पर कांग्रेस की हार में ज़रा भी संदेह होता था, तो डी. आई. जी. साहब उस नाम के सामने V (Victory) लिख देते थे। सुल्तानपुर के विषय में सूचना थी कि संजय गांधी न सिर्फ़ हारेंगे, वरन उनकी ज़मानत भी ज़ब्त हो जायेगी। हम सब अवाक थे। डी. आई. जी. साहब कुछ देर तक सोचते रहे, पर शीट पर संजय गांधी के नाम के आगे उन्होंने कुछ नहीं लिखा। आगे रायबरेली का नम्बर आया, तो वहां से भी इंदिरा गांधी के पक्का हारने की रिपोर्ट थी। कुछ देर सोचने के बाद डी. आई. जी. साहब ने इंदिरा गांधी के नाम के आगे V (Victory) लिख दिया और संजय गांधी के नाम के आगे D (Doubtful)  लिख दिया। हम आश्चर्य से यह देख रहे थे, तो वह मुस्कराते हुए बोले,
                   “मैं आप सब से सहमत हूं कि फ़ील्ड रिपोर्ट पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। पर इन दोनो को हारता हुआ बताकर मैं अनावश्यक बहादुरी नहीं दिखाना चाहता हूं। अगर किसी प्रकार कांग्रेस जीत ही गई, तो मैं तो सदैव के लिये कांग्रेस का शत्रु घोषित हो जाऊंगा।“ 

                                                                                 -क्रमशः

आंकड़ों का खेल ( पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार ।)

आंकड़ों का खेल

भाग-1

                पता नहीं कि चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को शासन चलाने में सफलता के लिये ‘आंकड़ों का खेल’ नामक सूत्र बताया था या नहीं। पर आज के युग में शासकीय-प्रशासकीय कार्यों में इसका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है और कमोबेश समस्त देशों में हो रहा है। हाल में चीन ने कोरोनावाइरस से हुई मौतों का आंकड़ा लगभग तीन हज़ार बताया था। डब्लू. एच. ओ. की टीम के वहां पहुंचने वाले दिन यह आंकड़ा चार हज़ार के ऊपर हो गया था। चीनी शासन के जानकारों का कहना है कि वास्तविकता इससे तीन-चार गुनी भी हो सकती है। जनतांत्रिक देश भी आंकड़ों का खेल खेलने से परहेज़ नहीं करते हैं। ब्रिटेन के यशस्वी प्रधान मंत्री सर विंस्टन चर्चिल का आंकड़ों से खेल सम्बंधित एक किस्सा बहुत मशहूर है। एक दिन चर्चिल के पास उनका सेक्रेटरी आया। उसके मुख पर घोर निराशा का भाव था। वह बोला, “आफ़्टर सिक्स डेज़ दिस स्टार्ड क्वेश्चन हैज़ टु बी आंसर्ड बाइ यू इन दी पार्लियामेंट्। बट दि इंफ़ौर्मेशन रिक्वायर्ड विल टेक ऐट लीस्ट सिक्स मंथ्स् टु कलेक्ट इट (इस तारांकित प्रश्न का उत्तर आप को छः दिन बाद पार्ल्यामेंट में देना है। परंतु इसमें मांगे गये आंकड़े की सूचना को इकट्ठा करने में कम से कम छः माह लगेंगे)”। चर्चिल ने कहा पत्रावली दिखाओ और फिर उसमें वांछित आंकड़े के स्थान पर एक संख्या लिख दी। सेक्रेटरी आश्चर्य से उनकी ओर देखते हुए बोला, “यदि विपक्ष ने इस संख्या का झूठ साबित कर दिया, तो आप की स्थिति बड़ी नाज़ुक हो जायेगी।“ 

            चर्चिल ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “डोंट वरी. इफ़ हिज़ मैजेस्टी’ज़ गवर्नमेंट विल नीड सिक्स मंथ्स टु कलेक्ट दिस इन्फ़ौर्मेशन, हिज़ मैजेस्टी’ज़ अपोज़ीशन विल टेक ऐट लीस्ट सिक्स इयर्स टु प्रूव दैट इट इज़ फ़ाल्स (चिंता न करें। यदि शासन को यह सूचना एकत्र करने में छः माह लगेंगे, तो विपक्ष को यह साबित  करने में कि यह संख्या ग़लत है, कम से कम छः वर्ष लग जायेंगे)”।

             हम भारतीयों ने शासन एवं प्रशासन ब्रिटिश से सीखा है और किसी ख़ुराफ़ात को अपना लेने की क्षमता में हम उनसे बहुत आगे हैं। इस कारण आंकड़ों के खेल में हम चर्चिल से कम माहिर नहीं हैं। अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की बात हो अथवा विकास की योजनाओं को बनाने एवं कार्यान्वन की बात हो, दोनो में हम आंकड़ों का ऐसा मकड़जाल बुन देते है कि आंकड़ों का यथार्थ से दूर-दूर का सम्बंध न रह जाय। इस क्षेत्र में कतिपय विशेष योग्यता से विभूषित विभागों के कार्यों का वर्णन समीचीन होगा। 

                                                                                                -क्रमशः

Saturday, 22 August 2020

कलाकार से गलाकार बन खींचो मत मात्राये।

सम्मान्य रचनाकारों से 
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                ●● गीतिका ●●

मात्रा-पतन दोष मत मानो, कमजोरी तो मानो  ।
नये सिरे से काव्य-सृजन के, सब गुण-दोष बखानो  ।

भाषा पहले बनी,व्याकरण बहुत बाद में आया  ;
फिर इसके अनुसार हुआ परिमार्जन, यह पहचानो  ।

कविता-कला कसौटी पर कस, आयी अलख जगाने;
नव रस से भरपूर हुई कण्ठस्थ सहज ही, जानो  ।

वार्णिक मात्रिक छन्द रचे अपनी क्षमता से  सबने  ,
यति गति लय तुक चरण तथा अवरोहारोह मिलानो  ।

एक-एक   अक्षर   शब्दों   का   संयोजन  कर  पाना ---
कितना है श्रमसाध्य कार्य यह,  कुछ-कुछ तो पहचानो  ।

कलाकार से गलाकार बन,खींचो मत मात्राएँ  ;
तर्क सुसङ्गत रखो, कुतर्कों से मत अपनी तानो ।

अनुस्वार अनुनासिक सबको, पुनः चलन में लेकर  ;
जब  जैसे  सम्भव  हो  वैसे, लेखन  तजो  पुरानो  ।

कुछ दिन के अभ्यास बाद  सब कुछ सम्भव हो रुचिकर, 
अखबारों  का  उदाहरण  दे, करो  न  बन्धु  बहानो ।

विश्व-पटल पर चमका दो फिर से शुचि हिन्दी भाषा  ,
अपवादों  को  छोड़ ,  ठान  पूरी  करने  की  ठानो  ।

संस्कृत  की  बेटी  है  हिन्दी,  वही  वर्णमाला  है ;
'घट' इसके अनुसार सुलेखन-सार  सदा  अपनानो  ।।

Friday, 21 August 2020

कवियों की लाटरी लगी है इस कोरोना काल में।

गीत 

कवियों की लाटरी लगी है, इस कोरोना काल में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                             जय माँ  शारदे  .......

किसकी रचना कौन पढ़ रहा, इस तह में मत जाइए  ।
कोकिल-कण्ठी गलाकार को, सुनकर मोद मनाइए  ।
वाह-वाह के साथ टिप्पणी,  लिखिए और लिखाइए  ।
कुछ भी पल्ले पड़े न तो भी,कविता-पाठ सराहिए  ।
विफल 'लाॅक डाउन' का घर में, बैठे लाभ उठाइए  ।
तृप्ति हृदय को मिल जायेगी, और तुम्हें क्या चाहिए  ।।

बड़े भाग्य से  ऐसे अवसर, मिल पाते कुछ साल में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                            जय माँ शारदे   ..........

जितने सम्भव हों उतने मुख-पोथी मित्र बनाइए  ।
और सैकड़ों ग्रुप, पृष्ठों से, जल्दी से जुड़  जाइए ।
अगर नहीं कविता लिख पाते,फौरन जुगत भिड़ाइए  ।
जिसको पढ़ कर मन होता, कविता वही चुराइए  ।
'कापी-पेस्ट' सहायक होती, कुछ इसको अपनाइए  ।
करके तिकड़मबाजी  जग में, अपना नाम  कमाइए  ।।

मलकर हाथ वही पछताते, जो पड़ते न बवाल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                          जय माँ शारदे  .........

 जैसे भी हो, मित्र-मण्डली के अगुआ बन जाइए  ।
अवसर पाते ही पल भर में, बिगड़ी बात बनाइए  ।
राजी से नहिं मानें,  अखटी-बखटी उन्हें  सुनाइए  ।
याद रखो, अपने जीवन में,  कभी न मुँह की खाइए  ।
अन्दर भले घँघारि भरी हो, बाहर खूब सजाइए  ।
बनिये इतने मृदु कि शत्रु को, भी ठण्डक  पहुँचाइए  ।।

जीवन हो नहिं व्यर्थ, पड़े यदि  कवियों के जञ्जाल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                          जय माँ शारदे   .........

कविता की छीछालेदर भी, मञ्चों पर विकराल  है  ।
फूहड़ हास्य, चुटकुले बाजी,उछलकूद  बेहाल  है  ।
तेल लगाने गया व्याकरण, चारों ओर धमाल  है  ।
रही-सही सब कसर निकाली, 'लाइव' बना कमाल है 
नचा रहा सारी दुनिया को, निशिदिन अन्तर्जाल  है ।
इसके आगे नहीं गल रही, आज किसी की दाल  है  ।।

उल्लू जैसी धमक आजकल, आने लगी मराल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                        जय माँ शारदे   ............

Tuesday, 18 August 2020

कारगिल शहीद की जयंती पर ई सैनिक समागम।

कारगिल शहीद हरिओम सिंह स्मृति
           ई सैनिक समागम 
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दिनांक : 20 अगस्त 2020
समय :  मध्यान्ह 11 बजे से 01 बजे तक
स्थान :  जियो मीट एप 
( मीटिंग में जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें तथा नीचे दिए गए पासवर्ड का प्रयोग करें: https://jiomeetpro.jio.com/shortener?hash=co-8bhomZX853a6f4d1c181597740375159 and enter the
पासवर्ड  dCqZ4.
मीटिंग आई डी 2588752055 )
  

                  ।।अध्यक्षता ।।
        विजय पाल सिंह भदौरिया
मन्डल सन्गठन मन्त्री, क्षत्रिय महासभा बरेली
                ।।मुख्य अतिथि।।
डॉ (प्रो0) आर एस एस पुन्डीर,दर्जा राज्यमंत्री
अध्यक्ष,  ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश
     ब्रिगेडियर इन्द्रजीत सिंह (शौर्य चक्र)
          स्टेशन कमांडर बरेली छावनी
          कर्नल मोहर सिंह, सहारनपुर
               ।।विशिष्ट उपस्थिति।।
     शिवम प्रताप सिंह, प्रतिष्ठित व्यवसायी
       (पुत्र कारगिल शहीद हरिओम सिंह)
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                ।।आयोजक मन्डल।।
विजय रतन सिंह संरक्षक क्षत्रिय सैनिक सभा  सुखवीर सिंह भदौरिया संरक्षक क्षत्रिय सैनिक सभा बदायूं, रतन वीर सिंह जिला अध्यक्ष क्षत्रिय सैनिक सभा बदायूं, सतेन्द्र पाल सिंह चौहान जिला उपाध्यक्ष क्षत्रिय सैनिक सभा बदायूं, भुवनेश कुमार सिंह जिला महासचिव क्षत्रिय सभा बदायूं
           ।। कार्यक्रम संयोजक ।।
 वेदपाल सिंह कठेरिया, जिला महासचिव 
            क्षत्रिय महासभा बदायूं
       मुख्य सहयोगी : कैप्टन राम सिंह
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Sunday, 16 August 2020

चेतन चौहान की मृत्यु पर व्यक्त किया शोक।

प्रसिद्ध क्रिकेटर व राजनेता चेतन चौहान के निधन पर शोक व्यक्त।

प्रसिद्ध क्रिकेटर व उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान के निधन से महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के साथ ही क्षत्रिय महासभा बदायूं के समस्त पदाधिकारी, सहयोगी व कार्यकर्ता शोकमग्न है।

महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट व क्षत्रिय महासभा बदायूं के समस्त पदाधिकारियों, सहयोगियों व कार्यकर्त्ताओं ने चेतन चौहान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की। 

शोकाकुल

महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट
क्षत्रिय महासभा बदायूं

Saturday, 15 August 2020

स्वतन्त्रता दिवस पर गूंजा रघुपति राघव राजाराम .....।

स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर गूंजा " रघुपति राघव राजाराम ..... "

राष्ट्रीय पर्वों को लोकपर्व बनाने को जारी रहेगा जन जागरण अभियान।

गुड गवर्नेंस की स्थापना हेतु प्रधानमंत्री को प्रेषित किया छ: सूत्रीय अपेक्षा पत्र।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के तत्वावधान में अभियान के पदाधिकारियों व समस्त सूचना कार्यकर्त्ताओं ने स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र राग "" रघुपति राघव राजाराम ..... "" का अपने घरों में ही मध्यान्ह 10:30 बजे से 11: 30 बजे तक कीर्तन किया। कीर्तन के उपरांत सभी कार्यकर्ताओं ने माई ग्रीवांस पोर्टल व ट्विटर के माध्यम से छः सूत्रीय अपेक्षा पत्र प्रधानमंत्री को प्रेषित किया ।

इस अवसर पर भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने बताया कि आज स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के पदाधिकारियों, सहयोगियों व कार्यकर्त्ताओं द्वारा घरों में ही कुटुम्ब कीर्तन किया गया। कीर्तन के पश्चात गुड गवर्नेंस की स्थापना हेतु प्रधानमंत्री को छ: सूत्रीय अपेक्षा पत्र प्रेषित किया गया है। अपेक्षा पत्र में लोकपाल अधिनियम में वर्णित व्यवस्था अनुसार देश के हर राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाने, सूचना अधिकार अधिनियम को व्यवहारिक व प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक संशोधन किए जाने, समस्त राजकीय कार्मिकों की चल अचल परिसम्पतियों का विवरण सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 के अन्तर्गत सार्वजनिक किए जाने, सूचना व सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के उपाय किए जाने, जनहित गारंटी कानून/ सिटीजन चार्टर को प्रभावी बनाने के साथ ही केन्द्र व राज्य स्तर पर नियमित निगरानी हेतु तन्त्र का गठन किए जाने एवं शिक्षा व चिकित्सा को निजी हाथों से मुक्त किए जाने की मांग की गई है।

श्री राठोड़ ने कहा कि अभी भी राष्ट्रीय पर्व लोक पर्व नहीं बन सके हैं, आमजन की राष्ट्रीय पर्वों में रूचि नहीं रहती है, राजकीय कार्मिक भी राष्ट्रीय पर्व को अवकाश मानते हैं। भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के सहयोगियों द्वारा राष्ट्रीय पर्वों को होली, दीवाली,ईद की तरह लोकपर्व बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी इमारतों में ही नहीं बल्कि हर घर में राष्ट्रीय पर्व मनाये जाये, इसके लिए निरन्तर जन जागरण किया जा रहा है।जिस दिन देश के हर घर में राष्ट्रीय पर्व मनाये जाने लगेंगे, तन्त्र में गण की भागीदारी होने लगेगी उस दिन सच्चे अर्थों में राष्ट्रवाद की परिकल्पना साकार होंगी ।

कुटुम्ब कीर्तन के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से एस सी गुप्ता, डाल भगवान सिंह,एम एल गुप्ता, डॉ राम रतन सिंह पटेल, सुरेश पाल सिंह, कैप्टन राम सिंह, वेदपाल सिंह, शमसुल हसन, रामगोपाल,एम एच कादरी, अखिलेश सिंह,अभय माहेश्वरी, राम-लखन, अखिलेश सोलंकी,सी एल वर्मा एडवोकेट,असद अहमद, नारद सिंह, कृष्ण गोपाल,आर्येन्द्र पाल सिंह, सतेन्द्र सिंह,भानु प्रताप सिंह, महेश चंद्र, वीरपाल, ज्ञानेंद्र सिंह, अरविंद कुमार, सुमित कुमार, भुवनेश कुमार, टीकम सिंह,मो इब्राहिम, विनोद सक्सेना, अवधेश, विपिन, भगवान दास, श्याम लाल भारती, राजेंद्र,आसाराम, जवाहर लाल, राहुल, विपिन यादव, राजीव, राजेश शर्मा, कृष्ण वीर सिंह, हरिओम शर्मा, सुखवीर सिंह भदौरिया, डॉ राकेश, अमीरुद्दीन, सौरभ गुप्ता, सतीश आदि की सहभागिता रही।

Wednesday, 12 August 2020

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की प्रधानमंत्री से छः वर्ष में छः अपेक्षाएं :
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१- २०१४ में लोकपाल बिल पास हुआ,२०१९ में आम चुनाव से पूर्व लोकपाल की नियुक्ति हुई। किन्तु अभी तक नियमावली व अन्य सन्शाधनो के अभाव में लोकपाल निष्क्रिय है, राज्यों में भी लोकायुक्त नियुक्त नहीं हुए। लोकपाल को सक्रिय कर राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो।

२- नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित अवधि में नहीं मिल पा रही है अस्तु सिटीजन चार्टर/ जनहित गारंटी कानून प्रभावी हो।

३- सूचना का अधिकार दम तोड़ रहा है। सूचना प्राप्ति हेतु तीन से पांच साल तक लड़ाई लड़नी पड़ रही है।अस्तु सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में संशोधन करके तत्काल सूचना दिए जाने,प्रथम अपील पन्द्रह दिन में व द्वितीय अपील एक माह में तय करने की व्यवस्था हो। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा चार के अन्तर्गत सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों एवं उनके परिजनों की चल अचल संपत्तियां सार्वजनिक हो तथा राष्ट्रीय आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व राज्य आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति की अनिवार्यता हो।

४- न्यायपालिका को कुछ घरानों के कब्जे से मुक्त कराने हेतु भारतीय न्यायिक सेवा (IJS) का गठन हो।

५- सामाजिक कार्यकर्ताओं व सूचना कार्यकर्त्ताओं  की सुरक्षा हेतु कानून बने।

६- शिक्षा और चिकित्सा निजी हाथों से मुक्त हो।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424



( सभी सूचना व सामाजिक कार्यकर्ता यह छः अपेक्षाएं माई ग्रीवांस पोर्टल व ट्विटर के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित करें। )



आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।

प्रधानमंत्री जी ने पंचायत प्रतिनिधियों से सम्वाद किया।

मुख्यमंत्री जी ने पंचायत प्रतिनिधियों से सम्वाद किया।

पंचायतों की दुर्दशा पर कभी इनकी दृष्टि नहीं गई या फिर दृष्टि डालना जरूरी नहीं समझा।

ग्राम विकास से जुड़े विभागों के एकीकरण की भी चर्चा हुई किन्तु मंत्री पद कम हो जाने, अधिकारियों के पद कम हो जाने, प्रमोशन न होने या प्रमोशन में विलम्ब को लेकर नौकरशाही इस कार्य में बाधा बन गई। और पंचायत राज विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग एकीकृत नहीं हो सके।

कुछ अतिमहत्वपूर्ण तथ्य जो विचारणीय है :-
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१- क्या सभी ग्राम पंचायतों के अपने कार्यालय हैं?
२- क्या सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारी व लेखपाल की नियुक्ति की गई है?
३-क्या सभी ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख उपलब्ध है ? 
४- क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित की जाती है?
५-क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था अनुसार गठित आधा दर्जन समितियां ग्राम पंचायतों में सक्रिय हैं ?
६- क्या ग्राम पंचायतों में कराये गये विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक स्थानों पर अंकित किया जाता है? 
७- क्या ग्राम पंचायत में नियुक्त सफाई कर्मी सफाई कार्य करता है या फिर किसी नेता या अधिकारी के यहां सेवा दे रहा है ? 
८- क्या राजस्व सन्हिता में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम राजस्व समिति का गठन किया गया है जिसका अध्यक्ष प्रधान पद के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहा उम्मीदवार होता है?
९- क्या राशन की निगरानी हेतु सतर्कता समिति गठित की गई है?
१०-  महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके निकट सम्बन्धी तो कार्य नहीं कर रहे हैं।
११- जिस अनुपात में महिला प्रतिनिधि चुने जाते हैं,उस अनुपात में महिला अधिकारियों व कार्मिकों की नियुक्ति की गई है।
१२- रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के अंतर्गत प्रतिवर्ष कितने लोगों को सौ दिन रोजगार मिला ?
१३-जब संसद व विधानसभा की कार्यवाही आम जनता देख सकती है तो ग्राम पंचायत की कार्यवाही आम जनता क्यो नही देख सकती।
१४- ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं व विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ब्लाक की है ,ब्लाक की स्थिति देखें :-
* ब्लाक में खन्ड विकास अधिकारी नहीं।
* ब्लाक में सहायक विकास अधिकारी नहीं।
*ब्लाक में अवर अभियंता नहीं।
* ब्लाक में प्रधान लिपिक नहीं।
* ब्लाक में आन्किक सहित अन्य लिपिक नहीं।
* ब्लाक में कर्मचारियों को बने आवास खन्डहर हो गये।
१५- अब तहसील ईकाई की स्थिति देखें :-
* तहसीलदार के पद रिक्त।
* नायब तहसीलदार के पद रिक्त।
* राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के पद बड़
 संख्या में रिक्त।
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हम कैसे मान लें कि पंचायत राज व्यवस्था सुदृढ़ है।
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फिर भी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।



Tuesday, 11 August 2020

समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों व खन्ड शिक्षा अधिकारियों की सम्पत्तियो का विवरण हो सार्वजनिक।

बेसिक शिक्षा विभाग का पूरे प्रदेश में यही हाल है।
# जिलाधिकारी हरदोई द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी और खन्ड शिक्षा अधिकारी की चल अचल परिसम्पतियो की जांच हेतु शासन को पत्र लिखा जाना सराहनीय कदम है।

उत्तर प्रदेश सरकार स्व प्रेरणा से प्रदेश के समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों एवं खन्ड शिक्षा अधिकारियों की चल अचल परिसम्पतियो की जांच हेतु टास्क फोर्स का गठन करें। 

साथ ही चल अचल परिसम्पतियो का विवरण सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा चार के अधीन सार्वजनिक हो।

वीर रस की सुविख्यात कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति ई कवियत्री सम्मेलन ।


         ।। जय क्षात्र धर्म ।।
सुविख्यात कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान की जयंती के अवसर पर ई कवियत्री सम्मेलन
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दिनांक 16-08-2020,समय अपराह्न 03 बजे
            स्थान : जियो मीट एप
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                  ।।अध्यक्षता।।
         करुणा सोलंकी , जिला अध्यक्ष
            क्षत्रिय महिला सभा बदायूं
                  ।।मुख्य अतिथि।।
              माननीया दीपमाला गोयल
       अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद बदायूं
                       ।।सन्चालन।।
      सरिता सिंह चौहान, जिला महासचिव
              क्षत्रिय महिला सभा बदायूं
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                   ।। संयोजक मन्डल।।
               मृदुला सिंह, जिला उपाध्यक्ष
               ज्योति सिंह, जिला उपाध्यक्ष
                 रजनी सिंह, जिला सचिव
                  ।।कार्यक्रम आयोजक।।
                क्षत्रिय महिला सभा बदायूं
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नोट : सभी से निवेदन है कि जियो मीट एप को डाउनलोड करके पूरी कार्यप्रणाली ठीक प्रकार से समझ लें। ताकि कोई असुविधा न हो।
# कार्यक्रम का लिंक कार्यक्रम से दस मिनट पूर्व प्रेषित किया जायेगा।
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Sunday, 9 August 2020

कारगिल शहीद हरिओम सिंह व सुभद्रा कुमारी चौहान की जयंती पर होंगे विभिन्न आयोजन।

सुभद्रा कुमारी चौहान की जयंती पर 16 अगस्त को होगा ई कवियत्री सम्मेलन।

 20 अगस्त को ई सैनिक समागम के माध्यम से कारगिल शहीद का किया जायेगा स्मरण।

क्षत्रिय महासभा बदायूं की आनलाइन बैठक जूम एप के माध्यम से जिला अध्यक्ष राकेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सुप्रसिद्ध कवियत्री डॉ सुभद्रा कुमारी चौहान की जयंती के अवसर पर 16 अगस्त को "" ई- कवियत्री सम्मेलन ""  के आयोजन की योजना बनाई गई। "" ई- कवियत्री सम्मेलन "" के संयोजन की जिम्मेदारी क्षत्रिय महिला सभा बदायूं की जिला महासचिव सरिता सिंह चौहान को सौपी गई। इस आयोजन में क्षत्रिय महिला सभा की जिला अध्यक्ष करुणा सोलंकी, जिला उपाध्यक्ष मृदुला सिंह, ज्योति सिंह व जिला सचिव रजनी सिंह का भी सहयोग रहेगा।

कारगिल शहीद हरिओम सिंह की जयंती के अवसर पर 20 अगस्त को प्रतिवर्ष हरिओम सिंह नगर इटौआ में स्थित शहीद स्मारक पर सैनिक समागम का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष आपदा काल के दृष्टिगत "" ई - सैनिक समागम ""  के आयोजन की योजना बनाई गई है। "" ई- सैनिक समागम ""  के आयोजन हेतु क्षत्रिय सैनिक सभा के संरक्षक विजय रतन सिंह की अध्यक्षता में आयोजक मन्डल का गठन किया गया है। आयोजक मन्डल में विजय रतन सिंह के अतिरिक्त क्षत्रिय सैनिक सभा के संरक्षक सुखवीर सिंह भदौरिया, जिला अध्यक्ष रतन वीर सिंह, जिला उपाध्यक्ष सतेन्द्र पाल सिंह चौहान, जिला महासचिव भुवनेश कुमार सिंह को सम्मिलित किया गया है। "" ई समागम ""  का संयोजक क्षत्रिय महासभा बदायूं के जिला महासचिव वेदपाल सिंह कठेरिया को नियुक्त किया गया है।

ई कवियत्री सम्मेलन व ई सैनिक समागम में मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के रूप में ख्यातिलब्ध महानुभाव उपस्थित रहेंगे।

आनलाइन बैठक में प्रमुख रूप से विजय रतन सिंह, राकेश सिंह, वेदपाल सिंह कठेरिया, दिनेश सिंह एडवोकेट, अखिलेश चौहान, सरिता सिंह चौहान,भानु प्रताप सिंह,राजू सोलंकी, राजीव कुमार सिंह, अवनीश सोलंकी आदि सम्मिलित रहे।

Wednesday, 5 August 2020

महाराणा प्रताप चौक व रानी लक्ष्मीबाई चौक पर क्षत्रिय महासभा बदायूं ने किया दीप प्रज्वलन।

क्षत्रिय महासभा बदायूं के पदाधिकारियों ने महाराणा प्रताप चौक पर किया दीप प्रज्वलन।

क्षत्रिय महासभा बदायूं के पदाधिकारियों द्वारा महासभा के जिला सचिव अखिलेश सिंह चौहान के संयोजन में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण आरंभ होने के अवसर पर महाराणा प्रताप चौक बदायूं व रानी लक्ष्मीबाई चौक बदायूं पर दीप प्रज्वलन किया।

उल्लेखनीय है कि क्षत्रिय महासभा बदायूं द्वारा 20 जुलाई से घर घर में दीपावली मनाने का आह्वान किया गया तथा निरन्तर जन जागरण अभियान चलाया गया। जिसके परिणामस्वरूप महासभा द्वारा घोषित कार्यक्रम का अनुसरण करते हुए पूरे देश में दीपावली मनाई गई।साथ ही मिष्ठान्न वितरण कर हर्ष व्यक्त किया गया।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से डा सुशील कुमार सिंह, विजय रतन सिंह,राणा प्रताप सिंह, राकेश सिंह, दिनेश सिंह एडवोकेट, रतन वीर सिंह,रवि चौहान, धर्मेंद्र वैध, विनोद सोलंकी, मनोज चन्देल,विक्रम सिंह, राजेन्द्र सिंह राठौड़, जौहरी सिंह,शेर बहादुर सिंह,सौरभ प्रताप सिंह, आकाश सिंह, अरविंद सिंह सन्तोष सिंह,प्रवेश सिंह,मान सिंह, राजेश सिंह, योगेन्द्र सिंह, हरिओम सिंह, प्रदीप सिंह, अशोक सिंह, जितेंद्र सिंह,ओमेन्द्र सिंह, रंजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।

Tuesday, 4 August 2020

आपदा में अवसर तलाशने में सन्लग्न भ्रष्ट तत्व।

जिस प्रकार प्रतिदिन कोरोना सन्क्रमितो की संख्या सार्वजनिक होती है,उसी प्रकार -
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# कोविड हास्पिटल में प्रतिदिन प्रति रोगी होने वाला व्यय सार्वजनिक हो।
# कोआरान्टीन सेन्टर का दैनिक व्यय सार्वजनिक हो।
# आइसोलेशन सेन्टर का दैनिक व्यय सार्वजनिक हो।
# हाट स्पाट एरिया और कन्टेनमेन्ट जोन को सील करने का व्यय सार्वजनिक हो।
# सेनिटाइजेशन पर हुआ दैनिक व्यय सार्वजनिक हो।
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ये सारे व्यय सार्वजनिक होने इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि भ्रष्ट तत्व आपदा में अवसर तलाशने से नहीं चूक रहे हैं ।
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Monday, 3 August 2020

नियमित हनुमान चालीसा पाठ करके मन्दिर निर्माण कार्य निर्विघ्न संपन्न होने को की जाएगी प्रार्थना।

05 अगस्त तक महासभा व ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी करेंगे हनुमान चालीसा का पाठ।

सोशल मीडिया पर सक्रिय नागरिक प्रोफाइल पिक्चर और डीपी के रूप में भगवान राम के चित्र का करें प्रयोग।

राम मंदिर का शिलान्यास देश और दुनिया के लिए गौरव का क्षण।

क्षत्रिय महासभा बदायूं द्वारा राम मंदिर निर्माण आरंभ होने के कार्यक्रम को उत्सव का स्वरूप देने हेतु 20 जुलाई 2020 से चलाये जा रहे जनजागरण अभियान की समीक्षा हेतु  एक आनलाइन बैठक जूम एप के माध्यम से महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने कहा कि हमारे लिए ही नहीं अपितु देश और दुनिया के लिए ये गौरव के पल है जब राम मंदिर का निर्माण होते हुए हम देखेंगे। सैकड़ों वर्षों के सन्घर्ष और अनगिनत बलिदानों के परिणामस्वरूप यह स्वर्णिम अवसर आया है।हम सौभाग्यशाली है कि जिस वन्श में भगवान राम का अवतार हुआ, हमें भी उसी वन्श में जन्म मिला। भगवान राम के जीवन दर्शन को हम देखेंगे तो पाएंगे कि उनके जीवन के हर महत्वपूर्ण समय पर विघ्न पैदा हुए।  शिलान्यास का आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो इसके लिए क्षत्रिय महासभा व महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी हनुमान चालीसा, सुन्दर कांड का पाठ नियमित रूप से करें। साथ ही राम चरित मानस का पाठ करने का भी प्रयास करें।20 जुलाई को महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट व क्षत्रिय महासभा बदायूं द्वारा हर घर में कम से कम पांच दीपक जलाने, घरों में भगवान राम का चित्र स्थापित करने, राम चरित मानस, सुन्दर कांड, हनुमान चालीसा का यथासंभव पाठ करने,साथ ही हर नागरिक द्वारा कम से कम एक सौ रुपए का आर्थिक सहयोग करने का आह्वान किया गया। सौभाग्य का विषय है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े सन्गठनो व महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा भी इसी तरह का आह्वान 05 अगस्त के लिए नागरिकों से किया गया है।

क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के कोषाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि राम मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम के निमित्त चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग की रज सन्ग्रह करने का दायित्व क्षत्रिय महासभा के प्रदेश सचिव अवनीश कुमार सिंह को सौंपा गया है।यह हमारे सन्गठन व समाज के लिए गर्व का विषय है। पांच अगस्त तक हर घर में उत्सव जैसा वातावरण दिखाई देना चाहिए। इसके लिए सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता सन्गठन द्वारा बनाई गई कार्ययोजना पर कार्य करते हुए जन सम्वाद जारी रखें।

बैठक में सान्गठनिक कार्यों की समीक्षा की गई। तथा कारगिल शहीद हरिओम सिंह की जयंती पर ई सैनिक समागम आयोजित करने की भी योजना बनाई गई। सोशल मीडिया पर सक्रिय हर नागरिक प्रोफाइल पिक्चर और डीपी के रूप में भगवान राम के चित्र का प्रयोग करें।

क्षत्रिय महासभा के मन्डलीय सन्गठन मन्त्री विजय पाल सिंह भदौरिया ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कारगिल शहीद हरिओम सिंह की जयंती पर सैनिक समागम का आयोजन किया जाएगा। समागम में प्रदेश भर के पूर्व सैनिकों को आमंत्रित किया जायेगा। उल्लेखनीय कार्य करने वाले पूर्व सैनिकों कोशिश सम्मानित भी किया जायेगा। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व को आमंत्रित किया जायेगा। महासभा के सभी पदाधिकारी पूर्व सैनिकों से सम्पर्क करना आरंभ कर दें।यह एक ऐतिहासिक आयोजन होगा।

जिला संयोजक मुनीश कुमार सिंह ने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में सत्तर प्रतिशत से अधिक अन्क पाने वाले मेधावी छात्र छात्राओं की सूची आवश्यक रूप से 31 जुलाई तक जिला मुख्यालय पर उपलब्ध करा दें, कोई भी मेधावी छात्र सम्मान से वन्चित नहीं रहना चाहिए। सभी पदाधिकारी नियमित दस व्यक्तियो से सम्वाद अनिवार्य रूप से करें।जब महासभा के समस्त पदाधिकारी नित्य परस्पर सम्वाद करेंगे तो इससे सन्गठन को मजबूती मिलेगी तथा सन्गठन के कार्यक्रमों को गति मिलेगी।

बैठक में प्रमुख रूप से मन्डल सन्गठन मन्त्री विजय पाल सिंह भदौरिया, क्षत्रिय महासभा बदायूं के जिला संयोजक मुनीश कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह तोमर, सैनिक सभा के संरक्षक विजय रतन सिंह, महासभा के जिला उपाध्यक्ष जगमोहन सिंह राघव, शिशुपाल सिंह, जिला सचिव अखिलेश चौहान, दिनेश सिंह एडवोकेट, सतेन्द्र सिंह, जिला सन्गठन मन्त्री सत्यवीर सिंह चौहान, जिला कोषाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, महिला सभा की जिला अध्यक्ष करूणा सोलंकी, जिला महासचिव सरिता चौहान, जिला अध्यक्ष दिव्यान्ग सभा धर्मेंद्र सिंह वैध, क्षत्रिय युवा सभा के जिला अध्यक्ष रवि चौहान,, व्यापार सभा के जिला महासचिव अखिलेश सोलंकी, नगर अध्यक्ष बदायूं डालभगवान सिंह, नगर उपाध्यक्ष राजपाल सिंह राठोड़, नगर महासचिव रामसरन सिंह, नगर अध्यक्ष बिल्सी अनिरूद्ध सिंह, तहसील सचिव दातागंज अवनीश सोलंकी, तहसील अध्यक्ष सहसवान आर्येन्द्र पाल सिंह,ब्लाक अध्यक्ष वजीरगंज धर्मवीर सिंह, तहसील अध्यक्ष युवा सभा बिल्सी भानु प्रताप सिंह चौहान, अर्जुन सोलंकी, विपिन कुमार सिंह, भुवनेश कुमार, अवनीश कुमार सिंह, राघवेन्द्र सिंह, राहुल सूर्य चौहान, विवेक सिंह , विमल तोमर, अजीत प्रताप सिंह, गौरव कुमार सिंह तोमर , विनोद सोलंकी, शुभम चौहान, आदि उपस्थित रहे।

अन्त मेंं क्षत्रिय महासभा बदायूं के जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।सन्चालन जिला महासचिव वेदपाल सिंह कठेरिया ने किया।