Tuesday, 27 April 2021

व्यवस्था का उल्लंघन कर मतगणना हेतु जारी किए जा रहे हैं निर्देश।

नियमावली में वर्णित व्यवस्था का उल्लंघन कर मतगणना कराए जाने हेतु जारी किए गए हैं दिशा निर्देश।
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पंचायत चुनाव की मतगणना दो मई को जनपद बदायूं में चौदह स्थानों पर पंद्रह मतगणना केन्द्रों पर प्रारंभ होगी। मतगणना के संबंध में उप जिला निर्वाचन अधिकारी बदायूं की ओर से पत्र संख्या 871/जि0नि0का0(पं0)/सूचना/2021 दिनाँक 24अप्रैल 2021 के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दिशानिर्देश निर्गत किये गए हैं।

उक्त प्रेस विज्ञप्ति की प्रस्तर चार में व्यवस्था दी गई है कि मतगणना कक्ष में उम्मीदवार, निर्वाचन अभिकर्ता तथा गणना अभिकर्ता में से एक बार में एक ही व्यक्ति उपस्थित रह सकता है। उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सदस्यों, प्रधानों और उप प्रधानों) का निर्वाचन नियमावली, 1994 में नियम 46 से नियम 55 तक तथा नियम 101 से नियम 110 तक एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत (सदस्यों का चुनाव) नियमावली 1994 में नियम 47 से नियम 56 में मतगणना के संबंध में व्यवस्था दी गई है।

उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सदस्यों, प्रधानों और उप प्रधानों) का निर्वाचन नियमावली 1994 के नियम 48(1) व नियम 103 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत (सदस्यों का चुनाव) नियमावली 1994 के नियम 49 में व्यवस्था दी गई है कि मतगणना स्थल पर उम्मीदवार, निर्वाचन अभिकर्ता और गणना अभिकर्ता उपस्थित रहेंगे। इस नियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि गणना के समय उम्मीदवार, निर्वाचन अभिकर्ता और गणना अभिकर्ता तीनों में से एक ही उपस्थित रहेगा। प्रेस विज्ञप्ति की प्रस्तर चार उक्त  व्यवस्था के विरुद्ध है।

जिला पंचायत सदस्य पद की गणना एक से अधिक टेबिल पर होगी, ऐसी स्थिति में जितनी गणना टेबिल होंगी, एक प्रत्याशी के उतने ही गणना अभिकर्ता होंगे, साथ ही रिटर्निंग ऑफिसर की टेबिल के लिए प्रथक से गणना अभिकर्ता की नियुक्ति होगी।

कई जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र ऐसे हैं, जिनकी गणना एक से अधिक मतगणना स्थलों पर होगी, ऐसे क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को मतगणना स्थलों पर आवागमन हेतु भी सुविधा की दृष्टि से स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जाना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश पंचायत राज सदस्यों, प्रधानों और उपप्रधानो का निर्वाचन नियमावली 1994 के नियम 52 और 107 एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव नियमावली 1994 के नियम 53 में पारदर्शिता बनाये रखने हेतु व्यवस्था दी गई है कि निर्वाचन अधिकारी निर्धारित प्रारूप पर एक निर्वाचन विवरणी तैयार करेगा, निर्वाचन विवरणी में उम्मीदवारों के नाम, प्रत्येक उम्मीदवार को दिये गए वैध मतों की संख्या, वैध मतों की कुल संख्या, अस्वीकृत मतपत्रों की संख्या, निविदत्त मतों की संख्या और निर्वाचित उम्मीदवार का नाम अंकित होगा। उक्त निर्वाचन विवरणी उम्मीदवार को प्राप्त कराई जाएगी। किन्तु इस व्यवस्था का पालन नहीं किया जाता है। 

इस संबंध में :
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1- गणना स्थल पर मतगणना के समय उम्मीदवार, निर्वाचन अभिकर्ता, गणना अभिकर्ता तीनों की उपस्थिति के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए जाए।
2- उम्मीदवारों को टेबिल की संख्या के अनुसार गणना अभिकर्ता नियुक्त किए जाने एवं रिटर्निंग अधिकारी की टेबिल हेतु प्रथक से गणना अभिकर्ता नियुक्त करने हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जावे।
3- जिन उम्मीदवारों की गणना एक से अधिक गणना स्थलों पर होगी, उन उम्मीदवारों को उन सभी मतगणना स्थलों पर आवागमन के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जावे।
4- इसी प्रकार मतगणना के पश्चात उम्मीदवारों को अनिवार्य रूप से मतगणना विवरणी प्रदान किये जाने के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जावे।


हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
संस्थापक/अध्यक्ष: जन दृष्टि( व्यवस्था सुधार मिशन )
मुख्य प्रवर्तक: भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424 


Saturday, 24 April 2021

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर विशेष !

।।कृपया पढ़ें अवश्य ।।

आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।

प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी गत वर्ष पंचायत प्रतिनिधियों से सम्वाद कर चुके हैं।

नागरिकों के स्वास्थ्य की अपेक्षा पंचायत चुनाव को प्राथमिकता दी गई ताकि पंचायते प्रतिनिधि विहीन न रहें।

जिस तरह की गंभीरता सरकार द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर दिखाई गई ...............  क्या कभी पंचायतों की दुर्दशा पर इनकी दृष्टि गई या फिर दृष्टि डालना जरूरी नहीं समझा गया।

ग्राम विकास से जुड़े विभागों के एकीकरण की भी चर्चा हुई किन्तु मंत्री पद कम हो जाने, अधिकारियों के पद कम हो जाने, प्रमोशन न होने या प्रमोशन में विलम्ब को लेकर नौकरशाही इस कार्य में बाधा बन गई। और पंचायत राज विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग एकीकृत नहीं हो सके।

कुछ अतिमहत्वपूर्ण तथ्य जो विचारणीय है :-
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१- क्या सभी ग्राम पंचायतों के अपने कार्यालय हैं?
२- क्या सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारी व लेखपाल की नियुक्ति की गई है?
३-क्या सभी ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख उपलब्ध है ? 
४- क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित की जाती है?
५-क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था अनुसार गठित आधा दर्जन समितियां ग्राम पंचायतों में सक्रिय हैं ?
६- क्या ग्राम पंचायतों में कराये गये विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक स्थानों पर अंकित किया जाता है? 
७- क्या ग्राम पंचायत में नियुक्त सफाई कर्मी सफाई कार्य करता है या फिर किसी नेता या अधिकारी के यहां सेवा दे रहा है ? 
८- क्या राजस्व सन्हिता में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम राजस्व समिति का गठन किया गया है ?
९- क्या प्रत्येक ग्राम में राशन की निगरानी हेतु सतर्कता समिति गठित की गई है?
१०-  महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके निकट सम्बन्धी तो कार्य नहीं कर रहे हैं।
११- जिस अनुपात में महिला प्रतिनिधि चुने जाते हैं,उस अनुपात में महिला अधिकारियों व कार्मिकों की नियुक्ति की गई है।
१२- रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के अंतर्गत प्रतिवर्ष कितने लोगों को सौ दिन रोजगार मिला ?
१३-जब संसद व विधानसभा की कार्यवाही आम जनता देख सकती है तो ग्राम पंचायत की कार्यवाही आम जनता क्यो नही देख सकती।
१४- ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं व विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ब्लाक की है ,ब्लाक की स्थिति देखें :-
* ब्लाक में खन्ड विकास अधिकारी नहीं।
* ब्लाक में सहायक विकास अधिकारी नहीं।
*ब्लाक में अवर अभियंता नहीं।
* ब्लाक में प्रधान लिपिक नहीं।
* ब्लाक में आन्किक सहित अन्य लिपिक नहीं।
* ब्लाक में कर्मचारियों को बने आवास खन्डहर हो गये।
१५- अब तहसील ईकाई की स्थिति देखें :-
* तहसीलदार के पद रिक्त।
* नायब तहसीलदार के पद रिक्त।
* राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के पद बड़ी
 संख्या में रिक्त।
और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु : 
# दोषपूर्ण चुनाव व्यवस्था व दूषित मतदाता सूची के कारण अधिकांश पंचायते नगरों में निवास करने वाले व्यक्तियों के नियंत्रण में रहती हैं।

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हम कैसे मान लें कि पंचायत राज व्यवस्था सुदृढ़ है।
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फिर भी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक: जन दृष्टि ( व्यवस्था सुधार मिशन )
१०१ विधि आश्रम, गली क्रमांक - एक, शिवपुरम
 बदायूं, उ0प्र0 - २४३६०१
मोबाइल: ९५३६१६२४२४

Friday, 9 April 2021

दूषित मतदाता सूची से सम्भव नहीं है पारदर्शी व निष्पक्ष चुनाव।

विधानसभा व पंचायतों की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर जांच का विषय।
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नगर निकायों के चुनाव में असफल या पसंदीदा पार्टी से टिकट पाने से वंचित प्रत्याशियों के पंचायत चुनाव लडने पर रोक क्यो नहीं?
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पंचायतों के वास्तविक निवासियों को ही हो चुनाव लड़ने का अधिकार, कृत्रिम निवासियों के चुनाव लड़ने पर लगे रोक।
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भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्मित मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और दोषरहित कहा जा सकता है क्योंकि वह फोटोयुक्त है, आधार कार्ड से लिंक है, ऑनलाइन है, प्रत्येक मतदाता को पहचान पत्र निर्गत किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग ने अनेक बार राज्यों से आग्रह भी किया है कि वे पंचायत चुनाव और स्थानीय निकाय के चुनाव उसकी मतदाता सूची से करावें, जिससे भारी धन का व्यय रुकेगा। किन्तु राज्य तैयार नहीं हुए।

व्यहारत: उत्तर प्रदेश की भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में अंकित मतदाताओं की संख्या व राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा निर्मित ग्राम पंचायतों व नगर निकायों(नगर पंचायत/नगरपालिका परिषद/नगर निगम)  की मतदाता सूची में अंकित मतदाताओं की संख्या बराबर होनी चाहिए। किन्तु ऐसा नहीं है ।

राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा ग्राम पंचायतों की जो मतदाता सूची तैयार की गई है उसमें ऐसे अनेक मतदाताओं के नाम सम्मिलित हैं जो नगर निकायों की मतदाता सूची में भी सम्मिलित हैं, अनेक मतदाताओं के नाम एक से अधिक ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची में अंकित है,अवयस्कों के नाम भी सम्मिलित हैं।

यही स्थिति नगर निकायों की मतदाता सूची की भी है, उसमें अनेक ऐसे मतदाताओं के नाम अंकित है, जो किसी न किसी ग्राम पंचायत के मतदाता हैं।

 इस प्रकार देखा जाए तो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्मित मतदाता सूची में अंकित उत्तर प्रदेश के समस्त मतदाताओं की संख्या से राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा निर्मित ग्राम पंचायतों व नगर निकायों की मतदाता सूची में लगभग तीस प्रतिशत मतदाता अधिक हैं।

सबसे चौकाने वाली बात यह है कि हम एक देश एक चुनाव की बात करते हैं, किन्तु कभी यह विचार क्यो नहीं होता है कि पंचायत और नगर निकायों के चुनाव एक साथ कराए जावे। एक साथ चुनाव न कराने के दुष्प्रभाव यह है कि पंचायत चुनाव में असफल प्रत्याशी नगर निकायों के चुनावों में ताल ठोक देते हैं, और नगर निकायों में असफल प्रत्याशी पंचायत चुनाव में भाग्य आजमाते हैं।

वर्तमान पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में ऐसे प्रत्याशी है जो वर्ष 2017 के नगर निकायों के चुनाव में अपना भाग्य आजमा चुके हैं, जिनके नाम नगर निकायों की मतदाता सूची में अंकित है, जो नगर निकायों के चुनाव में सफल नहीं हो सके अथवा प्रयासों के उपरांत वे पसंदीदा पार्टी का टिकट नहीं पा सके  ।

ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की अनुमति देना सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया को दूषित बनाता है साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश की स्वायत्तता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े करता है।

पंचायते ऐसे प्रतिनिधियों के हाथों में हो जो वास्तव मे परिवार सहित गांव में ही निवास करते हों, ऐसे व्यक्ति जो परिवार सहित गांव में जीवन व्यतीत नहीं कर सकते, वे भला पंचायतों के हितचिंतक कैसे हो सकते हैं ?

एक देश - एक चुनाव के साथ ही एक चुनाव आयोग और एक मतदाता सूची के मुद्दे पर भी बहस की आवश्यकता है ।