Tuesday, 31 May 2022

सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव सम्मानित।

सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को किया सम्मानित।

जिला सिविल बार एसोसिएशन बदायूं के सभागार में ग्रीष्मावकाश प्रारम्भ होने से पूर्व कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता एडवोकेट की अध्यक्षता में किया गया। 

पुलिस द्वारा अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट के विरुद्ध  फर्जी अभियोग पंजीकृत किए जानें के प्रकरण में सहयोग किए जाने के कारण जनपद के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं  द्वारा बार के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता एडवोकेट और सचिव अरविंद पाराशरी एडवोकेट को माला पहनाकर व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए सिविल बार एसोसिएशन बदायूं के सचिव अरविंद पाराशरी एडवोकेट ने कहा कि एकता में शक्ति होती है, एकता का ही परिणाम है कि सिविल बार एसोसिएशन द्वारा जो भी मुद्दे उठाए गए, उनमें सफलता प्राप्त हुई। सदस्यों के मान सम्मान से बार कभी समझौता नहीं करेगी।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुभाष चन्द्र गुप्ता एडवोकेट, हेमेंद्र कुमार एडवोकेट, हिमांशु कुमार एडवोकेट, ब्रज पाल सिंह एडवोकेट, अनुराग शर्मा एडवोकेट, विवेक रेंडर एडवोकेट, रक्षित सरन एडवोकेट, कौशलेंद्र मोहन शर्मा एडवोकेट, राजीव सक्सेना एडवोकेट, मोहित अग्रवाल एडबोकेट, वेद प्रकाश साहू एडवोकेट, संजीव कुमार वैश्य  एडवोकेट, नरसिंह प्रसाद गुप्ता एडवोकेट, सुरेंद्र मोहन सक्सेना एडवोकेट, सुभाष सक्सेना एडवोकेट, जफर हुसैन एडवोकेट,  सिशनेस सक्सेना एडवोकेट, मधुकर शर्मा एडवोकेट, अर्पित श्रीवास्तव एडवोकेट, रामेंद्र रेंडर एडवोकेट, संदीप सिंह एडवोकेट, सोना गुप्ता एडवोकेट , शब्बीर हसन एडवोकेट,  भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के पदाधिकारी धनपाल सिंह, एम एल गुप्ता, रामगोपाल, अखिलेश सिंह, एम एच कादरी, महेश चंद्र, जयकिशन लाल  आदि उपस्थित रहे।

कवि व अधिवक्ता रवि शर्मा की फेसबुक वाल से साभार।

---- गीत --- 
            --- आंदोलित नारी शक्ति ---

बहुत हो चुका चूल्हा चकिया, सहकारी परिवार चाहिए !
हाड़-मांस की मै भी पुतली, मुझको भी रविवार चाहिए !!

सात रंग से बनी रंगोली, केंद्र बिन्दु में मै रहती हूँ ,
सबकी मांगे पूरी करने , दिन भर झरने सी बहती हूँ !
कर्तव्यों को खूब निभाया, अब मुझको अधिकार चाहिए !!

सूरज के संग मै उठ जाती , तारों के संग सो जाती हूँ,
सबके सुख की चिन्ता में मै, हर पल चिन्तित हो जाती हूँ !
पर हफ्ते में एक दिवस अब, गरम चाय अखबार चाहिए !!

ना मै कोई जिन्न-देवता , ना मै जादू भरी पिटारी ,
पर सब मुझसे यही चाहते , मांगे पूरी होवे सारी !
अब से ऐसा नहीं चलेगा , बराबरी का भार चाहिए !!

हाँ, मै माँ हूँ , पत्नी भी हूँ , तुम भी तो बेटे या पति हो,
प्यार तुम्हारा क्या यह कहता, केवल मेरी ही दुर्गति हो !
कार्य घरेलू सात-एक में ,बांटो ,ना तकरार चाहिए !!

                         ---रवि शर्मा एडवोकेट

Monday, 30 May 2022

व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल हो लागू ।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विशेष :
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पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा हेतु बने कानून।

व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल हो लागू।

राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गठित हो शक्ति सम्पन्न आयोग।

चिकित्सा, बीमा व पेंशन योजनाओं का मिले लाभ।

शासन के तीन अन्ग हैं -  विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका। समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के कारण मीडिया का इतना महत्त्व बढ़ गया कि उसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाने लगा।

इसके पीछे पत्रकारों की लम्बी सन्घर्ष गाथा है। इस समय प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया ने एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। सक्रियता बढ़ने से ख़तरे भी बढना स्वाभाविक है। मीडिया कर्मियों पर हमले होना,हत्या हो जाना, परिजनों का उत्पीड़न होना, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों व भ्रष्ट तत्वों द्वारा निरन्तर हमलों,फर्जी मुकदमे लिखे जाने की एक बहुत विशाल श्रन्खला है। 

मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज भी उठी। संसद में भी अनेक बार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने स्तर से सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश जारी किए किन्तु कोई कानून नहीं बन सका।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया भी ज्यादा शक्ति सम्पन्न नहीं है।
पत्रकारों की सुरक्षा हेतु कानून बनने में सबसे बड़ी बाधा नौकरशाही है। वर्ष 2011 में व्हिसिल व्लोअर प्रोटेक्शन बिल लाया गया जो संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया और राष्ट्रपति के पास वर्ष 2014 से लम्बित है। इस बिल के द्वारा भ्रष्टाचार के विषय उठाने वालों की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं।इसी तरह लोकपाल कानून बन जाने के बाद भी आज तक नौकरशाही की वजह से निष्प्रभावी है। नौकरशाही अपने ऊपर किसी भी प्रकार का अंकुश नहीं चाहती और हमारे नेतागण उस पर पूरी तरह से आश्रित है।

पत्रकारों साथ ही स्वतन्त्र रूप से लोक कल्याण के विषय उठाने वाले सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा व संरक्षा हेतु एक  केन्द्रीय कानून की जरूरत है। इस कानून में पत्रकारों, सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं के सम्मान की सुरक्षा की गारंटी हो। इन पर हमला करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी हो साथ ही जमानत की व्यवस्था न हो तथा त्वरित न्यायालय में सुनवाई की व्यवस्था हो।

राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में शक्ति सम्पन्न आयोग गठित हो,आयोग में वरिष्ठता व योग्यता के आधार पर पत्रकारों व सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं को भी सदस्य नामित करने की व्यवस्था हो। आयोग की अनुमति के बिना पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं के विरुद्ध दान्डिक अभियोग पंजीकृत न हो। 
केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों में इन्हें स्थान दिया जावे। जिला मुख्यालयों पर इनके बैठने हेतु भवन की व्यवस्था हो। सरकार की ओर से इन्हे चिकित्सा, बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं से आच्छादित किया जाये। समन्वय हेतु जिला,मन्डल व राज्य स्तर पर प्रशासन के साथ मासिक बैठक का आयोजन हो जिसमें इनकी समस्याओं का तत्काल समाधान हो।साथ ही इनके लिए भी एक आचार संहिता बनाई जावे ताकि इस क्षेत्र में भी आवश्यक सुधार हो सके।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/ संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
9536162424



Tuesday, 24 May 2022

धीरेंद्र राजवीर सिंह की फेसबुक वाल से साभार।

सामाजिक कार्यकर्ता , RTI एक्टिविस्ट , गांधीवादी तरीके से रिश्वतखोरी , दलाली ,खनन , डग्गेमारी, भृस्टाचार के खिलाफ लगातार एक युद्ध लड़ने वाले योद्धा Hari Prataup Singh Rathode एडवोकेट का मनोबल तोड़ने के लिये उनके खिलाफ एक झूठी रिपोर्ट लिखाई गई। सत्ता पार्टी के एक पदाधिकारी ने तहरीर दी और थाने में बिना जाँच करें तुरन्त मुकद्दमा लिख दिया गया। कारण यह बताया गया कि सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट किया जबकि कोई साक्ष्य नही क्योंकि कोई ट्वीट किया ही नही था। रिपोर्ट भी IT एक्ट में न लिखना बताता है कि प्राथमिकता सिर्फ रिपोर्ट लिखने की ही थी। 

सामाजिक अपराधियों का एक नेक्सस है जिसमे भ्रष्ठ अफसर नेता शामिल है। उनके भृस्टाचार के खिलाफ जो आवाज उठाता है उनकी आवाज दबाने को झूठे मुकद्दमे लादे जाते है। सरकार बदल जाती है लेकिन सिस्टम नही बदलता। उस सिस्टम में सत्ता के नेता जुड़ जाते है। 

सिस्टम आज भी बदलने में नही आ रहा है जो बदलने की कोशिश करता है उसे यह सिस्टम अपने पक्ष में कर लेता है जो उनके साथ नही आता तो यह सिस्टम उनकी आवाज को दबाने में लग जाता है। 

 सच्ची आवाजों को दबाने के लिये यदि झूठे मुकद्दमों का सहारा लिया जाएगा तो यह लोकतंत्र के लिए घातक होगा। 

मैं हरिप्रताप सिंह राठौर एडवोकेट के साथ हूँ।