Sunday, 24 April 2022

पंचायत राज व्यवस्था को सुदृढ बनाने में सूचना/ सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण।

राष्ट्रीय पञ्चायत राज दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित।

सूचना /सामाजिक कार्यकर्ता सौ दिन करेंगे पंचायतों की निगरानी।

पदाधिकारियों को दिए गए नियुक्ति व पहचान पत्र।

राष्ट्रीय पञ्चायत राज दिवस के अवसर पर भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के तत्वावधान में अभियान के शिव पुरम बदायूं स्थित मुख्यालय पर ""पञ्चायत राज व्यवस्था को सुदृढ बनाने में सूचना/ सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका "" विषयक संगोष्ठी का आयोजन संरक्षक एम एल गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया।

इस अवसर पर विचार वयक्त करते हुए जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) के संस्थापक हरि प्रताप सिंह राठौड़ एडवोकेट ने कहा कि पञ्चायत राज की महत्ता के दृष्टिगत
देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पंचायत प्रतिनिधियों से सम्वाद कर चुके हैं। कोरोना काल में
नागरिकों के स्वास्थ्य की अपेक्षा पंचायत चुनाव को प्राथमिकता दी गई ताकि पंचायते प्रतिनिधि विहीन न रहें।
ग्राम विकास से जुड़े विभागों के एकीकरण की भी चर्चा हुई किन्तु मंत्री पद कम हो जाने, अधिकारियों के पद कम हो जाने, प्रमोशन न होने या प्रमोशन में विलम्ब को लेकर नौकरशाही इस कार्य में बाधा बन गई। और पंचायत राज विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग एकीकृत नहीं हो सके।

श्री राठोड़ ने कहा कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के अपने कार्यालय नहीं है, सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारी व लेखपाल की नियुक्ति नहीं की गई है, सभी ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख उपलब्ध नहीं है , पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जाती है, पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था अनुसार गठित आधा दर्जन समितियां ग्राम पंचायतों में सक्रिय नहीं हैं , ग्राम पंचायतों में कराये गये विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक स्थानों पर अंकित नहीं किया जाता है, ग्राम पंचायत में नियुक्त सफाई कर्मी सफाई कार्य न करके है किसी नेता या अधिकारी के यहां सेवा दे रहे है , राजस्व सन्हिता में दी गई व्यवस्था के अनुसार  ग्राम पंचायतों में ग्राम राजस्व समितियों का गठन नहीं किया गया है , राशन की निगरानी हेतु गांवों में सतर्कता समिति गठित नहीं की गई है,  महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके निकट सम्बन्धी कार्य कर रहे हैं। जिस अनुपात में महिला प्रतिनिधि चुने जाते हैं,उस अनुपात में महिला अधिकारियों व कार्मिकों की नियुक्ति नहीं की गई है।
 रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के अंतर्गत प्रतिवर्ष कितने लोगों को सौ दिन रोजगार मिला उनकी सूची प्रति वर्ष सार्वजनिक की जाए। संसद व विधानसभा की कार्यवाही आम जनता देख सकती है तो ग्राम पंचायत की कार्यवाही देखने का अधिकार आम नागरिकों को मिले।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के प्रदेश समन्वयक डॉ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं व विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ब्लाक की है । ब्लाक में खन्ड विकास अधिकारी नहीं। ब्लाक में सहायक विकास अधिकारी नहीं हैं, ब्लाक में अवर अभियंता नहीं, ब्लाक में प्रधान लिपिक नहीं, ब्लाक में आन्किक सहित अन्य लिपिक नहीं, ब्लाक में कर्मचारियों को बने आवास खन्डहर हो गये हैं। इसी प्रकार तहसीलों में तहसीलदार,  नायब तहसीलदार , राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। दोषपूर्ण चुनाव व्यवस्था व दूषित मतदाता सूची के कारण अधिकांश पंचायते नगरों में निवास करने वाले व्यक्तियों के नियंत्रण में हैं।

केंद्रीय कार्यालय प्रभारी रामगोपाल  ने कहा कि सूचना/ सामाजिक कार्यकर्ता प्रति सप्ताह एक सूचना मांगकर व जनसुनवाई पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज कराकर पञ्चायत राज व्यवस्था को सुदृढ बनाने का कार्य करेगे।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से धनपाल सिंह, एम एल गुप्ता, बालेंद्र शर्मा  एच एन सिंह, एम एच कादरी, हर नन्दन सिंह, सतेंद्र पाल सिंह, महेश चंद्र, आर्येंद्र पाल सिंह, राम लखन, दीपक माथुर, नेत्रपाल,  राजपाल सिंह, समीरुद्दीन एडवोकेट, भुवनेश कुमार, सुभाष पुरी, अनिल प्रताप, अशफाक हुसैन आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय पञ्चायत राज दिवस के अवसर पर महत्वपूर्ण।।

।। *कृपया पढ़ें अवश्य* ।।

आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।

प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी गत वर्ष पंचायत प्रतिनिधियों से सम्वाद कर चुके हैं।

नागरिकों के स्वास्थ्य की अपेक्षा पंचायत चुनाव को प्राथमिकता दी गई ताकि पंचायते प्रतिनिधि विहीन न रहें।

जिस तरह की गंभीरता सरकार द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर दिखाई गई ...............  क्या कभी पंचायतों की दुर्दशा पर इनकी दृष्टि गई या फिर दृष्टि डालना जरूरी नहीं समझा गया।

ग्राम विकास से जुड़े विभागों के एकीकरण की भी चर्चा हुई किन्तु मंत्री पद कम हो जाने, अधिकारियों के पद कम हो जाने, प्रमोशन न होने या प्रमोशन में विलम्ब को लेकर नौकरशाही इस कार्य में बाधा बन गई। और पंचायत राज विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग एकीकृत नहीं हो सके।

कुछ अतिमहत्वपूर्ण तथ्य जो विचारणीय है :-
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१- क्या सभी ग्राम पंचायतों के अपने कार्यालय हैं?
२- क्या सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारी व लेखपाल की नियुक्ति की गई है?
३-क्या सभी ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख उपलब्ध है ? 
४- क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित की जाती है?
५-क्या पंचायत राज अधिनियम में दी गई व्यवस्था अनुसार गठित आधा दर्जन समितियां ग्राम पंचायतों में सक्रिय हैं ?
६- क्या ग्राम पंचायतों में कराये गये विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक स्थानों पर अंकित किया जाता है? 
७- क्या ग्राम पंचायत में नियुक्त सफाई कर्मी सफाई कार्य करता है या फिर किसी नेता या अधिकारी के यहां सेवा दे रहा है ? 
८- क्या राजस्व सन्हिता में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम राजस्व समिति का गठन किया गया है ?
९- क्या प्रत्येक ग्राम में राशन की निगरानी हेतु सतर्कता समिति गठित की गई है?
१०-  महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके निकट सम्बन्धी तो कार्य नहीं कर रहे हैं।
११- जिस अनुपात में महिला प्रतिनिधि चुने जाते हैं,उस अनुपात में महिला अधिकारियों व कार्मिकों की नियुक्ति की गई है।
१२- रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के अंतर्गत प्रतिवर्ष कितने लोगों को सौ दिन रोजगार मिला ?
१३-जब संसद व विधानसभा की कार्यवाही आम जनता देख सकती है तो ग्राम पंचायत की कार्यवाही आम जनता क्यो नही देख सकती।
१४- ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं व विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ब्लाक की है ,ब्लाक की स्थिति देखें :-
* ब्लाक में खन्ड विकास अधिकारी नहीं।
* ब्लाक में सहायक विकास अधिकारी नहीं।
*ब्लाक में अवर अभियंता नहीं।
* ब्लाक में प्रधान लिपिक नहीं।
* ब्लाक में आन्किक सहित अन्य लिपिक नहीं।
* ब्लाक में कर्मचारियों को बने आवास खन्डहर हो गये।
१५- अब तहसील ईकाई की स्थिति देखें :-
* तहसीलदार के पद रिक्त।
* नायब तहसीलदार के पद रिक्त।
* राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के पद बड़ी
 संख्या में रिक्त।
और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु : 
# दोषपूर्ण चुनाव व्यवस्था व दूषित मतदाता सूची के कारण अधिकांश पंचायते नगरों में निवास करने वाले व्यक्तियों के नियंत्रण में रहती हैं।

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हम कैसे मान लें कि पंचायत राज व्यवस्था सुदृढ़ है।
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फिर भी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक: जन दृष्टि ( व्यवस्था सुधार मिशन )
१०१ विधि आश्रम, गली क्रमांक - एक, शिवपुरम
 बदायूं, उ0प्र0 - २४३६०१
मोबाइल: ९५३६१६२४२४

Wednesday, 2 June 2021

सात वर्ष में सात अपेक्षाएं।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की प्रधानमंत्री से सात वर्ष में सात अपेक्षाएं :
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१- एक देश , एक चुनाव, एक चुनाव आयोग व एक मतदाता सूची की की नीति बने।

 २- लोकपाल को सक्रिय कर देश के समस्त राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो।

३- नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित अवधि में नहीं मिल पा रही है अस्तु सिटीजन चार्टर/ जनहित गारंटी कानून प्रभावी हो।

४- सूचना का अधिकार दम तोड़ रहा है। सूचना प्राप्ति हेतु तीन से पांच साल तक लड़ाई लड़नी पड़ रही है।अस्तु सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में संशोधन करके तत्काल सूचना दिए जाने,प्रथम अपील पन्द्रह दिन में व द्वितीय अपील एक माह में तय करने की व्यवस्था हो। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा चार के अन्तर्गत सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों एवं उनके परिजनों की चल अचल संपत्तियां सार्वजनिक हो तथा राष्ट्रीय आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व राज्य आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति की अनिवार्यता हो।

५-  न्यायपालिका को कुछ घरानों के कब्जे से मुक्त कराने हेतु भारतीय न्यायिक सेवा (IJS) का गठन हो।

६- सामाजिक कार्यकर्ताओं व सूचना कार्यकर्त्ताओं  की सुरक्षा हेतु कानून बने।

७- शिक्षा और चिकित्सा निजी हाथों से मुक्त हो।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424

( सभी सूचना व सामाजिक कार्यकर्ता यह सात अपेक्षाएं माई ग्रीवांस पोर्टल व ट्विटर के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित करें। )

Saturday, 29 May 2021

न्यूज़ पोर्टल की लोकप्रियता के दृष्टिगत भारत सरकार बनाये नीति।



हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष :
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पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा हेतु बने कानून।

राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गठित हो शक्ति सम्पन्न आयोग।

चिकित्सा, बीमा व पेंशन योजनाओं का मिले लाभ।

शासन के तीन अन्ग हैं -  विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका। समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के कारण मीडिया का इतना महत्त्व बढ़ गया कि उसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाने लगा।

इसके पीछे पत्रकारों की लम्बी सन्घर्ष गाथा है। इस समय प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया ने एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। न्यूज़ पोर्टल अति लोकप्रिय हो रहे हैं, भारत सरकार को इसके लिए भी नीति बनानी होगी। सक्रियता बढ़ने से ख़तरे भी बढना स्वाभाविक है। मीडिया कर्मियों पर हमले होना,हत्या हो जाना, परिजनों का उत्पीड़न होना, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों व भ्रष्ट तत्वों द्वारा निरन्तर हमलों,फर्जी मुकदमे लिखे जाने की एक बहुत विशाल श्रन्खला है। 

मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज भी उठी। संसद में भी अनेक बार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने स्तर से सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश जारी किए किन्तु कोई कानून नहीं बन सका।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया भी ज्यादा शक्ति सम्पन्न नहीं है।
पत्रकारों की सुरक्षा हेतु कानून बनने में सबसे बड़ी बाधा नौकरशाही है। वर्ष 2011 में व्हिसिल व्लोअर प्रोटेक्शन बिल लाया गया जो संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया और राष्ट्रपति के पास वर्ष 2014 से लम्बित है। इस बिल के द्वारा भ्रष्टाचार के विषय उठाने वालों की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं।इसी तरह लोकपाल कानून बन जाने के बाद भी आज तक नौकरशाही की वजह से निष्प्रभावी है। नौकरशाही अपने ऊपर किसी भी प्रकार का अंकुश नहीं चाहती और हमारे नेतागण उस पर पूरी तरह से आश्रित है।

पत्रकारों के साथ ही स्वतन्त्र रूप से लोक कल्याण के विषय उठाने वाले सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा व संरक्षा हेतु एक  केन्द्रीय कानून की जरूरत है। इस कानून में पत्रकारों, सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं के सम्मान की सुरक्षा की गारंटी हो। इन पर हमला करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी हो साथ ही जमानत की व्यवस्था न हो तथा त्वरित न्यायालय में सुनवाई की व्यवस्था हो।

राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में शक्ति सम्पन्न आयोग गठित हो,आयोग में वरिष्ठता व योग्यता के आधार पर पत्रकारों व सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं को भी सदस्य नामित करने की व्यवस्था हो। आयोग की अनुमति के बिना पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं के विरुद्ध दान्डिक अभियोग पंजीकृत न हो। 
केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों में इन्हें स्थान दिया जावे। जिला मुख्यालयों पर इनके बैठने हेतु भवन की व्यवस्था हो। सरकार की ओर से इन्हे चिकित्सा, बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं से आच्छादित किया जाये। समन्वय हेतु जिला,मन्डल व राज्य स्तर पर प्रशासन के साथ मासिक बैठक का आयोजन हो जिसमें इनकी समस्याओं का तत्काल समाधान हो।साथ ही इनके लिए भी एक आचार संहिता बनाई जावे ताकि इस क्षेत्र में भी आवश्यक सुधार हो सके।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक: जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424