Thursday, 2 November 2023

निष्पक्ष पत्रकारिता की जरूरत।

#पत्रकारों पर लगते रहे हैं #अवैध वसूली के झूठे #आरोप !
 आग में घी का काम करते हैं #डफली बजाने वाले पत्रकार !
समाज की #संवेदनशून्यता काम में बाधक ! 
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यह कैसी विडंबना है कि #चौथा #स्तम्भ आज  विषम परिस्थितियों के दौर से गुजर रहा है ! निर्भीक , निष्पक्ष पत्रकारों के सम्मान करने के बजाय #पीत पत्रकारिता में माहिर पत्रकारों को तरजीह दी जाती है ! समाज की सम्वेदनशून्या वाकई चिंता का विषय है ! समाज की सम्वेदनाओं के हनन के लिये समाज  खुद ज़िम्मेदार है न कि #चौथा #स्तंभ ! सरकार की ओर से पत्रकारों की सुरक्षा हेतु पत्रकार सुरक्षा कानून लागू न होना भी बड़ा सवाल है !  फिर भी जान जोखिम में डालकर कलम के सिपाही जनता की सेवा में लगे रहते हैं ! जनता की आवाज़ शासन प्रशासन तक पहुंचाकर उनके दुख दर्द के साथी हैं उनकी आवाज़ हैं फिर भी समाज की नजर में वह #खटकते रहते हैं ! #क्यों ?
हांलांकि इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली नहीं होती पर सभी पत्रकार अवैध वसूली नहीं करते यह बात #माननी होगी ! एक पत्रकार पर एक  पत्रकार हावी हो जाता है #कारण अपनी पत्रकारिता पर #अहंकार ! कोई पत्रकार चौकी प्रभारी के साथ फोटो शूट करके #डीपी लगाकर अपनी #भौकाल दिखा रहा है तो कोई थाना प्रभारी का , तो कोई अधिकारी या बड़े नेता की फोटो शूट करके खुद को महान समझते हैं ! तो कुछ सिर्फ अपनी खबरों में खोये रहते हैं उन्हें न किसी चौकी प्रभारी , थाना प्रभारी न अधिकारी न नेताओं के साथ सेल्फी लेने की होड़ लगानी होती है न ही अपना #भौकाल बनाना होता है ! मतलब #चापलूसी से वह दूर रहकर #निष्पक्ष पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी निभाते हैं , और सिर्फ अपनी ख़बरों को लेकर #सक्रिय रहते हैं और देश व समाज के लिये सब कुछ कुर्बान करने की #क्षमता रखते हैं  ! लेकिन #खतरा इन्हीं पत्रकारों को बना रहता है क्योंकि अवैध निर्माण ,अवैध खनन ,अवैध वसूली , कमजोरों पर अत्याचार , अपराध भ्रष्टाचार पर खुलकर लिखना , शासन प्रशासन से कड़बे सवाल करना , यह सब #सिस्टम को #अखरता है ! इस सबके बावजूद समाज की तरफ से भी निराशा ही  हाथ लगती है जिसका फायदा #चापलूसों को मिलता है ! और एक ईमानदार पत्रकार की निष्पक्ष रिपोर्टिंग को दबाने की कोशिश की जाती है ! लेकिन निष्पक्ष पत्रकार की लेखनी का गला घोटने का सीधा सा मतलब है मीडिया जगत पर कड़ा प्रहार ! मगर इससे #ख़तरा  सिर्फ़ मीडिया जगत पर ही नहीं बल्कि ख़तरा #देश पर होगा , ख़तरा #समाज पर होगा ख़तरा ईमानदार #अफसर पर होगा ! इस लिये हम सबको जागना होगा ! अपने देश व समाज को सुरक्षित रखना है तो एक निर्भीक , निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले #पत्रकार को सम्मान देना होगा ! पत्रकारों के हितों की लड़ाई आपको भी लड़नी होगी तभी आपकी लड़ाई एक पत्रकार भी लड़ पायेगा ! #पत्रकार बन्धुओं से कहना चाहूंगा कि वह अपनी खुद की #ताक़त को पहचानें और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने में एकजुटता का परिचय दें !
पत्रकार एकता ज़िंदाबाद ! कलम के सिपाही ज़िंदाबाद !
आपका भाई -
एम.आरिफ़ खान
" वरिष्ठ पत्रकार "
जनपद बदायूं उत्तर प्रदेश !

Monday, 30 October 2023

रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी ने छीन ली मासूमों की जान

हादसे की जड़ में जिम्मेदारों के संरक्षण में पल रहा भ्रष्टाचार - रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी।

आज एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। हादसे में चार बच्चे और एक चालक की मौत हो गई। कई बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

वैसे तो नित्य हादसे होते हैं, नागरिक प्राण गंवाते हैं। किंतू यह हादसा नित्य होने वाले हादसों से अलग है। क्योंकि इस हादसे में दो स्कूल वाहनों में आमने सामने की टक्कर हुई।
बडे़ प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। शासन ने भी चिंता वयक्त की।

तमाम सवाल भी उठेंगे कि इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार कौन ? वाहन मानकों पर खरा था या नहीं, बच्चे अधिक क्यों बैठाए गए और परिवहन विभाग के अधिकारियो पर ठीकरा फोड़ दिया जायगा, जो निर्धारित शुल्क पर डग्गामारी कराते हैं, स्कूल वाहनों की जांच इसलिए नही करते क्योंकि उनसे बर्ष भर का शुल्क एकमुश्त मिल जाता है।

एक प्रश्न यह भी उठना लाजमी है कि सड़क मे गड्डे थे, सड़क के दोनों ओर पाइप लाइन के लिए गहरी नाली खोदी गई है। यदि सड़क मे गड्डे नहीं होते तथा सड़क के दोनों ओर खोदी गई नाली बंद कर दी गई होती तो भी यह हादसा टल सकता था। लेकिन जिम्मेदारों ने कमीशन लेकर गड्ढों और पाइप लाइन के लिए खोदी गई नाली को नहीं देखा। अक्सर देखा गया है कि भुमिगत विद्युतीकरण , गैस व इंटरनेट, जलापूर्ति के लिए सड़के खोदी जाती है किंतु उन्हें यथावत करने के बजट का बंदरबांट इसलिए कर लिया जाता है कि नई सड़क बनने पर गड्ढे स्वत: भर जायेगे।

अब तीसरा गंभीर सवाल खड़ा होता है कि जब गांव गांव सरकारी स्कूल हैं फिर अभिभावक अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में मानक के विरुद्ध संचालित वाहनों से भेजने का जोखिम क्यों उठाते हैं। ऐसे अनेक बच्चे हैं जो प्रतिदिन एक से दो घंटे की यात्रा करके स्कूल बस से विद्यालय पहुंचते हैं और इतने समय में ही घर लौटते हैं, प्रतिदिन दो से चार घंटे की यात्रा करने वाले बच्चे घर पर कितनी पढ़ाई कर पाते होगे, उनके स्वास्थ्य पर इस प्रतिदिन की यात्रा का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सरकारी और निजी विद्यालयों के मान्यता के मानक अलग अलग है। हर जगह सरकारी स्कूल होने के बाद भी अभिभावक निजी स्कूलों की ओर इसलिए रुख करते हैं कि सरकारी स्कूलों में कक्षावार, विषयवार शिक्षक नहीं है। मिड डे मील, फ्री किताबे, ड्रेस, जूता मोजा, बैग, फर्नीचर सहित स्कूलों के कायाकल्प पर ध्यान दिया जा रहा है, निगरानी भी हो रही है, लेकिन नीति नियंता यह भूल गए कि स्कूलों का कायाकल्प तभी होगा जब कक्षावार और विषयवार शिक्षक नियुक्त होगे।

आज के इस ह्रदय विदारक हादसे के तीन कारण मेरी समझ में आए और इन तीनों कारणों की जड़ में है जिम्मेदारों के संरक्षण में पल रहा भ्रष्टाचार -रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी ।

रास्ता निहार ती रहीं माएं तमाम रात,
बच्चे स्कूल से सीधे जन्नत चले गए ।।

Tuesday, 17 October 2023

नारी शक्ति मिशन...?

नारी शक्ति मिशन.....?
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पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य एवम जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, मेयर व सभासद एवम पार्षद के ३३ प्रतिशत पद महिलाओ के लिए आरक्षित हैं।

पंचायतों और नगर निकायों में ३३ प्रतिशत पदो पर महिलाओ के आसीन होने के साथ ही प्रधान पति, प्रधान पुत्र, प्रमुख पति, प्रमुख पुत्र, जिला पंचायत सदस्य पति, जिला पंचायत सदस्य पुत्र, जिला पंचायत अध्यक्ष पति, जिला पंचायत अध्यक्ष पुत्र, चेयरमैन पति, चेयरमैन पुत्र जैसे नवीन पद चलन में आ गए। यहां तक कि सरकारी बैठकों में भी इन महिला प्रतिनिधियों के पति व पुत्र भाग लेने लगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी महिला प्रतिनिधियों के पति और पुत्रों द्वारा ही सहभागिता की जाती है। इस संबंध मे शासन द्वारा भी समय समय पर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजन कार्य नही करेगे, सरकारी बैठकों में भी यही व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

जिन पंचायतों और नगर निकायों में महिलाएं निर्वाचित हुई है, वे अपने निकट संबंधियों पर ही पूरी तरह आश्रित हैं। स्वतंत्र रूप से कार्य कर पाने में पूरी तरह समर्थ नहीं है। उनको समर्थ बनाने हेतु उपाय भी नहीं किए गए हैं। पंचायतों और नगर निकायों में महिला आरक्षण के अनुपात में अधिकारियों व अन्य कार्मिकों की नियुक्ति न होना भी इसका एक बड़ा कारण है।

नारी शक्ति मिशन तभी सार्थक होगा जब पंचायतों और नगर निकायों में महिला आरक्षण के अनुपात में महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही, परिजनों पर आश्रित रहने की प्रवृत्ति परिवर्तित करने तथा स्वतन्त्र रूप से कार्य करने की इच्छा शक्ति उत्पन्न करने के लिए आवश्यक उपाय करने पड़ेंगे तभी महिला आरक्षण सार्थक हो सकेगा।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
९५३६१६२४२४ 


Monday, 16 October 2023

कैसा नारी शक्ति वंदन...?

कैसा नारी शक्ति वंदन.....?
क्या आम चुनाव में एक तिहाई टिकट महिलाओं को मिलेंगे ?

संसद और राज्य विधानमंडलों में नारी को ३३ प्रतिशत आरक्षण देने हेतु लम्बे अंतराल के बाद बर्ष २०२३ में देश की संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर दिया, लेकिन इस कानून के लागू होने मे अभी कई बर्ष लगेगे।

प्रारंभकाल से ही सभी राजनैतिक दल महिला आरक्षण के समर्थन में रहें हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित कराने में सभी राजनैतिक दलों की भूमिका रही है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने से नागरिकों को लगा कि ये आरक्षण तत्काल लागू हो जायगा, साथ ही २०२४ के आम चुनाव में ३३ प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगी। किंतु ऐसा नहीं हुआ।

अब देखना यह है कि राजनैतिक दल वास्तव में महिलाओ की राजनैतिक भागीदारी चाहते हैं, यदि ऐसा होता तो महिला आरक्षण की चर्चा के समय से ही सभी राजनैतिक दल महिलाओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर,  विभिन्न चुनावों में तिहाई टिकट महिलाओं को देकर महिला आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता सकते थे।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के पश्चात पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। इन चुनावों में राजनैतिक दलों द्वारा महिला प्रत्याशियों को वरीयता नहीं दी गई, यहां तक कि इनमें से किसी भी राज्य में महिला को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, यहां तक कि मंत्रिपरिषद में भी पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। कानून पारित होने के बाद लगा था कि राजनैतिक दल इन चुनावों में महिला प्रत्याशियों को वरीयता देगे, किंतु राजनैतिक दलों का रवैया निराश करने वाला रहा है। 

आम चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की घोषणा सभी दलों द्वारा की जा रही है, किंतु महिलाओं को टिकट देने के प्रति सभी दल उदासीन है। अभी संपन्न हुए राज्य सभा चुनावों में भी अपेक्षा के अनुरूप महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

बहुजन समाज पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को छोड़ दे तो किसी भी राजनैतिक दल मे राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला नही है। इन दोनों दलों में महिला नेतृत्व होने के बाबजूद भी पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। अन्य दलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महिला मोर्चा तक ही सीमित है, दलों की नीति निर्धारण में महिलाओ की भूमिका नगण्य ही है।

२०२४ में पांच महानुभावों को भारत रत्न दिया गया है। इनमें एक भी महिला सम्मिलित नही है।

आम चुनाव २०२४ में राजनैतिक दलों द्वारा नारी शक्ति वंदन मे रूचि न दिखाना "नारी शक्ति वंदन अधिनियम २०२३" के भविष्य को प्रश्नचिन्हित करता है।


हरि प्रताप सिंह राठोड़, अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) 
९५३६१६२४२४

Monday, 24 July 2023

हा हा क्षत्रिय दुर्दशा न देखी जाई !!!

हा हा क्षत्रिय दुर्दशा  देखी न जाई।।
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आम चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सत्ताधारी दल और विरोधी दल अपना कुनवा बढ़ाने में लग गए हैं। स्तर इतना गिर चुका है कि अब तक एक भी चुनाव न जीतने वाले दल भी महत्व पा रहे हैं।

ऐसे में कुछ जातीय संगठन भी सक्रिय हुए हैं, ऐसे जातीय संगठन जो जिनकी कोई उपलब्धि नहीं है, वह सिर्फ चुनाव आने पर ही सक्रिय होते हैं। ब्लाक, नगर , तहसील, जिला और मंडल पर भले ही इनकी टीम न हो लेकिन इनके पास प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की फौज है। इन राष्ट्रीय और प्रदेश के पदाधिकारियों की राजनैतिक इच्छाएं है, जिन्हे ये सामाजिक संगठन का आश्रय लेकर पूरा करना चाहते हैं।

मेरी चर्चा का विषय वह जाति है जिसकी संख्या अंग्रेजो द्वारा कराई गई जातीय जनगणना में भारत मे सर्वाधिक थी। आज भी यह जाति देश में सबसे अधिक स्थानों पर निवास करती है, देश में डेढ़ सौ से अधिक लोकसभा क्षेत्रों और पांच सौ से अधिक विधानसभा क्षेत्र में यह जाति प्रभावी है। किंतु नीति के तहत फर्जी आंकड़ेबाजी में देश की इस सबसे बड़ी संख्या वाली जाति की संख्या कम बताई गई, इस जाति के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन भी इस विषय पर ज्ञान के अभाव में मौन है, उन्हे संगठन के द्वारा जाति का कल्याण नही बल्कि अपनी राजनैतिक इच्छाएं पूरी करनी है।

इन संगठनों ने अपने उपास्य महाराणा प्रताप की जयंती नहीं मनाई किंतु राजनैतिक दलों पर दबाव बनाने के लिए पंचायतें शुरु कर दी है, इन पंचायतों के मंच  के फोटो तो सार्वजनिक होते हैं लेकिन मंच के सामने के फोटो अज्ञात कारणों से कभी सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं। इनका उद्देश्य किसी भी दल से टिकट पाना रहा है। टिकट की जुगत में यह कार्यक्रम करने लगे हैं, इन कार्यक्रमों में जाति के कल्याण के लिए कोई चर्चा नहीं होती। आज़ादी के बाद संसद में प्रतिनिधित्व घटा, राज्य विधान मंडल में प्रतिनिधित्व घटा, सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व घटा, पंचायतों और सहकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व घटा, राजनैतिक दल टिकट देना दूर पार्टी में पद देने से भी परहेज करते हैं। आजादी के बाद सर्वाधिक संपत्तियां इसी बिरादरी की घटी। शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक रूप से आज़ादी के बाद सर्वाधिक यही बिरादरी पिछड़ी। देश में सबसे ज्यादा ट्रक और टैक्सी ड्राइवर, रिक्शा चालक, गार्ड (चौकीदार) इसी बिरादरी के हैं। दलितों पिछड़ों की बात तो दूर है, मुसलमानों का सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक स्तर इस बिरादरी से उच्च हुआ है।

आज़ादी के बाद राजनैतिक परिदृश्य देखे तो अब तक एक राष्ट्रपति, एक उप राष्ट्रपति, दो प्रधान मंत्री (जो कार्यकाल पूरा नहीं कर सके), एक दल मे दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष, और दुनिया के सबसे बडे़ और पुराने संगठन के एक बार मुखिया बनने के अलावा और कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है।

किंतु दुर्भाग्य का विषय है कि जब इस बिरादरी के संगठनों के बड़े बड़े पदाधिकारी पगड़ी बांध कर, तलवार पकड़ कर चीखते है (दहाड़ते नही) तो लगता ही नहीं है कि वे ऐसी जाति के लिऐ काम कर रहे हैं जो आजादी की बाद निरंतर विपन्न होती जा रही है।

अभी हाल फिलहाल कई राष्ट्रीय अध्यक्ष सक्रिय हो गए हैं, जिन्हे सक्रिय होने के लिए चुनाव का इंतजार रहता है। इनमे से दो राष्ट्रीय अध्यक्ष संसद सदस्य रह भी चुके हैं। जिस समय एस सी एस टी कानून को कठोर बनाने के लिए संसद में संशोधन विधेयक लाया गया उस समय एक राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकसभा में बैठते थे तो एक राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यसभा में बैठते थे, दोनो ही सदन में यह विधेयक पास हो गया लेकिन इन दोनों महानुभावों ने विरोध नहीं किया बल्कि संसद में बैठकर इस काले कानून का समर्थन किया।२०१९ मे टिकट न मिलने पर एक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तो बिरादरी का आह्वान कर दिया कि वह भाजपा को हराने के लिए वोट करे किंतु बिरादरी ने नही सुनी।

आखिर वह बिरादरी जो देश की डेढ़ सौ से अधिक लोकसभा क्षेत्रों और पांच सौ से अधिक विधानसभाओं में प्रभावी हो, उसकी उपेक्षा करने का साहस किसमे हों सकता है, यह विचारणीय विषय है।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
                 अधिवक्ता
विधिवेत्ता, लेखक, चिन्तक, 
सोशल/आर टी आई एक्टिविस्ट 
९५३६१६२४२४

Saturday, 27 May 2023

नौ वर्ष, नौ अपेक्षाएं

भारत माता की जय !
वंदे मातरम् !
इंकलाब ज़िंदाबाद !

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की प्रधानमंत्री से नौ वर्ष में नौ अपेक्षाएं :
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१- एक देश , एक चुनाव, एक चुनाव आयोग व एक मतदाता सूची की नीति बने। राज्य निर्वाचन आयोगों को समाप्त कर स्थानीय निकायों व पंचायतों के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ही कराएं जावे।

 २- लोकपाल को सक्रिय कर देश के समस्त राज्यों में लोकपाल अधिनियम की धारा ६३ के अंतर्गत लोकायुक्त की अनिवार्य रूप से नियुक्ति हो।

३- नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित अवधि में मिले, एतदर्थ सिटीजन चार्टर/ जनहित गारंटी कानून को प्रभावी बनाते हुए नियमित निगरानी तंत्र विकसित हो।

४- सूचना का अधिकार दम तोड़ रहा है। सूचना प्राप्ति हेतु तीन से पांच साल तक लड़ाई लड़नी पड़ रही है।अस्तु सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में संशोधन करके तत्काल सूचना दिए जाने,प्रथम अपील पन्द्रह दिन में व द्वितीय अपील एक माह में तय करने की व्यवस्था हो। धारा चार के अन्तर्गत सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों एवं उनके परिजनों की चल अचल संपत्तियां सार्वजनिक हो तथा केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति की अनिवार्यता हो।

५-  न्यायपालिका को कुछ घरानों के कब्जे से मुक्त कराने हेतु भारतीय न्यायिक सेवा (IJS) का गठन हो साथ ही नागरिकों के हित में उच्चतम न्यायालय की देश में चार उपयुक्त स्थलों पर पीठ स्थापित हो तथा राज्यों में मंडल स्तर पर उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित हो।

६- सामाजिक कार्यकर्ताओं व सूचना कार्यकर्त्ताओं  की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र व्हिसिल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।

७- मुफ्त शिक्षा / चिकित्सा और योग्यतानुसार रोजगार की गारंटी हेतु कानून बने। 

८- जन प्रतिनिधियों, उनके परिजनों व संबंधियों की चल अचल परिसंपत्तियों में हो रही गुणोंत्तर वृद्धि की निगरानी हेतु तंत्र विकसित हो।

९- चुनाव लड़ने से पूर्व अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता एवम न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारण हेतु लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन किया जावे।

जय हिन्द !


हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424

( सभी सूचना व सामाजिक कार्यकर्ता यह नौ अपेक्षाएं माई ग्रीवांस पोर्टल व ट्विटर के माध्यम से प्रधानमंत्री जी को प्रेषित करें। )

Sunday, 21 May 2023

चुनाव हार गए लेकिन गलत सिफारिश नहीं की।

चुनाव हार गए लेकिन गलत सिफारिश नहीं की।

विपक्षी नेता भी करते थे सम्मान।

श्रद्धांजलि सभा में पप्पू भईया का भावपूर्ण स्मरण।

क्षत्रिय महासभा बदायूं के तत्वावधान में नेकपुर स्थित क्षत्रिय भवन में पूर्व विधायक अवनीश कुमार सिंह "पप्पू भईया" के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनों ने स्व पप्पू भईया के जीवन से संबंधित संस्मरण साझा किए। दो मिनट के मौन के पश्चात सभा विसर्जित हुई।

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने कहा कि पप्पू भईया दातागंज विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे, सत्ता पक्ष में भी रहे और विपक्ष में भी रहे। उन्होने कभी गलत सिफारिश नहीं की। चुनाव में पराजित होना स्वीकार किया लेकिन गलत कार्यों को समर्थन नहीं किया।

क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि उनकी ईमानदारी और सादगी के कारण विपक्षी दलों के नेता भी उनका सम्मान करते थे।

क्षत्रिय महासभा बदायूं के संरक्षक मंडल के सदस्य डॉ वी पी सिंह सोलंकी ने कहा कि पप्पू भईया ने राजनीति में उच्च आदर्श स्थापित किए हैं, उनकी परम्परा के नेता अब किसी भी राजनैतिक दल में नहीं है।

क्षत्रिय महासभा बदायूं के जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि पप्पू भईया ने हमारे समाज मे जन्म लेकर हम सबको गौरवान्वित किया है। बर्ष २०२३ मे आयोजित होने वाला शस्त्र पूजन समारोह पप्पू भईया को समर्पित रहेगा।

पप्पू भईया के अति निकटस्थ व वरिष्ठ भाजपा नेता राणा प्रताप सिंह ने कहा कि पप्पू भईया चार बार विधायक रहे, लेकिन उनके पास एक जीप ही थी जिसे वे स्वयं ही चलाते थे। बस से यात्रा करते थे। वर्तमान समय में सामान्य कार्यकर्ता भी बस से यात्रा नही करते हैं।

इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष अखिलेश चौहान, जिला महासचिव रतनवीर सिंह तोमर, जिला अध्यक्ष कृषक सभा मनोज तोमर, जिला संयोजक व्यापार सभा राकेश सिंह, जिला संगठन मंत्री भूराज सिंह, जिला सचिव अभिषेक पुंडीर, नगर अध्यक्ष महीपाल सिंह, नगर उपाध्यक्ष राजपाल सिंह राठौड़, क्षत्रिय समाज विकास समिति के अध्यक्ष सुरेश सिंह सिसौदिया,  नगर सचिव मनोज चंदेल, रंजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।