Wednesday, 19 May 2021

ग्राम पंचायत सदस्य पद को क्रियाशील बनाये जाने की आवश्यकता।

ग्राम पंचायतों को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार को उठाने होंगे कुछ महत्वपूर्ण कदम
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उप प्रधान पद की व्यवस्था के साथ ही देना पड़ेगा अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार।
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आठों समितियों को बनाना पड़ेगा क्रियाशील।
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राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा अभी संपन्न हुए पंचायत चुनाव में विश्व का सबसे बड़ा चुनाव कराने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाई गई। उत्तर प्रदेश का पंचायत चुनाव विश्व का सबसे बड़ा चुनाव बनता है सबसे छोटे पद ग्राम पंचायत सदस्य के कारण। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत सदस्य के 732476 पद है। उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 (1) ग में व्यवस्था दी गई है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में 1000 जनसंख्या पर नौ सदस्य, दो हजार जनसंख्या पर ग्यारह सदस्य, तीन हजार जनसंख्या पर तेरह सदस्य तथा तीन हजार से अधिक जनसंख्या होने पर पंद्रह सदस्य होंगे। धारा 12 की उपधारा 5 (क) में ग्राम पंचायत सदस्यों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

धारा 28, 29 व 30 में समितियों की व्यवस्था की गई है । धारा 28 में भूमि प्रबंधक समिति का प्रावधान है तथा धारा 29 में राज्य की इच्छा अनुसार समितियों के गठन का प्रावधान है। राज्य सरकार द्वारा जिन छ: प्रकार की समितियों के गठन हेतु निर्देश जारी किए गए हैं वे हैं- नियोजन और विकास समिति, शिक्षा समिति, निर्माण कार्य समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति, प्रसाशनिक समिति व जल प्रबंधन समिति। प्रत्येक समिति में छः सदस्य होंगे, एक महिला, एक अनुसूचित जाति व एक पिछड़े वर्ग का सदस्य होना आवश्यक है। राजस्व संहिता में वर्णित व्यवस्था के अनुसार एक ग्राम राजस्व समिति का भी गठन होगा, जिसका उपाध्यक्ष प्रधान पद के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाला प्रत्याशी होगा। धारा 30 में संयुक्त समिति की व्यवस्था दी गई है, जिसके अनुसार आवश्यकता पढ़ने पर दो ग्राम पंचायतें अपने सदस्यो में से आवश्यकतानुसार समिति का गठन कर सकती हैं। इस प्रकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में आठ समितियों का गठन अनिवार्य है। 

उत्तर प्रदेश में अभी सम्पन्न हुए पंचायत चुनाव में लगभग दो लाख ग्राम पंचायत सदस्य के पद रिक्त रह गए हैं। इन रिक्त पदों के लिए उप चुनाव कराया जाएगा। नागरिकों ने इन पदों के लिए चुनाव लड़ने हेतु कोई रूचि नहीं दिखाई। अनेक ग्राम पंचायतों में एक भी सदस्य निर्वाचित नहीं हुआ है। जिन ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए भी हैं, तो उनके नामांकन प्रधान पद के प्रत्याशियों द्वारा कराए गए हैं। जिस प्रकार नागरिक प्रधान पद के लिए रुचि दिखाते हैं, उस प्रकार सदस्य पद हेतु रुचि का अभाव है। क्योंकि ग्राम पंचायत सदस्य के पद को महत्वहीन बना दिया गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 09 से 15 तक ग्राम पंचायत सदस्य होते हैं, इनकी स्थिति वही है जो नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद में सभासद की होती है, नगर निगम में पार्षद की होती है, क्षेत्र पंचायत/जिला पंचायत में सदस्य की होती है तथा विधानसभा में विधायक और संसद में सांसद की होती है।

कहने को ग्राम पंचायत सदस्यों में से आठ प्रकार की समितियां गठित की जाती है। हर ग्राम पंचायत सदस्य एक से अधिक समितियों का सदस्य होता है।  इन समितियों औऱ ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली मात्र कागजों तक ही सीमित रहती है। ग्रान पंचायत सदस्यों तक को पता नहीं होता है कि वे किस किस समिति के सदस्य हैं तथा समिति का उद्देश्य क्या है। यहाँ तक कि उनकी बैठकों में भी कोई भूमिका नहीं रहती है। कब बैठकें आयोजित हो गई, इसकी भी उन्हें सूचना नहीं मिलती है। कुछ समय के पश्चात निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्य यह भी भूल जाते हैं कि वे ग्राम पंचायत सदस्य हैं , यही नहीं निर्वाचक भी भूल जाते हैं कि उन्होंने किसे ग्राम पंचायत सदस्य चुना था।

ग्राम पंचायत सदस्य को मजबूत बनाने में शासन की भी रुचि नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शासन द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य व प्रधान के पद हेतु आरक्षण नीति 11 फरवरी 2021 को निर्धारित की गई, उस नीति में पाँच पदों जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व प्रधान के लिए आरक्षण किस प्रकार निर्धारित किया जाएगा, व्यवस्था की गई , किन्तु ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण का निर्धारण किस प्रकार होगा इसकी व्यवस्था नहीं की गई। 11 फरवरी 2021 की आरक्षण नीति उच्च न्यायालय द्वारा अस्वीकार करने पर पुनः 17 मार्च को नई नीति घोषित की गई, आश्चर्य का विषय यह है कि दूसरी नीति में भी उक्त पाँच पदों के लिए ही आरक्षण निर्धारण की व्यवस्था की गई,  ग्राम पंचायत सदस्य के पद के लिए आरक्षण किस प्रकार किया जाएगा, कोई व्यवस्था नहीं की गई। आरक्षण नीति में कोई व्यवस्था न होने पर भी ग्राम पंचायत सदस्य के पदों को भी आरक्षित कर दिया  गया।

ग्राम पंचायत सदस्यों की पंचायत राज व्यवस्था में भूमिका निर्धारित करने हेतु एवं  सक्रिय बनाये जाने हेतु कुछ व्यवहारिक निर्णय लेने की आवश्यकता है । इसके लिए ग्राम पंचायतों में उप प्रधान का पद पुनः स्थापित करना पड़ेगा। प्रधान के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार ग्राम पंचायत सदस्यों को देना पड़ेगा साथ ही ग्राम पंचायत में समितियों का गठन करके समितियों को क्रियाशील बनाना पड़ेगा। ग्राम पंचायत सदस्यों के व्यवहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिसमें उन्हें उनके अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित कराने के साथ ही पूरी पंचायत राज व्यवस्था से परिचित कराना पड़ेगा।


हरि प्रताप सिंह राठोड
अधिवक्ता
अध्यक्ष/संस्थापक: जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
९५३६१६२४२४


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