Wednesday, 3 May 2023

किराए के ई ओ और अभियंता नही बना सकते स्मार्ट सिटी।

मुख्य चुनावी मुद्दे जिन पर चर्चा ही नहीं होती।
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इस समय नगर निकाय का चुनाव चल रहा है, प्रथम चरण का चुनाव प्रचार थम गया है। राजनैतिक दल उन मुद्दों की चर्चा कर रहे हैं, जिनके बल पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव लडे गए, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की भी चर्चा हो रही है।

"" स्मार्ट सिटी "" शब्द एक दशक से चलन में हैं। स्मार्ट सिटी के मूलभूत अंग - सड़के,  सड़को के बीच में डिवाइडर, ओवर ब्रिज/ फ्लाई ओवर, सीवर लाइन, रसोई गैस पाइप लाइन, भूमिगत विद्युतीकरण, बाईपास जैसी ऐसी योजनाएं जिनमे बड़ा बजट खर्च हो, को माना गया है। जब नगर निकाय को चुंगी कहते थे, "स्मार्ट सिटी"  जैसे शब्द की व्याख्या करने की सामर्थ्य नागरिकों में नहीं थी तब चुंगी के स्कूल कालेज होते थे, चुंगी के अस्पताल होते थे।

निकाय चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा पानी, सफाई, सड़के यहां तक कि जलकर और गृहकर में छूट देने की बात कही जा रही है, कोइ भी प्रत्याशी अथवा राजनैतिक दल स्कूल/ कालेज, अस्पताल बनाने की बात नहीं कर रहे हैं।

लेकिन निकाय चुनाव में पानी, सफाई और सड़क प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। इनसे आगे नागरिक सोच नहीं पा रहे हैं या सोचने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। इनसे हटकर कुछ ऐसे भी विषय है जो चुनावी मुद्दे बन सकते हैं :-

१- नगर निकाय और पंचायत मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाताओं की संख्या और विधान सभा की मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाताओं की संख्या बराबर होनी चाहिए।
किंतु दोनो मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाताओं की संख्या समान नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जिनके नाम पंचायत और नगर निकाय की दोनो ही मतदाता सूची में सम्मिलित हैं। 

२- अनेक गांव, नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषदों की सीमा से चिपटे हुए हैं उन्हें नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषदों में सम्मिलित किया जाए।

३- ऐसी ग्राम पंचायत जहां ब्लाक मुख्यालय और थाना मुख्यालय स्थित है, उन ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा मिले। 

४- उत्तर प्रदेश में नगरों में नई निर्मित होने वाली सड़कों, नालियों, नालों व पुलियों की ऊंचाई दोष पूर्ण नीतियों के कारण निरन्तर बढ़ाई जा रही है, जिस कारण घर नीचे होते जा रहे हैं, नाले और नालियों का गंदा पानी घरों में घुसता है। इस समस्या के समाधान के लिए गृह स्वामी घर तोड़कर पुन: निर्माण कराएं,  किंतु उसकी इतनी सामर्थ्य नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए अब तक किसी दल या जन प्रतिनिधि द्वारा प्रभावित नागरिकों की सहायतार्थ विशेष कोश बनाएं जानें की मांग कभी नहीं उठाई गई, विशेष कोष का गठन कर प्रभावित नागरिकों को मुआवजा दिए जानें की व्यवस्था हो।

५- नगर निकायों में अधिशासी अधिकारी नहीं है, अभियंता नही है। अन्य विभागों के अधिकारी अधिशासी अधिकारी का कार्य कर रहे हैं। अन्य कार्मिकों के पद भी बड़ी संख्या में रिक्त हैं ऐसी स्थिति में स्मार्ट सिटी की कल्पना व्यर्थ है।

६- नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मचारी बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधियों/अधिकारियों के कार्यालय/आवास पर सेवाएं दे रहे हैं, जो गंदगी का सबसे बड़ा कारण है।

७- अनेक नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद में डिग्री कालेज नही है, अस्पताल नहीं है। प्रत्येक नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद मे डिग्री कालेज के साथ ही कम से कम पचास शैय्या युक्त अस्पताल हो।

#हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
अध्यक्ष/ संस्थापक
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन)
९५३६१६२४२४

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