सामाजिक कार्यकर्ता , RTI एक्टिविस्ट , गांधीवादी तरीके से रिश्वतखोरी , दलाली ,खनन , डग्गेमारी, भृस्टाचार के खिलाफ लगातार एक युद्ध लड़ने वाले योद्धा Hari Prataup Singh Rathode एडवोकेट का मनोबल तोड़ने के लिये उनके खिलाफ एक झूठी रिपोर्ट लिखाई गई। सत्ता पार्टी के एक पदाधिकारी ने तहरीर दी और थाने में बिना जाँच करें तुरन्त मुकद्दमा लिख दिया गया। कारण यह बताया गया कि सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट किया जबकि कोई साक्ष्य नही क्योंकि कोई ट्वीट किया ही नही था। रिपोर्ट भी IT एक्ट में न लिखना बताता है कि प्राथमिकता सिर्फ रिपोर्ट लिखने की ही थी।
सामाजिक अपराधियों का एक नेक्सस है जिसमे भ्रष्ठ अफसर नेता शामिल है। उनके भृस्टाचार के खिलाफ जो आवाज उठाता है उनकी आवाज दबाने को झूठे मुकद्दमे लादे जाते है। सरकार बदल जाती है लेकिन सिस्टम नही बदलता। उस सिस्टम में सत्ता के नेता जुड़ जाते है।
सिस्टम आज भी बदलने में नही आ रहा है जो बदलने की कोशिश करता है उसे यह सिस्टम अपने पक्ष में कर लेता है जो उनके साथ नही आता तो यह सिस्टम उनकी आवाज को दबाने में लग जाता है।
सच्ची आवाजों को दबाने के लिये यदि झूठे मुकद्दमों का सहारा लिया जाएगा तो यह लोकतंत्र के लिए घातक होगा।
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