Saturday, 30 May 2020

पत्रकारों, सामाजिक/ सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा को बने कानून।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विशेष :
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पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा हेतु बने कानून।

राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गठित हो शक्ति सम्पन्न आयोग।

चिकित्सा, बीमा व पेंशन योजनाओं का मिले लाभ।

शासन के तीन अन्ग हैं -  विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका। समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के कारण मीडिया का इतना महत्त्व बढ़ गया कि उसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाने लगा।

इसके पीछे पत्रकारों की लम्बी सन्घर्ष गाथा है। इस समय प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया ने एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। सक्रियता बढ़ने से ख़तरे भी बढना स्वाभाविक है। मीडिया कर्मियों पर हमले होना,हत्या हो जाना, परिजनों का उत्पीड़न होना, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों व भ्रष्ट तत्वों द्वारा निरन्तर हमलों,फर्जी मुकदमे लिखे जाने की एक बहुत विशाल श्रन्खला है। 
मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज भी उठी। संसद में भी अनेक बार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने स्तर से सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश जारी किए किन्तु कोई कानून नहीं बन सका।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया भी ज्यादा शक्ति सम्पन्न नहीं है।
पत्रकारों की सुरक्षा हेतु कानून बनने में सबसे बड़ी बाधा नौकरशाही है। वर्ष 2011 में व्हिसिल व्लोअर प्रोटेक्शन बिल लाया गया जो संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया और राष्ट्रपति के पास वर्ष 2014 से लम्बित है। इस बिल के द्वारा भ्रष्टाचार के विषय उठाने वालों की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं।इसी तरह लोकपाल कानून बन जाने के बाद भी आज तक नौकरशाही की वजह से निष्प्रभावी है। नौकरशाही अपने ऊपर किसी भी प्रकार का अंकुश नहीं चाहती और हमारे नेतागण उस पर पूरी तरह से आश्रित है।

पत्रकारों साथ ही स्वतन्त्र रूप से लोक कल्याण के विषय उठाने वाले सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा व संरक्षा हेतु एक  केन्द्रीय कानून की जरूरत है। इस कानून में पत्रकारों, सामाजिक व सूचना कार्यकर्त्ताओं के सम्मान की सुरक्षा की गारंटी हो।इन पर हमला करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी हो साथ ही जमानत की व्यवस्था न हो तथा त्वरित न्यायालय में सुनवाई की व्यवस्था हो।
राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में शक्ति सम्पन्न आयोग गठित हो,आयोग में वरिष्ठता व योग्यता के आधार पर पत्रकारों व सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं को भी सदस्य नामित करने की व्यवस्था हो। आयोग की अनुमति के बिना पत्रकारों, सामाजिक/सूचना कार्यकर्त्ताओं के विरुद्ध दान्डिक अभियोग पंजीकृत न हो। 
केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों में इन्हें स्थान दिया जावे। जिला मुख्यालयों पर इनके बैठने हेतु भवन की व्यवस्था हो। सरकार की ओर से इन्हे चिकित्सा, बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं से आच्छादित किया जाये।समन्वय हेतु जिला,मन्डल व राज्य स्तर पर प्रशासन के साथ मासिक बैठक का आयोजन हो जिसमें इनकी समस्याओं का तत्काल समाधान हो।साथ ही इनके लिए भी एक आचार संहिता बनाई जावे ताकि इस क्षेत्र में भी आवश्यक सुधार हो सके।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424



टिड्डी दल के हमले से निपटने हेतु कागजी तैयारी।

सेनापति और सैनिकों के बिना टिड्डी दल के हमले को नाकाम करने में लगीं है कृषि विभाग की सेना।

कागजी तैयारी से टिड्डी हमले को किया जाएगा विफल।

अन्य आपदाओं के साथ ही एक और प्राकृतिक आपदा इस समय भारत में आयी हुई है और वह है टिड्डी दल का भारत के कई राज्यों में हमला।

भारत सरकार ने इसके लिए निर्देश जारी किए हैं,अलर्ट रहने को कहा गया है,ऐसी आकस्मिक आपदा से निपटने के लिए जो तैयारियां सदैव रहनी चाहिए,उन तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

केन्द्र सरकार में केन्द्रीय कृषि मंत्री हैं, राज्य मंत्री भी हैं, कृषि विभाग में केन्द्र स्तर के अधिकारियों के भी सारे पद भरे हुए हैं।इस कारण उन्होंने एडवाइजरी/निर्देश जारी कर अपने दायित्वों का निर्वहन कर लिया।

इसी प्रकार राज्य में भी कृषि मंत्री, राज्य मंत्री व राज्य स्तरीय अधिकारियों के पद रिक्त नहीं है,अस्तु उन्होंने भी एलर्ट रहने के निर्देश जारी कर दिए। मन्डल स्तर पर भी अधिकारियों का टोटा नहीं है, इसलिए उन्होंने भी निर्देश जारी कर अपने दायित्वों की इति श्री कर ली।सभी के द्वारा जारी निर्देशों में एक बात समान है और वह है कि टिड्डी के हमले से निपटने को किसान को ही तैयार रहना है।

उत्तर प्रदेश मेंं जिला कृषि रक्षा अधिकारी के लगभग दो तिहाई पद लम्बे समय से रिक्त हैं, प्रभारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। तहसील स्तरीय अधिकारियों की तो स्थिति अत्यंत ही खराब है।

कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है,तब यह स्थिति है कि सरकार कृषि विभाग की ओर गम्भीर नहीं है। जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों की कमी से जूझ रहा विभाग टिड्डी के हमले से कैसे निपटेगा।
बिना सेनापति के, बिना सेना के अथवा उधार के सेनापति और उधार की सेना के सहारे हम टिड्डी से लडने की तैयारी में लगे हुए हैं।

आगरा व अन्य जनपदों में जिस तरह की तैयारियां करके टिड्डी के हमले को विफल कर दिया गया,उस तरह की तैयारियां बरेली मंडल में तो दिखाई नहीं दे रही है।

उदाहरण के लिए जनपद बदायूं में जिला कृषि रक्षा अधिकारी का पद लम्बे समय से रिक्त हैं, भूमि संरक्षण अधिकारी का पद भी रिक्त हैं, दोनों प्रभार जिला कृषि अधिकारी संभाल रहे हैं,हो सकता है कि इनके अतिरिक्त वह अन्य भी कोई प्रभार संभाल रहे हो।

जनपद बदायूं में पांच तहसील हैं किन्तु तहसील स्तरीय अधिकारी मात्र एक ही है। इसी तरह अन्य अनेक जिला, तहसील व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के पद रिक्त हैं।यह स्थिति हमारी सरकार की कृषि के प्रति उदासीनता को प्रदर्शित कर रही हैं।टिड्डी से निपटने हेतु धरातल पर तैयारियों का अभाव देखा जा सकता है।

हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424

Thursday, 28 May 2020

शोक व्यक्त।

जनपद बदायूं के प्रमुख सत्याग्रही छोटेलाल "भिड़े जी "  के निधन पर शोक।

वर्ष 2017 में छत्तीस दिवसीय व वर्ष 2018 में अड़तीस दिवसीय सत्याग्रह में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ग्राम नौशेरा निवासी अस्सी वर्षीय श्री छोटेलाल " भिड़े जी " के निधन से भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के समस्त कार्यकर्ता व सहयोगी शोक सन्तृप्त हैं। महाराष्ट्र के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता भिड़े जी से कद-काठी मिलने के कारण सभी कार्यकर्ता व सहयोगी श्री छोटेलाल जी को भिड़े जी कहकर सम्बोधित करने लगे थे।

श्री छोटेलाल जी के निधन पर भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के समस्त पदाधिकारियों, सहयोगियों, कार्यकर्त्ताओं व सदस्यगण ने शोक व्यक्त किया तथा ईश्वर से शोकाकुल परिवार को अपार दुःख  सहन करने की शक्ति प्रदान करने तथा दिवंगत पुण्यात्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना की।
     
शोकाकुल
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान

Wednesday, 27 May 2020

पंचायत प्रतिनिधियों की निर्धारित हो न्यूनतम शैक्षिक योग्यता।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की आनलाइन बैठक में पंचायत राज व्यवस्था को सुदृढ़ किए जाने हेतु प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को सोलह सूत्रीय मांग पत्र प्रेषित करने का निर्णय।

पंचायत प्रतिनिधियों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हो निर्धारित।

राजस्व ग्राम को मिले ग्राम पंचायत का दर्जा।

हर ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत अधिकारी और लेखपाल की नियुक्ति हो अनिवार्य।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की एक महत्वपूर्ण आनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित पंचायत चुनावों पर विचार विमर्श किया गया तथा पंचायत चुनावों से पूर्व सोलह सुधार किए जाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को सोलह सूत्रीय मांग पत्र प्रेषित करने का निर्णय लिया गया। मांग पत्र समस्त सूचना कार्यकर्ता ईमेल, ट्विटर, जनसुनवाई पोर्टल,माई ग्रीवांस पोर्टल के माध्यम से दिनांक 28-05-2020 को प्रेषित करेंगे।

इस अवसर पर भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान आपदाकाल में ग्रामों से बढ़े स्तर पर पलायन की समस्या मुखर है।ग्राम स्तर पर आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ ग्रामीण पलायन को विवश होते हैं। इस कारण ग्राम इकाई को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके तथा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकें। ग्राम इकाई के दुर्बल होने का सबसे बड़ा कारण है कि विकास खंड इकाई को निष्क्रिय है। तहसील, जनपद,मन्डल व प्रदेश स्तर पर किसी भी विभाग में अधिकारियों के पद रिक्त नहीं है, किन्तु विकास खंड व ग्राम इस समस्या से जूझ रहे हैं, वहां न तो अधिकारी ही है और न ही कर्मचारी।आदेश देने वालों की संख्या क्रियान्यवयन करने/ कराने वालों से अधिक है,इस कारण शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से नागरिक लाभान्वित नहीं हो पाते हैं परिणाम स्वरूप योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो जाती है, बहुत सी योजनाओं का तब पता चलता है जब घोटाले खुलते हैं।शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिक लाभान्वित हो सकें इस हेतु पंचायत राज व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

श्री राठोड़ ने कहा कि कस्बे का स्वरूप लें चुकी विकसित ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर हर  राजस्व ग्राम को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जावे। दस से पन्द्रह ग्राम पंचायतों को मिलाकर न्याय पंचायत का गठन हो। प्रधान पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट व ग्राम पंचायत सदस्य हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल निर्धारित हो।क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक निर्धारित हो। क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पदेन सदस्य हों, इस सम्बन्ध में पंचायत राज अधिनियम व क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम में संशोधन हो। ग्राम पंचायतों  के वास्तविक निवासियों को ही पंचायत चुनाव में मताधिकार प्राप्त हो तथा कृत्रिम निवासियों को मताधिकार से वन्चित कर वहां मताधिकार दिया जावे जहां वह वास्तविक रूप से निवास कर रहे हैं। पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों के अनुपात में ही ग्राम विकास विभाग व पंचायत राज विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति हो।

श्री राठोड़ ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सचिवालय की स्थापना करके ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम राजस्व अधिकारी ( लेखपाल ) की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जावे। पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैयार कराये जावे। राजस्व सन्हिता में वर्णित व्यवस्था अनुसार ग्राम राजस्व समिति का गठन किया जावे। गांव में स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र को सक्रिय कर स्वास्थय मित्र की नियुक्ति की जावे। न्याय पंचायत मुख्यालय पर उप मन्डी समितियों तथा विकास खंड मुख्यालयों पर मन्डी समितियों की स्थापना हो।बढ़ती हुई जनसंख्या के दृष्टिगत विकास खंडों का पुनर्गठन करके प्रत्येक विकासखण्ड में खन्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी,अवर अभियंता,खन्ड शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य रूप से नियुक्ति हो। प्राथमिक विद्यालयों में कक्षावार व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जावे, राजकीय व अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद शीघ्र भरे जावे ताकि ग्रामीण निजी विद्यालयों के शोषण का शिकार न हो।वर्तमान प्रधानो ,ब्लाक प्रमुखों व जिला पंचायत अध्यक्षों की परिसम्पतियों की जांच उनके द्वारा नामांकन के समय प्रस्तुत किए गए विवरण के आधार पर कराये जाने हेतु एक जांच एजेंसी अधिकृत की जावे।

आनलाइन बैठक में प्रमुख रूप से डाल भगवान सिंह, शमसुल हसन, रामगोपाल,एम एच कादरी, वेदपाल सिंह, अखिलेश सिंह,अभय माहेश्वरी,असद अहमद,सी एल वर्मा एडवोकेट, राम-लखन, अखिलेश सोलंकी,आर्येन्द्र पाल सिंह, सतेन्द्र सिंह,नारद सिंह,भानु प्रताप सिंह, महेश चंद्र, वीरपाल, नेत्रपाल, कृष्ण गोपाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

चुनावों से पहले पंचायत कानून में बड़े सुधारों की जरूरत।

पंचायत प्रतिनिधियों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हो निर्धारित।

राजस्व ग्राम को मिले ग्राम पंचायत का दर्जा।

हर ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत अधिकारी और लेखपाल की हो नियुक्ति । 

इस वर्ष प्रदेश में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान आपदाकाल में ग्रामों से बढ़े स्तर पर पलायन की समस्या मुखर है।ग्राम स्तर पर आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ ग्रामीण पलायन को विवश होते हैं। इस कारण ग्राम इकाई को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके तथा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकें। ग्राम इकाई के दुर्बल होने का सबसे बड़ा कारण है कि विकास खंड इकाई को निष्क्रिय है। तहसील, जनपद,मन्डल व प्रदेश स्तर पर किसी भी विभाग में अधिकारियों के पद रिक्त नहीं है, किन्तु विकास खंड व ग्राम इस समस्या से जूझ रहे हैं, वहां न तो अधिकारी ही है और न ही कर्मचारी।आदेश देने वालों की संख्या क्रियान्यवयन करने/ कराने वालों से अधिक है,इस कारण शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से नागरिक लाभान्वित नहीं हो पाते हैं परिणाम स्वरूप योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो जाती है, बहुत सी योजनाओं का तब पता चलता है जब घोटाले खुलते हैं।शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिक लाभान्वित हो सकें इस हेतु पंचायत राज व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

 कस्बे का स्वरूप लें चुकी विकसित ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर हर  राजस्व ग्राम को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जावे। दस से पन्द्रह ग्राम पंचायतों को मिलाकर न्याय पंचायत का गठन हो। प्रधान पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट व ग्राम पंचायत सदस्य हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल निर्धारित हो।क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक निर्धारित हो। क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पदेन सदस्य हों, इस सम्बन्ध में पंचायत राज अधिनियम व क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम में संशोधन हो। ग्राम पंचायतों  के वास्तविक निवासियों को ही पंचायत चुनाव में मताधिकार प्राप्त हो तथा कृत्रिम निवासियों को मताधिकार से वन्चित कर वहां मताधिकार दिया जावे जहां वह वास्तविक रूप से निवास कर रहे हैं। पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों के अनुपात में ही ग्राम विकास विभाग व पंचायत राज विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति हो।

 प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सचिवालय की स्थापना करके ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम राजस्व अधिकारी ( लेखपाल ) की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जावे। पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैयार कराये जावे। राजस्व सन्हिता में वर्णित व्यवस्था अनुसार ग्राम राजस्व समिति का गठन किया जावे। गांव में स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र को सक्रिय कर स्वास्थय मित्र की नियुक्ति की जावे। न्याय पंचायत मुख्यालय पर उप मन्डी समितियों तथा विकास खंड मुख्यालयों पर मन्डी समितियों की स्थापना हो।बढ़ती हुई जनसंख्या के दृष्टिगत विकास खंडों का पुनर्गठन करके प्रत्येक विकासखण्ड में खन्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी,अवर अभियंता,खन्ड शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य रूप से नियुक्ति हो। प्राथमिक विद्यालयों में कक्षावार व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जावे, राजकीय व अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद शीघ्र भरे जावे ताकि ग्रामीण निजी विद्यालयों के शोषण का शिकार न हो।वर्तमान प्रधानो ,ब्लाक प्रमुखों व जिला पंचायत अध्यक्षों की परिसम्पतियों की जांच उनके द्वारा नामांकन के समय प्रस्तुत किए गए विवरण के आधार पर कराये जाने हेतु एक जांच एजेंसी अधिकृत की जावे।

Sunday, 24 May 2020

दीप जलाकर श्रमिकों को दी श्रृद्धांजलि।

दीप जलाकर श्रमिकों को श्रृद्धांजलि देने के साथ ही उठाई उनके कल्याण की मांग।

पलायन रोकने हेतु श्रमिक कल्याण पर विशेष ध्यान दें सरकार ।

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के सहयोगी संगठन भारतीय श्रमिक पंचायत के आह्वान पर आपदाकाल में विभिन्न कारणों से दुर्घटनाग्रस्त हुए श्रमिकों की आत्मा की शांति हेतु एवं उनके कल्याण की प्रार्थना के साथ " एक दीप श्रमिकों के नाम " कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भागीदारी कर श्रमिकों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की।

इस अवसर पर भारतीय श्रमिक पंचायत के संयोजक डाल भगवान सिंह व सह संयोजक एम एल गुप्ता ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारों के पास पलायन करने को विवश हुए श्रमिकों का पूरा विवरण आ चुका है, पलायन करने वाले सर्वाधिक श्रमिक उत्तर प्रदेश और ़ बिहार से हैं।इन श्रमिकों का पूरा विवरण केन्द्र सरकार सहित सभी राज्य सरकारों के पास आ चुका है। भविष्य में श्रमिकों के समक्ष ऐसी कठिन परिस्थिति उत्पन्न न हो, तथा श्रमिकों को अपने निवास स्थान पर ही अथवा निवास स्थान के निकट रोजगार उपलब्ध कराने के उपाय करने चाहिए। पलायन ग्रस्त श्रमिकों को श्रम विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराकर उनका मनरेगा जॉब कार्ड एवं राशन कार्ड बनवाया जावे, सभी पलायन ग्रस्त श्रमिकों को आवास, शौचालय, पेंशन योजनाओं के साथ ही उज्ज्वला, सौभाग्य व आयुष्मान योजना का लाभ प्रदान कराया जावे। विवाह योजना के अंतर्गत श्रमिकों की पुत्रियों को प्राथमिकता दी जाये। श्रमिकों के पाल्यो को कस्तूरबा विद्यालयों,नवोदय विद्यालयों में शिक्षा दिलायी जावे तथा आवश्यकतानुसार आवासीय विद्यालयों की स्थापना की जावे। श्रमिकों की समस्या के समाधान हेतु उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय श्रम आयोग तथा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में हर राज्य में राज्य आयोग की स्थापना हो। जनपद व मन्डल स्तर पर माह में एक बार सभी अधिकारी तिथि निर्धारित कर श्रमिकों की समस्या सुने। स्वय का व्यवसाय करने के इच्छुक श्रमिकों को मुद्रा योजना के तहत सहायता दिलाई जाए। भारतीय श्रमिक पंचायत इन विषयों को प्रभावी बनाने हेतु सरकार पर दबाव बनाने हेतु अभियान चलायेगी।

एक दीप श्रमिकों के नाम कार्यक्रम में भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरि प्रताप सिंह राठोड़,बी डी सी महासंघ के जिला अध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह एवं अन्य सहयोगियों राम रतन सिंह पटेल, शमसुल हसन, रामगोपाल,एम एच कादरी, अखिलेश सिंह,असद अहमद, नारद सिंह, राम-लखन, महेश चंद्र, नेत्रपाल, कृष्ण गोपाल,अभय माहेश्वरी,आर्येन्द्र पाल सिंह, सतेन्द्र सिंह,सी एल वर्मा एडवोकेट, वेदपाल सिंह, वीरपाल, राजीव कुमार, सुरेश पाल सिंह, आदि का भी योगदान रहा।

Saturday, 23 May 2020

पंचायत राज व्यवस्था में सुधारों से ही सुदृढ़ होगा गांव।

सेवा में

माननीय मुख्यमंत्री महोदय
उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ।

महोदय,

इस वर्ष प्रदेश में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान आपदाकाल में ग्रामों से बढ़े स्तर पर पलायन की समस्या मुखर है।ग्राम स्तर पर आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ ग्रामीण पलायन को विवश होते हैं। इस कारण ग्राम इकाई को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके तथा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकें।

ग्राम इकाई के दुर्बल होने का सबसे बड़ा कारण है कि विकास खंड इकाई को निष्क्रिय कर दिया गया। तहसील, जनपद,मन्डल व प्रदेश स्तर पर किसी भी विभाग में अधिकारियों के पद रिक्त नहीं है, किन्तु विकास खंड व ग्राम इस समस्या से जूझ रहे हैं, वहां न तो अधिकारी ही है और न ही कर्मचारी।आदेश देने वालों की संख्या क्रियान्यवयन करने/ कराने वालों से अधिक है,इस कारण शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से नागरिक लाभान्वित नहीं हो पाते हैं परिणाम स्वरूप योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो जाती है, बहुत सी योजनाओं का तब पता चलता है जब घोटाले खुलते हैं।

शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिक लाभान्वित हो सकें इस हेतु पंचायत राज व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

अस्तु हम आपसे मांग करते हैं कि पंचायत चुनाव से पूर्व निम्न उपाय किए जाने की कृपा करें :-

१- कस्बे का स्वरूप लें चुकी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए।
२- पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर हर  राजस्व ग्राम को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जावे।
३-दस से पन्द्रह ग्राम पंचायतों को मिलाकर न्याय पंचायत का गठन हो।
४- प्रधान पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट व ग्राम पंचायत सदस्य हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल निर्धारित हो।
५- क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक निर्धारित हो।
६- क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पदेन सदस्य हों, इस सम्बन्ध में पंचायत राज अधिनियम व क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम में संशोधन हो।
७- ग्राम पंचायतों  के वास्तविक निवासियों को ही पंचायत चुनाव में मताधिकार प्राप्त हो तथा कृत्रिम निवासियों को मताधिकार से वन्चित कर वहां मताधिकार दिया जावे जहां वह वास्तविक रूप से निवास कर रहे हैं। 
८- पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों के अनुपात में ही ग्राम विकास विभाग व पंचायत राज विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति हो।
९- प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सचिवालय की स्थापना करके ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम राजस्व अधिकारी ( लेखपाल ) की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जावे।
१०- पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैयार कराये जावे।
११- राजस्व सन्हिता में वर्णित व्यवस्था अनुसार ग्राम राजस्व समिति का गठन किया जावे।
१२- गांव में स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र को सक्रिय कर स्वास्थय मित्र की नियुक्ति की जावे।
१३- न्याय पंचायत मुख्यालय पर उप मन्डी समितियों तथा विकास खंड मुख्यालयों पर मन्डी समितियों की स्थापना हो।
१४- बढ़ती हुई जनसंख्या के दृष्टिगत विकास खंडों का पुनर्गठन करके प्रत्येक विकासखण्ड में खन्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी,अवर अभियंता,खन्ड शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य रूप से नियुक्ति हो।
१५- प्राथमिक विद्यालयों में कक्षावार व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जावे, राजकीय व अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद शीघ्र भरे जावे ताकि ग्रामीण निजी विद्यालयों के शोषण का शिकार न हो।

भवदीय
हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान
9536162424