Wednesday, 27 May 2020

चुनावों से पहले पंचायत कानून में बड़े सुधारों की जरूरत।

पंचायत प्रतिनिधियों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हो निर्धारित।

राजस्व ग्राम को मिले ग्राम पंचायत का दर्जा।

हर ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत अधिकारी और लेखपाल की हो नियुक्ति । 

इस वर्ष प्रदेश में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान आपदाकाल में ग्रामों से बढ़े स्तर पर पलायन की समस्या मुखर है।ग्राम स्तर पर आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ ग्रामीण पलायन को विवश होते हैं। इस कारण ग्राम इकाई को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके तथा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकें। ग्राम इकाई के दुर्बल होने का सबसे बड़ा कारण है कि विकास खंड इकाई को निष्क्रिय है। तहसील, जनपद,मन्डल व प्रदेश स्तर पर किसी भी विभाग में अधिकारियों के पद रिक्त नहीं है, किन्तु विकास खंड व ग्राम इस समस्या से जूझ रहे हैं, वहां न तो अधिकारी ही है और न ही कर्मचारी।आदेश देने वालों की संख्या क्रियान्यवयन करने/ कराने वालों से अधिक है,इस कारण शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से नागरिक लाभान्वित नहीं हो पाते हैं परिणाम स्वरूप योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो जाती है, बहुत सी योजनाओं का तब पता चलता है जब घोटाले खुलते हैं।शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिक लाभान्वित हो सकें इस हेतु पंचायत राज व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

 कस्बे का स्वरूप लें चुकी विकसित ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर हर  राजस्व ग्राम को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जावे। दस से पन्द्रह ग्राम पंचायतों को मिलाकर न्याय पंचायत का गठन हो। प्रधान पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट व ग्राम पंचायत सदस्य हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल निर्धारित हो।क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक निर्धारित हो। क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पदेन सदस्य हों, इस सम्बन्ध में पंचायत राज अधिनियम व क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम में संशोधन हो। ग्राम पंचायतों  के वास्तविक निवासियों को ही पंचायत चुनाव में मताधिकार प्राप्त हो तथा कृत्रिम निवासियों को मताधिकार से वन्चित कर वहां मताधिकार दिया जावे जहां वह वास्तविक रूप से निवास कर रहे हैं। पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों के अनुपात में ही ग्राम विकास विभाग व पंचायत राज विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति हो।

 प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सचिवालय की स्थापना करके ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम राजस्व अधिकारी ( लेखपाल ) की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जावे। पंचायत राज नियमावली के नियम 63 में वर्णित अभिलेख प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैयार कराये जावे। राजस्व सन्हिता में वर्णित व्यवस्था अनुसार ग्राम राजस्व समिति का गठन किया जावे। गांव में स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र को सक्रिय कर स्वास्थय मित्र की नियुक्ति की जावे। न्याय पंचायत मुख्यालय पर उप मन्डी समितियों तथा विकास खंड मुख्यालयों पर मन्डी समितियों की स्थापना हो।बढ़ती हुई जनसंख्या के दृष्टिगत विकास खंडों का पुनर्गठन करके प्रत्येक विकासखण्ड में खन्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी,अवर अभियंता,खन्ड शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य रूप से नियुक्ति हो। प्राथमिक विद्यालयों में कक्षावार व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जावे, राजकीय व अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद शीघ्र भरे जावे ताकि ग्रामीण निजी विद्यालयों के शोषण का शिकार न हो।वर्तमान प्रधानो ,ब्लाक प्रमुखों व जिला पंचायत अध्यक्षों की परिसम्पतियों की जांच उनके द्वारा नामांकन के समय प्रस्तुत किए गए विवरण के आधार पर कराये जाने हेतु एक जांच एजेंसी अधिकृत की जावे।

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