शस्त्र महत्वपूर्ण है या शास्त्र, हमें प्राथमिकताएं तो तय करनी ही पड़ेगी।
भारत के नागरिकों की प्राथमिकता देखिए :
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29 जुलाई को देश में दो घटनाएं घटित हुई :
प्रथम :-
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राफेल का भारत में आगमन, हर न्यूज़ चैनल पर राफेल की चर्चा, कौन कौन पायलट राफेल को लेकर आये इसकी चर्चा, और अन्य अनेकानेक चर्चाये।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ ही सोशल मीडिया पर भी राफेल छाया रहा।
द्वितीय :-
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नयी शिक्षा नीति को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को ही मन्जूरी दी।यह घटना राफेल से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। किन्तु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर नयी शिक्षा नीति को लेकर कोई क्रिया- प्रतिक्रिया,निन्दा- प्रशन्सा,हर्ष- विषाद कुछ भी व्यक्त नहीं किया गया।
इसके पीछे यह भी कारण हो सकता है कि कई सौ पृष्ठ का अध्ययन कौन करें,या फिर हममें इतनी समझ विकसित नहीं हो पाई है कि हम नयी शिक्षा नीति के इतने भारी भरकम ड्राफ्ट को समझ सके।
# मीडिया को भी दोष नहीं दिया जा सकता है। क्योंकि उसे तो इस देश के नागरिकों का टेस्ट भली-भांति ज्ञात है।
नयी शिक्षा नीति पर नागरिकों का उत्साहित न होना मुझे अच्छा नहीं लगा। प्राथमिकताएं तो निर्धारित करनी पड़ेगी कि हम शस्त्र और शास्त्र में से किसे महत्व देते हैं। स्मरण रहे कि अनेक प्राचीन, मध्ययुगीन व आधुनिक विद्वानों ने शास्त्रों को ही श्रेष्ठ माना है।
हरि प्रताप सिंह राठोड़
अधिवक्ता
मुख्य प्रवर्तक
भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान