Sunday, 8 November 2020

क्षत्रिय महासभा की तहसील स्तरीय बैठक आयोजित।

क्षत्रिय महासभा की तहसील स्तरीय बैठक आयोजित।
रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा स्थापना कार्य में प्रत्येक व्यक्ति का मिले योगदान।

पंचायत चुनाव में क्षत्रिय प्राधिनिधित्व बढ़ाने पर दिया जोर।

क्षत्रिय महासभा बदायूँ की तहसील बिसौली की तहसील स्तरीय बैठक नत्थूलाल सेवक इण्टर कालेज वजीरगंज में तहसील अध्यक्ष विपिन कुमार सिंह एवं कैलाश सिंह गौर के संयोजन में महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी धनपाल सिंह की अध्यक्षता मे आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू भैया तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका परिषद बदायूँ अध्यक्ष दीपमाला गोयल, क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह , मण्डल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह प्रधान, मण्डल संगठन मंत्री विजय पाल सिंह भदौरिया उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में महासभा के सांगठनिक कार्यों की समीक्षा की गई तथा समाज हित में जनपद मुख्यालय पर बहुउद्देश्यीय भवन का निर्माण किये जाने, रानी लक्ष्मीबाई चौक पर प्रतिमा स्थापित करने, पंचायत चुनाव में गरीब सवर्णों को आरक्षण दिये जाने, पंचायतों में क्षत्रिय प्राधिनिधित्व बढ़ाने की योजना बनायी गयी।

मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू भैया ने कहा कि क्षत्रिय महासभा बदायूँ समाज के शैक्षिक सामाजिक और आर्थिक उन्नयन हेतु  सतत प्रयासरत है।सामाजिक मुद्दों पर महासभा मजबूती के साथ अपना पक्ष रखती है।आपदा काल में भी महासभा ने उल्लेखनीय सेवा व सहायता कार्य किए हैं। जिला मुख्यालय पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराने के बाद महासभा मण्डल मुख्यालय बरेली पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराने का कार्य कर रही है। जिला मुख्यालय पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापना में समाज का पूरा योगदान रहे। वीरांगना चौक को भव्य बनाने हेतु हर सम्भव प्रयास किए जाएंगे।

रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा स्थापना समिति के अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने कहा कि क्षत्रिय महासभा बदायूँ की टीम प्रदेश की सबसे सक्रिय टीम है।बदायूं की टीम ने अनेक उपलब्धि हासिल की है। जिला मुख्यालय पर रानी लक्ष्मीबाई चौक पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापना हेतु निर्माण कार्य समाज के सहयोग से आरंभ हो गया है। जनपद भर से आर्थिक सहयोग इस पुण्य कार्य में आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि अध्यक्ष नगरपालिका परिषद बदायूँ दीपमाला गोयल ने कहा कि वीरांगना चौक भव्यतम चौक बनेगा। इस कार्य में नगरपालिका की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में पत्रकार व समाजसेवी बलभद्र सिंह की माँ एवं जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार मुन्ने सिंह आँचल के निधन पर सामुहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


कार्यक्रम में क्षत्रिय महासभा के मंडल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, मंडल संगठन मंत्री विजय पाल सिंह भदौरिया, विहिप के सह प्रान्त मंत्री जगपाल सिंह, क्षत्रिय महासभा बदायूँ के जिला संयोजक मुनीश कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष जगमोहन सिंह , जिला महासचिव वेदपाल सिंह कठेरिया, सैनिक सभा के संरक्षक विजय रतन सिंह, जिला उपाध्यक्ष सैनिक सभा सतेन्द्र पाल सिंह, महिला सभा की जिला अध्यक्ष करुणा सोलंकी,  महासचिव सरिता सिंह, जिला सचिव रजनी सिंह, जिला सचिव व्यापार सभा रिद्ध प्रताप सिंह , जिला सचिव अखिलेश चौहान, जिला अध्यक्ष सैनिक सभा रतन वीर सिंह ने विचार व्यक्त किए ।


कार्यक्रम में सौरभ सिंह, हेमेंद्र प्रताप सिंह, ताले वर सिंह, राघव सिंह, अमित कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, भानु प्रताप सिंह, वीरेंद्र सिंह, अनिल कुमार सिंह, संजीव सिंह, रोहित सिंह, आशीष चौहान, महेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, राजकुमार सिंह, हरिओम सिंह, मनोज कुमार सिंह, अशोक सिंह, ओमवीर सिंह, संजीव सिंह, सतेंद्र सिंह, शेरबहादुर सिंह, अंकित सिंह, विनोद सिंह आदि उपस्थित रहे। 


कार्यक्रम का सफल संचालन जिला संगठन मंत्री भूराज सिंह राजलायर एवं कवि अखिलेश सिंह ने किया तथा कार्यक्रम संयोजक तहसील अध्यक्ष विपिन कुमार सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Monday, 19 October 2020

रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापना हेतु वीरांगना चौक पर हुआ भूमि पूजन।

रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापना हेतु हुआ भूमि पूजन।

वीरांगना चौक पर लगेगी प्रदेश की सबसे भव्य प्रतिमा ।

रानी लक्ष्मीबाई द्वारा सृजित मार्ग पर चलने से होगा नारी सशक्तिकरण।

रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा स्थापना समिति ( सम्बद्ध: क्षत्रिय महासभा बदायूँ ) के तत्वावधान में वीरांगना चौक बदायूँ पर भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।   

सर्वप्रथम नगर विकास राज्य मंत्री महेश चंद्र गुप्ता, सांसद बदायूँ डॉ संघ मित्रा मौर्या, विधायक बिसौली कुशाग्र सागर, जिलाधिकारी बदायूँ कुमार प्रशांत, मुख्य विकास अधिकारी निशा अनंत,  अध्यक्ष नगरपालिका परिषद बदायूँ दीपमाला गोयल ने प्रभु राम व रानी लक्ष्मीबाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पार्चन किया। तदंतर आचार्य प्रताप सिंह द्वारा यज्ञ सम्पन्न कराकर शिला पूजन कराया गया। यज्ञ के पश्चात अतिथि गण द्वारा प्रतिमा स्थल पर आधारशिला रखी गई ।

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए नगर विकास राज्य मंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि नवरात्रि पर्व के समय वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित करने हेतु भूमि पूजन किया गया है। वीरांगना चौक पर रानी लक्ष्मीबाई की ऐसी प्रतिमा स्थापित हो जो उत्तर प्रदेश की सबसे भव्य प्रतिमा हो। वीरांगना चौक पर प्रतिमा स्थापना के पवित्र कार्य में समिति जो भी उनसे अपेक्षा करेगी उसे पूरा करने का भरसक प्रयास करेगे। महापुरुषों के स्मारक निर्मित होने से समाज में चेतना उत्पन्न होती है। 

सांसद बदायूँ डॉ संघ मित्रा मौर्य ने कहा कि वीरांगना वीरांगना चौक रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस ,शौर्य और राष्ट्र भक्ति का प्रेरणा स्थल बनेगा । इस समय सम्पूर्ण विश्व में नारी शक्ति की उपासना चल रही है, ऐसे समय में हम सबको श्रेष्ठ आचरण, नारी के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने का संकल्प लेना चाहिए। समस्त नारी शक्ति को रानी लक्ष्मीबाई के गुणों को आत्मसात करने की जरूरत है।आज नारी पृथ्वी से लेकर अम्बर तक हर जगह महत्वपूर्ण भूमिका में है। 

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष भाजपा अशोक भारतीय, विधायक बिसौली कुशाग्र सागर, मुख्य विकास अधिकारी निशा अनंत , डॉ सुशील कुमार सिंह, आलोक सिंह संघर्षी, विजय पाल सिंह भदौरिया, राकेश सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।

यज्ञ आचार्य प्रताप सिंह, रूप किशोर सिंह, नर सिंह द्वारा संपन्न कराया गया।

अंत में प्रतिमा स्थापना समिति के अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन समिति के महासचिव हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने किया।

कार्यक्रम में प्रमुख़ रूप से हरीश शाक्य,विनय कुमार सिंह, रबिन्द्र पाल सिंह,  सत्यवीर सिंह, राजेश्वर सिंह पटेल, अमर सिंह, सतेन्द्रसिंह, मुनेंद्र प्रताप सिंह, अभय प्रताप सिंह, विजय रतन सिंह, रतन वीर सिंह, डाल भगवान सिंह, विनोद गुप्ता, मनोज जौहरी,सुधीर श्रीवास्तव, धीरज सक्सेना, मुनीश कुमार सिंह, जगपाल सिंह, दिनेश सिंह, गिरीश पाल सिंह, करुणा सोलंकी, रजनी सिंह,सीमा चौहान, रानी सिंह पुंडीर, सीमा राठौर, धर्मेंद्र सिंह प्रधान, विपिन कुमार सिंह, राजपाल सिंह, जितेंद्र सिंह, अवनीश सोलंकी, गोपाली सिंह, वेदपाल सिंह, अखिलेश चौहान, दिनेश सिंह एडवोकेट, सौरभ प्रताप सिंह, कैप्टन राम सिंह, राम प्रताप सिंह, शिशुपाल सिंह, टीकम सिंह, आर्येन्दर पाल सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, भवेश प्रताप सिंह, विजयभान सिंह, मनोज कुमार सिंह, अवधेश सिंह, मोहित सिंह, धनपाल सिंह एम एच कादरी, तीर्थेन्द्र पटेल, सरिता चौहान, भूराज सिंह, शेर बहादुर सिंह, षत्वदन शंखधार, जयकिशन लाल शर्मा, सुरेश पाल सिंह, उमेश कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

Friday, 25 September 2020

क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया।

सर्वग्राही, सर्वस्पर्शी व सर्व स्वीकार्य बने क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता।

रानी लक्ष्मीबाई चौक बदायूं पर शीघ्र स्थापित होगी प्रतिमा।

पंचायत चुनाव में गरीब सवर्णों को मिले दस प्रतिशत आरक्षण।

क्षत्रिय उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओंको रोकने हेतु होगा आंदोलन।


क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर जिला बदायूँ इकाई द्वारा म्याऊ बाजार में कार्यक्रम का आयोजन प्रतिष्ठित व्यवसायी रविंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में युवा समाजसेवी अभय प्रताप सिंह के संयोजन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में मण्डल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह प्रधान, मण्डल संगठन मंत्री विजय पाल सिंह भदौरिया उपस्थितरहे।मुख्य वक्ता के रूप में महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठौड़ एडवोकेट का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में महासभा के सांगठनिक कार्यों की समीक्षा की गई तथा समाज हित में जनपद मुख्यालय पर बहुउद्देश्यीय भवन का निर्माण किये जाने, रानी लक्ष्मीबाई चौक पर प्रतिमा स्थापित करने, पंचायत चुनाव में गरीब सवर्णों को आरक्षण दिये जाने, क्षत्रिय उत्पीड़न की घटनाओं में कार्यवाही करने हेतु प्रस्ताव पारित किए गए।

मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने कहा कि क्षत्रिय महासभा बदायूँ जनपद का सर्वाधिक सक्रिय संगठन है।समाज के शैक्षिक सामाजिक और आर्थिक उन्नयन हेतु महासभा सतत प्रयासरत है।सामाजिक मुद्दों पर महासभा मजबूती के साथ अपना पक्ष रखती है।आपदा काल में भी महासभा ने उल्लेखनीय सेवा व सहायता कार्य किए हैं। जिला मुख्यालय पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराने के बाद महासभा मण्डल मुख्यालय बरेली पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराने का कार्य कर रही है।जनपद के सभी ब्लॉक, तहसील, नगर में महासभा की इकाई है, जनपद में सक्रिय व समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर महासभा को बड़ी उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं।ऐसे में महासभा के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की जिम्मेदारी औऱ बढ़ गई हैं।सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी समाज में स्वयं को सर्वग्राही, सर्वस्पर्शी व सर्व स्वीकार्य बनाये ताकि समाज का विश्वास संगठन को प्राप्त हो सके।

मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए क्षत्रिय महासभा के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि क्षत्रिय महासभा बदायूँ की टीम प्रदेश की सबसे सक्रिय टीम है।बदायूं की टीम ने अनेक उपलब्धि हासिल की है।महासभा को जिला मुख्यालय पर बहुउद्देश्यीय क्षत्रिय भवन का निर्माण कार्य करना है, रानी लक्ष्मीबाई चौक पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित करानी है।क्षत्रिय उत्पीड़न की बढ़ती घटनाएं चिन्ता का विषय है।उत्पीड़न रोकने हेतु हमे संघर्ष करने के लिए तैयार रहना चाहिए।क्षत्रिय उत्पीड़न हम स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को नौकरियों में, शिक्षा में दस प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।क्षत्रिय महासभा की मांग है कि यह आरक्षण पंचायत, स्थानीय निकाय एवं सहकारी संस्थाओं में भी मिलना चाहिए।साथ ही आयु सीमा में भी छूट मिलनी चाहिये।गरीब सवर्ण का प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाये जाने की व्यवस्था होनी चाहिये तथा प्रमाण पत्र की अवधि तीन वर्ष होनी चाहिए। क्षत्रिय युवा महापुरुषों के जीवन से संबंधित पुस्तकें पड़कर उनकी शिक्षा को अपने जीवन में उतारे तथा समाज का कार्य करने हेतु महासभा के सहयोगी बने।


कार्यक्रम के अंत में महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठौड़ की मां, जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह तोमर की मां, जिला महासचिव देवी सिंह देवड़ा के भाई, जिला सचिव दिनेश सिंह एडवोकेट के पिताजी, इस्लामनगर ब्लॉक प्रमुख के इकलौते पुत्र, पूर्व जिला पंचायत सदस्य गिरीश पाल सिंह के युवा पुत्र तथा अधिवक्ता सभा के पूर्व अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह के पिताजी के निधन पर सामुहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


कार्यक्रम में क्षत्रिय महासभा के मंडल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, मंडल संगठन मंत्री विजय पाल सिंह भदौरिया, वरिष्ठ ट्रस्टी धनपाल सिंह, टीकम सिंह, विहिप के सह प्रान्त मंत्री जगपाल सिंह, क्षत्रिय महासभा बदायूँ के संरक्षक राणा प्रताप सिंह ,जिला संयोजक मुनीश कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष गिरीश पाल सिंह सिशोदिया, जिला महासचिव वेदपाल सिंह कठेरिया, सैनिक सभा के संरक्षक विजय रतन सिंह, जिला उपाध्यक्ष सैनिक सभा सतेन्द्र पाल सिंह, महिला सभा की जिला महासचिव सरिता सिंह, जिला सचिव रजनी सिंह, जिला अध्यक्ष कृषक सभा मनोज कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष व्यापार सभा अभिषेक सिंह, तहसील अध्यक्ष बिसौली विपिन कुमार सिंह, तहसील अध्यक्ष सहसवान आर्येन्दर पाल सिंह, तहसील अध्यक्ष दातागंज राजपाल सिंह, नगर अध्यक्ष बदायूँ डाल भगवान सिंह, बलभद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में नगरपालिका परिषद बदायूँ अध्यक्ष दीपमाला सिंह, दातागंज विधायक पुत्र अतेंद्र विक्रम सिंह, राष्ट्रवादी पार्टी के नेता अंकित सिंह पूर्व चेयरमैन उसावां मुन्ना सिंह विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे।


कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मृदुला सिंह, रानी सिंह पुंडीर, जगमोहन सिंह राघव, गोपाली सिंह, राजीव कुमार सिंह, अवनीश कुमार सिंह, भवेश प्रताप सिंह, रामनरेश सिंह, करन प्रताप सिंह, रामबहादुर सिंह, शेर बहादुर सिंह, प्रदीप चौहान, सूर्य प्रताप सिंह, धीरेंद्र कुमार सिंह, संजय सिंह, विमल कुमार सिंह, सुरजीत सिंह, कुलदीप सिंह, मदनपाल सिंह, विवेक चंदेल, करुणेश कुमार सिंह, सौरभ सिंह, श्याम कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, अशोक तोमर, नरेंद्र पाल सिंह, अमित सिंह, सत्यभान सिंह, आरेश प्रताप सिंह, श्यामबीर सिंह, रामेन्द्र सिंह, दिनेश सिंह, शोभित कुमार सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, नारद सिंह, विनय प्रताप सिंह, कृष्ण पाल सिंह आदि उपस्थित रहे। 


कार्यक्रम का सफल संचालन जिला संगठन मंत्री भूराज सिंह राजलायर ने किया तथा कार्यक्रम संयोजक युवा व्यवसायी व समाजसेवी अभय प्रताप सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Monday, 31 August 2020

आंकड़ों का महाखेल - वृक्षारोपण ( पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार ।)

3. वन-विभाग (अंतिम भाग 5- अगस्त 29 की पोस्ट के आगे)

आंकड़ों का महाखेल- वृक्षारोपण 

         वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण शासन का वार्षिक कार्यक्रम है। इमरजेंसी में संजय गांधी द्वारा चलाये गये वृक्षारोपण अभियान के पश्चात हर वर्ष बिला नागा प्रत्येक जनपद में लाखों वृक्ष लगाये जाते हैं- कुछ ज़मीन पर और ज़्यादा काग़ज़ पर। पर दोनो में एक बात कामन होती है – वृक्षों को पानी किसी में नहीं दिया जाता है जिससे ज़मीन पर लगाये वृक्ष सूख जायें और अगले वर्ष वृक्षारोपण हेतु ज़मीन उपलब्ध रहे, तथा कागज़ पर लगाये गये वृक्षों का आंकड़ा कभी भी निरीक्षण हेतु यथावत कड़क रहे। इससे पिछले वर्षों में अरबों पेड़ ‘लग जाने’ के बाद भी पेड़ लगाने हेतु भूमि वर्षानुवर्ष यथापूर्व खाली मिल जाती है। वृक्षारोपण कार्यक्रम वन विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग के लिये हर वर्ष एक उत्सव जैसा होता है क्योंकि इसमें रोपित दिखाये गये वृक्षों के सीधे अनुपात में सम्बंधित अधिकारियों पर लक्ष्मी कृपालु होतीं हैं। वर्ष 2010 से वृक्षारोपण के आंकड़ों में एक महाखेल और प्रारम्भ हुआ है। उस वर्ष वन विभाग को 5 करोड़ वृक्ष लगाये जाने का टार्गेट दिया गया था। इस हेतु ज़मीन हो न हो और इतने पौधे हों न हों, टार्गेट को पूरा होना था, सो हुआ। उसकी पूर्ति की रिपोर्ट शासन में पहुंचते ही देश-विदेश के समाचार पत्रों में हंगामा मच गया कि उत्तर प्रदेश के वन-विभाग ने एक बरसात में 5 करोड़ वृक्ष लगाकर विश्व रिकार्ड कायम किया है। उ. प्र. के अधिकारियों को लंदन में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल गया। तब से रिकार्ड तोड़ने की होड़ लग गई है और प्रति वर्ष यह रिकार्ड टूट रहा है। इस वर्ष तो एक दिन में ही 25 करोड़ वृक्ष लग जाने का समाचार छपा है। मैं आशा कर रहा हूं कि इतने महान कार्य पर तो अंतर्राष्ट्रीय के बजाय कोई अंतर्ग्रहीय पुरस्कार मिलना चाहिये।          
                 इतनी महती सफलता की बात पढ़कर मेरा मन रोमांचित हुआ था। जब मैं रोमांचित होता हूं तो मेरा गणित का पुराना शौक जाग जाता है। मैने हिसाब लगाया कि उत्तर प्रदेश में कुल 58909 ग्राम पंचायत हैं। सुविधा हेतु इस संख्या को 60000 मान लिया जाये, तो वृक्षारोपण अभियान के दिन प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में यदि 4000 वृक्ष लगाये गये हों, तो 24 करोड़ लग पायेंगे। शेष 1 करोड़ छोटे-बड़े नगरों में लगाया जाना मान लेता हूं। मैने अपने ग्राम एवं अन्य आस-पास के गावों में लगाये गए वृक्षों के विषय में पूछताछ की, तो किसी गांव में सौ-पचास वृक्ष से अधिक लगाये जाने की पुष्टि नहीं हुई। अब आगे मुझे हिसाब बताने की आवश्यकता नहीं है कि कितने वृक्ष ज़मीन पर लगे होंगे और कितने कागज़ पर। 
                वृक्षारोपण के आंकड़ों का यह महाखेल तो साल-दर-साल चलता है। कभी कोई यह नहीं पूछता है कि गत वर्षों के वृक्ष किस ज़मीन पर लगते रहे हैं और हर वर्ष कहां ज़मीदोज़ हो जाते रहे हैं। नये लगाये जाने वाले वृक्षों की संख्या बढ़ाने के बजाय यदि प्रशासन पहले लगाये गये वृक्षों को जीवित रखने पर ज़ोर दे, तो वनाच्छादित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है। परंतु यह कार्य कोई क्यों करे जब कि यह कार्य दुरूह है, त्वरित लक्ष्मी-कृपा का साधन नहीं है और इस कार्य में अंतर्राष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की सम्भावना नगण्य है।

Friday, 28 August 2020

आंकड़ों का खेल (पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार।)

आंकड़ों का खेल- (भाग 4- अगस्त 27 की पोस्ट स आगे)

सामान्य  प्रशासन विभाग-

ब. मेलों में ‘पुण्यार्जन’  
 
            यह सर्वविदित है कि मेले और विशेषकर कुम्भ जनसामान्य के लिये बड़े पुण्यार्जन के अवसर होते हैं।  जिस प्रकार ईसाइयों द्वारा संडे को चर्च जाकर पादरी के समक्ष पिछले सप्ताह भर के पापों को स्वीकार लेने पर हफ़्ते भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार हिंदुओं के पिछले सभी पाप मेलों के अवसर पर गंगा मैया में स्नान करने से धुल जाते  हैं। परंतु यह बात सर्वविदित नहीं है कि कतिपय विभागों के कर्मियों (मुख्यतः सामान्य प्रशासन विभाग के)  के लिये ये मेले   पुण्यार्जन से कहीं अधिक नोटार्जन के अवसर होते हैं। चूंकि अर्जित नोटों का परिमाण उतना ही बड़ा होता है जितना मेला प्रबंध पर हुआ व्यय काग़ज़ों पर दिखाया जाता है, अत: प्रशासन को 'मजबूरन' आने वाले यात्रियों के आंकड़े दस-बीस गुना बढ़ाकर दिखाने पड़ते हैं।   

              वर्ष 1974 में हरिद्वार में कुम्भ मेला आयोजित था। तब मैं पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर नियुक्त था। यद्यपि हरिद्वार उस समय जनपद सहारनपुर का अंग था, तथापि कुम्भ मेला क्षेत्र को अलग जनपद घोषित कर दिया गया था और उसके लिये अलग एक अनुभवी पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की गई थी। जहां तक मुझे याद है मेला के उपरांत डी. एम./एस. पी., कुम्भ मेला ने लगभग 12 लाख यात्रियों के आने की सूचना शासन को भेजी थी। उस वायरलेस की प्रतिलिपि जब मुझे प्राप्त हुई, तब मेरा गणित का विद्यार्थी जीवन का शौक जाग गया था। मैने हरिद्वार आने वाली समस्त ट्रेनो, बसों, स्पेशल बसों, कारों, स्कूटरों, रिक्शों, बुग्गियों में और पैदल आने वाले यात्रियों का खूब बढ़ा चढ़ा कर योग लगाया, तो भी आंकड़ा किसी प्रकार दो लाख से आगे नहीं बढ़ सका था। एस. पी, कुम्भ मेला से मुलाकात होने पर मैने अनौपचारिक ढंग से यह विषय छेड़ा, तो अनुभवी एस. पी. बोले,

              “यह अनुमान केवल मेरा नहीं होता है, समस्त मेला प्रशासन का होता है। प्रशासन ने 10 लाख यात्रियों की व्यवस्था हेतु बजट स्वीकृत कराया था और पूरे का खर्च दिखाया है। अब दस लाख से कम यात्रियों का अनुमान कैसे दिया जा सकता है? यात्रियों का आंकड़ा अधिक होने पर प्रदेश शासन को प्रशंसा मिलेगी और भविष्य में केंद्र से अधिक अनुदान मांगने का अवसर भी।“

            अपने आगे के सेवाकाल में मैने अनुभव किया कि अनुभवी एस. पी. की बात में बड़ा दम था। तभी प्रत्येक आने वाले कुम्भ मेले में यात्रियों की संख्या का आंकड़ा ऐसी लम्बी छलांगें लगाता रहा है जैसी शेर द्वारा पीछा किये जाने पर हिरन छलांग लगाता है। मैने समाचार पढ़ा है कि वर्ष 2021 में  हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेला के लिये प्रशासन ने 12 करोड़ यात्रियों के आने का अनुमान दिया है। मैं जानता हूं कि मेले के अंत में प्रशासन का आंकड़ा इसके ऊपर ही जायेगा, जिसकी परिणति इसे मानव इतिहास में विश्व का सबसे बड़ा मेला घोषित होने,  शासन की विश्व भर में वाहवाही होने और अनेक व्यक्त्तियों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो जाने में होगी। 

                          पर मैं अपने गणित के पुराने शौक के लिये क्या करूं? वह जागृत हो गया है और मैने हिसाब लगाया है कि  भारत की आबादी लगभग 132 करोड़ है और उसका 1/11 वां भाग होता है 12 करोड़। इसका अर्थ हुआ कि मेरे 2200 आबादी वाले गांव से औसतन 200  (2200/11) लोग कुम्भ स्नान हेतु जाने चाहिये। मैने गांव से पता लगाया तो पाया कि पिछले वाले कुम्भ में तो 20 भी नहीं गये थे; मैं अचम्भित हूं कि इस बार एकदम भक्तिभाव में दस-बारह गुना वृद्धि कैसे हो जायेगी जो 200 चले जायेंगे?

                                                                                -क्रमशः

Thursday, 27 August 2020

अपराध: कानून व्यवस्था, लोक व्यवस्था । ( पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की फेसबुक वॉल से साभार।)

*अपराध* - *कानून व्यवस्था* - *लोक व्यवस्था*
हमारे बहुत से मित्र, जिनमें पत्रकार मित्र भी शामिल हैं, अपराध स्थिति, लोक व्यवस्था और कानून व्यवस्था के बीच भ्रमित रहते हैं। अतः मैंने इसे सामाजिक, पुलिसिंग और विधिक दृष्टिकोण से स्पष्ट करना जरूरी समझा।

अपराध स्थिति (Crime control)- जब कोई अपराध एकल रूप से घटित होता है तो वह शुद्ध आपराधिक मामला होता है। अगर पेशेवर अपराधी बहुतायत में अपराध करें या पहले से स्थिति ज्ञात होने पर भी पुलिस कार्यवाही न करे या अधिकांश अज्ञात अपराध न खुल पायें, तो यह कहा जा सकता है कि उस क्षेत्र में अपराध स्थिति ठीक नहीं है और अपराध नियंत्रण में नहीं हैं। किन्तु इस आधार पर यह कहना गलत होगा कि उस क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है या अनियंत्रित है।

कानून व्यवस्था (Law and Order)- इसके अन्तर्गत बलवा, दंगा, रोड जाम करना, सार्वजनिक स्थान पर हत्या/हमला, तोडफ़ोड़, किसी संस्थान/कार्यालय पर हमला, लोकसेवकों/व्यापारियों/व्यवसायियों से धन वसूली इत्यादि घटनाओं का अधिक होना और/या सख्त कार्यवाही न होना खराब कानून व्यवस्था का द्योतक है।

लोक व्यवस्था- जब अपराध या कानून व्यवस्था की ऐसी घटनाएं हों जिनसे समाज में भय और आतंक व्याप्त हो जाये या समाज का आम जीवनढर्रा (even tempo of life in society) अव्यवस्थित हो जाये तो ऐसी घटनाएं लोक व्यवस्था की घटनाएं कही जाती हैं। उदाहरण के लिए- कुछ अपराधी भीड़भाड़ वाले स्थान/बाजार में हत्या करते हैं और धमकी तथा चेतावनी देते हैं कि जो कोई इस केस में गवाही देगा या उनके आपराधिक कृत्यों में बाधक बनेगा, उसका यही हाल होगा। 
यदि किसी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं नियंत्रित न हो पायें और सख्त वैधानिक कार्यवाही न की जाये तो यह मत बनता है कि उस क्षेत्र में लोक व्यवस्था नियंत्रण से बाहर हो गई है।

उम्मीद है कि इस व्याख्या से सही स्थिति और मापदंडों को समझने में सहायता मिलेगी।

नौकरशाही के भ्रष्टाचार और अन्याय पूर्ण कार्य और राजनैतिक दबाव।( पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की फेसबुक वॉल से साभार।)

नौकरशाह कहते हैं कि बड़ा टेंशन है, बड़ा प्रेशर है, पर तैनाती जिले में ही चाहिये। अब तो वरिष्ठ सरकारी अधिकारी खुलकर कहते हैं कि मंत्री जी का या फलां फलां का दबाव था। वे अपने भ्रष्टाचार और अन्यायपूर्ण कार्यों के लिए राजनैतिक दबाव को सही और पर्याप्त औचित्य मानते हैं।

कथित ईमानदार अधिकारी भी राजनैतिक इशारे पर गलत काम करने या गलत रिपोर्ट बनाने को सही मानते हैं। श्री हरीशचंद्र गुप्ता, तत्कालीन कोयला सचिव इसी तरह गलत रिपोर्ट बनाने के कारण सजायाब हुये। आश्चर्य है कि नौकरशाही की पूरी लाबी उन्हें बचाने में ईमानदारी से लगी रही। आगे ऐसी अनहोनी न हो, इस उद्देश्य से नौकरशाही ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम को, जो वर्ष 1988 में सुदृढ़ प्रारूप में बनाया गया था, नख-दन्त विहीन कर दिया। दबाव और प्रलोभन में गलत रिपोर्ट बनाने और फर्मों को नाजायज लाभ पहुँचाना अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया। और भी व्यापक और विस्तृत संसोधन करके भ्रष्टाचार के लिए सजा होने के सारे रास्ते बन्द कर दिये गए।

वरिष्ठ नौकरशाहों खासकर आई.ए.एस., आई.पी.एस. और प्रथम श्रेणी की सेवाओं के अधिकारियों द्वारा दबाव या तनाव की दलीलें औचित्यरहित एवं शरारतपूर्ण हैं। इस स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को दबाव/तनाव बर्दाश्त करने ही होंगे। इस विषय पर मुझे उत्तर प्रदेश संवर्ग के वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी श्री विजय शंकर पाण्डेय का कथन याद आ रहा है। वर्ष 2011 में वरिष्ठ अधिकारियों (डी.एम./एस.पी./कमिश्नर/डी.आई.जी./आई.जी.) की बैठक में कुछ अधिकारियों द्वारा इसी तरह दबाव/तनाव की दलीलें दी गईं। इस पर श्री विजय शंकर पाण्डेय, जो उस समय अपर कैबिनेट सचिव थे, ने कहा कि-

"ये सेवाएं कमजोर कलेजे वालों के लिए नहीं हैं। जो दबाव/तनाव नहीं झेल सकते, उन्हें दूसरी नौकरी ढूंढ़ लेनी चाहिए अथवा हल्की/शांतिपूर्ण पोस्ट पकड़ लेनी चाहिए"।

मैं यह बातें पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान हमेशा बताया करता था। मैं शोले फिल्म के एक डायलॉग के जरिये भी इस बात को समझाया करता था-
 "शोले में ठाकुर जब जय और वीरू से गब्बर सिंह को पकड़ने के लिए बीस हजार रुपये की बात कहता है तो वीरू कहता है कि गब्बर कोई बकरी का बच्चा है जो दौड़े और पकड़ लिया? इस पर ठाकुर कहता है, "जानता हूँ कि काम मुश्किल है लेकिन आसान काम के इतने पैसे नहीं दिये जाते"। मै प्रशिक्षु अधिकारियों को कहा करता था कि माना कि पुलिस का काम बहुत कठिन है पर याद रखिये कि आसान काम के लिए 'थानेदार या कप्तान' नहीं लगाये जाते।

जिला मैजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को प्रदत्त कानूनी शक्तियां, संसाधन और सुविधायें एवं कार्यभार अत्यंत वृहत और व्यापक होते हैं। इसकी तुलना बड़े-बड़े पदों से भी नहीं की जा सकती है। लिहाजा ये पदाधिकारी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं कर सकते। सरकार और सरकार के माध्यम से अन्ततः जनता यह उम्मीद करती है कि ये पद धारक दृढ़तापूर्वक कार्य करेंगे।

एक बात और मैं अपने तजुर्बे से कहूंगा कि सच्चे, ईमानदार और परिश्रमी अधिकारियों का कोई उत्पीड़न नहीं होता है। अधिकतर यह होता है कि उन्हें किनारे कर दिया जाता है। ठीक है, जो काम मिला है उसे मन लगाकर करिये और चैन से रहिये। इन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को उच्च वेतन, उच्च सुविधाएं, सभी संसाधन मिलते हैं। और सबसे ऊपर, इन अधिकारियों को नागरिक,  बहुत ज्यादा सम्मान देते हैं और विश्वास करते हैं। इसके बाद जनता की यह उम्मीद न्यायपूर्ण है कि ये अधिकारी इतना सब गरीब  जनता के पैसों से पाने के बाद कुछ असुविधायें बर्दाश्त करेंगे। यह सामान्य बात है कि कई अधिकारी ये असुविधायें बर्दाश्त नहीं कर सकते। तब ऐसे अधिकारियों को चाहिए कि वे शान्तिपूर्ण पोस्टिंग लेलें।

यह लिखने का मेरा उद्देश्य यह है कि आम नागरिक और प्रबुद्धजन, नौकरशाही के इन बहानों को स्वीकार न करें। ऐसे उच्च पदाधिकारियों के ये बहाने नहीं सुने/माने जाने चाहिए। ऐसे अधिकारियों को चाहिए कि वे शान्तिपूर्ण/सुरक्षित तैनाती पकड़ लें; बहुत से पद ऐसे हैं!