Thursday, 27 August 2020

अपराध: कानून व्यवस्था, लोक व्यवस्था । ( पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की फेसबुक वॉल से साभार।)

*अपराध* - *कानून व्यवस्था* - *लोक व्यवस्था*
हमारे बहुत से मित्र, जिनमें पत्रकार मित्र भी शामिल हैं, अपराध स्थिति, लोक व्यवस्था और कानून व्यवस्था के बीच भ्रमित रहते हैं। अतः मैंने इसे सामाजिक, पुलिसिंग और विधिक दृष्टिकोण से स्पष्ट करना जरूरी समझा।

अपराध स्थिति (Crime control)- जब कोई अपराध एकल रूप से घटित होता है तो वह शुद्ध आपराधिक मामला होता है। अगर पेशेवर अपराधी बहुतायत में अपराध करें या पहले से स्थिति ज्ञात होने पर भी पुलिस कार्यवाही न करे या अधिकांश अज्ञात अपराध न खुल पायें, तो यह कहा जा सकता है कि उस क्षेत्र में अपराध स्थिति ठीक नहीं है और अपराध नियंत्रण में नहीं हैं। किन्तु इस आधार पर यह कहना गलत होगा कि उस क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है या अनियंत्रित है।

कानून व्यवस्था (Law and Order)- इसके अन्तर्गत बलवा, दंगा, रोड जाम करना, सार्वजनिक स्थान पर हत्या/हमला, तोडफ़ोड़, किसी संस्थान/कार्यालय पर हमला, लोकसेवकों/व्यापारियों/व्यवसायियों से धन वसूली इत्यादि घटनाओं का अधिक होना और/या सख्त कार्यवाही न होना खराब कानून व्यवस्था का द्योतक है।

लोक व्यवस्था- जब अपराध या कानून व्यवस्था की ऐसी घटनाएं हों जिनसे समाज में भय और आतंक व्याप्त हो जाये या समाज का आम जीवनढर्रा (even tempo of life in society) अव्यवस्थित हो जाये तो ऐसी घटनाएं लोक व्यवस्था की घटनाएं कही जाती हैं। उदाहरण के लिए- कुछ अपराधी भीड़भाड़ वाले स्थान/बाजार में हत्या करते हैं और धमकी तथा चेतावनी देते हैं कि जो कोई इस केस में गवाही देगा या उनके आपराधिक कृत्यों में बाधक बनेगा, उसका यही हाल होगा। 
यदि किसी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं नियंत्रित न हो पायें और सख्त वैधानिक कार्यवाही न की जाये तो यह मत बनता है कि उस क्षेत्र में लोक व्यवस्था नियंत्रण से बाहर हो गई है।

उम्मीद है कि इस व्याख्या से सही स्थिति और मापदंडों को समझने में सहायता मिलेगी।

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