Friday, 28 August 2020

आंकड़ों का खेल (पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी की फेसबुक वॉल से साभार।)

आंकड़ों का खेल- (भाग 4- अगस्त 27 की पोस्ट स आगे)

सामान्य  प्रशासन विभाग-

ब. मेलों में ‘पुण्यार्जन’  
 
            यह सर्वविदित है कि मेले और विशेषकर कुम्भ जनसामान्य के लिये बड़े पुण्यार्जन के अवसर होते हैं।  जिस प्रकार ईसाइयों द्वारा संडे को चर्च जाकर पादरी के समक्ष पिछले सप्ताह भर के पापों को स्वीकार लेने पर हफ़्ते भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार हिंदुओं के पिछले सभी पाप मेलों के अवसर पर गंगा मैया में स्नान करने से धुल जाते  हैं। परंतु यह बात सर्वविदित नहीं है कि कतिपय विभागों के कर्मियों (मुख्यतः सामान्य प्रशासन विभाग के)  के लिये ये मेले   पुण्यार्जन से कहीं अधिक नोटार्जन के अवसर होते हैं। चूंकि अर्जित नोटों का परिमाण उतना ही बड़ा होता है जितना मेला प्रबंध पर हुआ व्यय काग़ज़ों पर दिखाया जाता है, अत: प्रशासन को 'मजबूरन' आने वाले यात्रियों के आंकड़े दस-बीस गुना बढ़ाकर दिखाने पड़ते हैं।   

              वर्ष 1974 में हरिद्वार में कुम्भ मेला आयोजित था। तब मैं पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर नियुक्त था। यद्यपि हरिद्वार उस समय जनपद सहारनपुर का अंग था, तथापि कुम्भ मेला क्षेत्र को अलग जनपद घोषित कर दिया गया था और उसके लिये अलग एक अनुभवी पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की गई थी। जहां तक मुझे याद है मेला के उपरांत डी. एम./एस. पी., कुम्भ मेला ने लगभग 12 लाख यात्रियों के आने की सूचना शासन को भेजी थी। उस वायरलेस की प्रतिलिपि जब मुझे प्राप्त हुई, तब मेरा गणित का विद्यार्थी जीवन का शौक जाग गया था। मैने हरिद्वार आने वाली समस्त ट्रेनो, बसों, स्पेशल बसों, कारों, स्कूटरों, रिक्शों, बुग्गियों में और पैदल आने वाले यात्रियों का खूब बढ़ा चढ़ा कर योग लगाया, तो भी आंकड़ा किसी प्रकार दो लाख से आगे नहीं बढ़ सका था। एस. पी, कुम्भ मेला से मुलाकात होने पर मैने अनौपचारिक ढंग से यह विषय छेड़ा, तो अनुभवी एस. पी. बोले,

              “यह अनुमान केवल मेरा नहीं होता है, समस्त मेला प्रशासन का होता है। प्रशासन ने 10 लाख यात्रियों की व्यवस्था हेतु बजट स्वीकृत कराया था और पूरे का खर्च दिखाया है। अब दस लाख से कम यात्रियों का अनुमान कैसे दिया जा सकता है? यात्रियों का आंकड़ा अधिक होने पर प्रदेश शासन को प्रशंसा मिलेगी और भविष्य में केंद्र से अधिक अनुदान मांगने का अवसर भी।“

            अपने आगे के सेवाकाल में मैने अनुभव किया कि अनुभवी एस. पी. की बात में बड़ा दम था। तभी प्रत्येक आने वाले कुम्भ मेले में यात्रियों की संख्या का आंकड़ा ऐसी लम्बी छलांगें लगाता रहा है जैसी शेर द्वारा पीछा किये जाने पर हिरन छलांग लगाता है। मैने समाचार पढ़ा है कि वर्ष 2021 में  हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेला के लिये प्रशासन ने 12 करोड़ यात्रियों के आने का अनुमान दिया है। मैं जानता हूं कि मेले के अंत में प्रशासन का आंकड़ा इसके ऊपर ही जायेगा, जिसकी परिणति इसे मानव इतिहास में विश्व का सबसे बड़ा मेला घोषित होने,  शासन की विश्व भर में वाहवाही होने और अनेक व्यक्त्तियों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो जाने में होगी। 

                          पर मैं अपने गणित के पुराने शौक के लिये क्या करूं? वह जागृत हो गया है और मैने हिसाब लगाया है कि  भारत की आबादी लगभग 132 करोड़ है और उसका 1/11 वां भाग होता है 12 करोड़। इसका अर्थ हुआ कि मेरे 2200 आबादी वाले गांव से औसतन 200  (2200/11) लोग कुम्भ स्नान हेतु जाने चाहिये। मैने गांव से पता लगाया तो पाया कि पिछले वाले कुम्भ में तो 20 भी नहीं गये थे; मैं अचम्भित हूं कि इस बार एकदम भक्तिभाव में दस-बारह गुना वृद्धि कैसे हो जायेगी जो 200 चले जायेंगे?

                                                                                -क्रमशः

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