Thursday, 14 May 2020

श्रमिक कानूनों में संशोधन श्रमिक हितों के विरुद्ध।

श्रमिक कानूनों में हुए बदलाव बापस नहीं हुए तो होगा आन्दोलन।

जब देश भर के श्रमिक संकट में हैं,हर तरफ सड़कों पर श्रमिक परिवार सहित दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को उनके हित संरक्षण हेतु कार्य करना चाहिए था किन्तु उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक दिखी सरकारों ने इस ओर विचार करना उचित नहीं समझा।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि श्रमिक कल्याण की सारी योजनाएं बन्द कर दी जाये तो शासन और प्रशासन में बैठे एक बहुत बड़े वर्ग की परिसम्पतियों में गुणोत्तर वृद्धि बन्द हो जायेगी।

फिर भी श्रमिक हितों की बलि चढ़ाते हुए राजस्थान,मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गोवा की राज्य सरकारों ने गुपचुप तरीके से श्रमिक कानूनों में संशोधन कर दिए।

केन्द्र सरकार द्वारा भी इन संशोधनों को सराहा गया है।

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