Sunday, 3 May 2020

चिकित्सा और शिक्षा विभाग को रक्षा मंत्रालय के अधीन कर किया जाये जैविक सेना का गठन।

जैविक सेना के गठन का समय।

भारत चीन युद्ध में मूलभूत सन्शाधनो के अभाव में भी वीरता के साथ भारतीय सेना ने अपने आत्म विश्वास के बल पर लड़ाई लड़ी।तब से सेना को मूलभूत सन्शाधन प्रदान करने के साथ ही दुनिया की एक महत्वपूर्ण सैन्य शक्ति बनाने के प्रयास निरंतर चल रहे हैं।

किन्तु समय के साथ युद्ध की शैली भी बदल रही हैं। चीन ने इस समय पूरी दुनिया को जैविक युद्ध में धकेल दिया है। जैविक युद्ध से निपटने हेतु जैविक सेना किसी भी देश में नहीं है।उसका एक ही विकल्प निकाला गया कि घर में रहें,दूरी बनाए रखें।

इस जैविक युद्ध के समय स्वास्थ्य कर्मी जैविक सेना के सैनिकों के रूप में युद्ध लड़ रहे हैं।इन सैनिकों के पास भी मूलभूत सन्शाधन उपलब्ध नहीं है, यहां तक कि मास्क नहीं है,पी पी ए किट भी नहीं है, सेनिटाइजर का भी अभाव है। जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़े देश के चिकित्सा तंत्र का आकलन भी इस जैविक युद्ध में हो गया है।

वर्तमान में हर देश में थल,जल और वायु तीन प्रकार की सेनाये हैं।अब हर देश को चौथी सेना जैविक सेना बनानी पड़ेगी। जैविक सेना के दो महत्वपूर्ण अंग हो सकते हैं, चिकित्सा और शिक्षा विभाग।इन दोनों विभागों को रक्षा मंत्रालय के अधीन लाकर एक जैविक सेना अध्यक्ष की नियुक्ति की जानी चाहिए।

जैविक सेना की अग्रिम चौकियों के रूप में गांव गांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालय, आंगनवाड़ी केन्द्र कार्य करेंगे।इन चौकियों को सुदृढ़ करने के लिए इन्हें सन्शाधन उपलब्ध कराने पड़ेंगे तथा पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने पड़ेंगे ताकि नागरिक जैविक युद्ध के समय भी बिना किसी चिन्ता के जीवन जी सकें।

तत्पश्चात प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और माध्यमिक विद्यालयों को भी मूलभूत सुविधाएं प्रदान कर सुदृढ़ करना पड़ेगा। जनपद स्तर पर स्थापित चिकित्सालयों के भी मानक पूरे कर,वेन्टीलेटर की सुविधा उपलब्ध करानी पड़ेगी। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि अनेक जिला चिकित्सालय वेन्टीलेटर की सुविधा से वन्चित हैं। जनपदों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, किन्तु चिकित्सकों के व अन्य प्रशिक्षित चिकित्सा कार्मिकों के अभाव में नागरिक लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं।

इसलिए भविष्य में युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार जैविक सेना के गठन के प्रयास आरंभ करें ताकि देशवासियों को वर्तमान परिस्थिति का फिर सामना न करना पड़े।







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