आंकड़ों का खेल
भाग-1
पता नहीं कि चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को शासन चलाने में सफलता के लिये ‘आंकड़ों का खेल’ नामक सूत्र बताया था या नहीं। पर आज के युग में शासकीय-प्रशासकीय कार्यों में इसका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है और कमोबेश समस्त देशों में हो रहा है। हाल में चीन ने कोरोनावाइरस से हुई मौतों का आंकड़ा लगभग तीन हज़ार बताया था। डब्लू. एच. ओ. की टीम के वहां पहुंचने वाले दिन यह आंकड़ा चार हज़ार के ऊपर हो गया था। चीनी शासन के जानकारों का कहना है कि वास्तविकता इससे तीन-चार गुनी भी हो सकती है। जनतांत्रिक देश भी आंकड़ों का खेल खेलने से परहेज़ नहीं करते हैं। ब्रिटेन के यशस्वी प्रधान मंत्री सर विंस्टन चर्चिल का आंकड़ों से खेल सम्बंधित एक किस्सा बहुत मशहूर है। एक दिन चर्चिल के पास उनका सेक्रेटरी आया। उसके मुख पर घोर निराशा का भाव था। वह बोला, “आफ़्टर सिक्स डेज़ दिस स्टार्ड क्वेश्चन हैज़ टु बी आंसर्ड बाइ यू इन दी पार्लियामेंट्। बट दि इंफ़ौर्मेशन रिक्वायर्ड विल टेक ऐट लीस्ट सिक्स मंथ्स् टु कलेक्ट इट (इस तारांकित प्रश्न का उत्तर आप को छः दिन बाद पार्ल्यामेंट में देना है। परंतु इसमें मांगे गये आंकड़े की सूचना को इकट्ठा करने में कम से कम छः माह लगेंगे)”। चर्चिल ने कहा पत्रावली दिखाओ और फिर उसमें वांछित आंकड़े के स्थान पर एक संख्या लिख दी। सेक्रेटरी आश्चर्य से उनकी ओर देखते हुए बोला, “यदि विपक्ष ने इस संख्या का झूठ साबित कर दिया, तो आप की स्थिति बड़ी नाज़ुक हो जायेगी।“
चर्चिल ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “डोंट वरी. इफ़ हिज़ मैजेस्टी’ज़ गवर्नमेंट विल नीड सिक्स मंथ्स टु कलेक्ट दिस इन्फ़ौर्मेशन, हिज़ मैजेस्टी’ज़ अपोज़ीशन विल टेक ऐट लीस्ट सिक्स इयर्स टु प्रूव दैट इट इज़ फ़ाल्स (चिंता न करें। यदि शासन को यह सूचना एकत्र करने में छः माह लगेंगे, तो विपक्ष को यह साबित करने में कि यह संख्या ग़लत है, कम से कम छः वर्ष लग जायेंगे)”।
हम भारतीयों ने शासन एवं प्रशासन ब्रिटिश से सीखा है और किसी ख़ुराफ़ात को अपना लेने की क्षमता में हम उनसे बहुत आगे हैं। इस कारण आंकड़ों के खेल में हम चर्चिल से कम माहिर नहीं हैं। अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की बात हो अथवा विकास की योजनाओं को बनाने एवं कार्यान्वन की बात हो, दोनो में हम आंकड़ों का ऐसा मकड़जाल बुन देते है कि आंकड़ों का यथार्थ से दूर-दूर का सम्बंध न रह जाय। इस क्षेत्र में कतिपय विशेष योग्यता से विभूषित विभागों के कार्यों का वर्णन समीचीन होगा।
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