Friday, 21 August 2020

कवियों की लाटरी लगी है इस कोरोना काल में।

गीत 

कवियों की लाटरी लगी है, इस कोरोना काल में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                             जय माँ  शारदे  .......

किसकी रचना कौन पढ़ रहा, इस तह में मत जाइए  ।
कोकिल-कण्ठी गलाकार को, सुनकर मोद मनाइए  ।
वाह-वाह के साथ टिप्पणी,  लिखिए और लिखाइए  ।
कुछ भी पल्ले पड़े न तो भी,कविता-पाठ सराहिए  ।
विफल 'लाॅक डाउन' का घर में, बैठे लाभ उठाइए  ।
तृप्ति हृदय को मिल जायेगी, और तुम्हें क्या चाहिए  ।।

बड़े भाग्य से  ऐसे अवसर, मिल पाते कुछ साल में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                            जय माँ शारदे   ..........

जितने सम्भव हों उतने मुख-पोथी मित्र बनाइए  ।
और सैकड़ों ग्रुप, पृष्ठों से, जल्दी से जुड़  जाइए ।
अगर नहीं कविता लिख पाते,फौरन जुगत भिड़ाइए  ।
जिसको पढ़ कर मन होता, कविता वही चुराइए  ।
'कापी-पेस्ट' सहायक होती, कुछ इसको अपनाइए  ।
करके तिकड़मबाजी  जग में, अपना नाम  कमाइए  ।।

मलकर हाथ वही पछताते, जो पड़ते न बवाल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                          जय माँ शारदे  .........

 जैसे भी हो, मित्र-मण्डली के अगुआ बन जाइए  ।
अवसर पाते ही पल भर में, बिगड़ी बात बनाइए  ।
राजी से नहिं मानें,  अखटी-बखटी उन्हें  सुनाइए  ।
याद रखो, अपने जीवन में,  कभी न मुँह की खाइए  ।
अन्दर भले घँघारि भरी हो, बाहर खूब सजाइए  ।
बनिये इतने मृदु कि शत्रु को, भी ठण्डक  पहुँचाइए  ।।

जीवन हो नहिं व्यर्थ, पड़े यदि  कवियों के जञ्जाल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                          जय माँ शारदे   .........

कविता की छीछालेदर भी, मञ्चों पर विकराल  है  ।
फूहड़ हास्य, चुटकुले बाजी,उछलकूद  बेहाल  है  ।
तेल लगाने गया व्याकरण, चारों ओर धमाल  है  ।
रही-सही सब कसर निकाली, 'लाइव' बना कमाल है 
नचा रहा सारी दुनिया को, निशिदिन अन्तर्जाल  है ।
इसके आगे नहीं गल रही, आज किसी की दाल  है  ।।

उल्लू जैसी धमक आजकल, आने लगी मराल  में  ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में  ।।
                                        जय माँ शारदे   ............

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