गीत
कवियों की लाटरी लगी है, इस कोरोना काल में ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में ।।
जय माँ शारदे .......
किसकी रचना कौन पढ़ रहा, इस तह में मत जाइए ।
कोकिल-कण्ठी गलाकार को, सुनकर मोद मनाइए ।
वाह-वाह के साथ टिप्पणी, लिखिए और लिखाइए ।
कुछ भी पल्ले पड़े न तो भी,कविता-पाठ सराहिए ।
विफल 'लाॅक डाउन' का घर में, बैठे लाभ उठाइए ।
तृप्ति हृदय को मिल जायेगी, और तुम्हें क्या चाहिए ।।
बड़े भाग्य से ऐसे अवसर, मिल पाते कुछ साल में ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में ।।
जय माँ शारदे ..........
जितने सम्भव हों उतने मुख-पोथी मित्र बनाइए ।
और सैकड़ों ग्रुप, पृष्ठों से, जल्दी से जुड़ जाइए ।
अगर नहीं कविता लिख पाते,फौरन जुगत भिड़ाइए ।
जिसको पढ़ कर मन होता, कविता वही चुराइए ।
'कापी-पेस्ट' सहायक होती, कुछ इसको अपनाइए ।
करके तिकड़मबाजी जग में, अपना नाम कमाइए ।।
मलकर हाथ वही पछताते, जो पड़ते न बवाल में ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में ।।
जय माँ शारदे .........
जैसे भी हो, मित्र-मण्डली के अगुआ बन जाइए ।
अवसर पाते ही पल भर में, बिगड़ी बात बनाइए ।
राजी से नहिं मानें, अखटी-बखटी उन्हें सुनाइए ।
याद रखो, अपने जीवन में, कभी न मुँह की खाइए ।
अन्दर भले घँघारि भरी हो, बाहर खूब सजाइए ।
बनिये इतने मृदु कि शत्रु को, भी ठण्डक पहुँचाइए ।।
जीवन हो नहिं व्यर्थ, पड़े यदि कवियों के जञ्जाल में ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में ।।
जय माँ शारदे .........
कविता की छीछालेदर भी, मञ्चों पर विकराल है ।
फूहड़ हास्य, चुटकुले बाजी,उछलकूद बेहाल है ।
तेल लगाने गया व्याकरण, चारों ओर धमाल है ।
रही-सही सब कसर निकाली, 'लाइव' बना कमाल है
नचा रहा सारी दुनिया को, निशिदिन अन्तर्जाल है ।
इसके आगे नहीं गल रही, आज किसी की दाल है ।।
उल्लू जैसी धमक आजकल, आने लगी मराल में ।
'लाइव' कविता-पाठ कर रहे, खुश रहते हर हाल में ।।
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