आंकड़ों का खेल (भाग-2- दि. 24 अगस्त की पोस्ट से आगे)
1. पुलिस विभाग
अ. अपराध नियंत्रण
पुलिस की दक्षता का मुख्य मापक अपराधों में कमी होता है। समयाभाव के कारण थाना का निरीक्षण करने वाले अधिकारी को अपराधों में वास्तविक कमी या बढ़ोत्तरी का ज्ञान हो पाना अत्यधिक दुरूह होता है| मजबूरन वह वर्तमान वर्ष के अपराध के आंकड़ों को विगत वर्ष के आंकड़ों से तुलना कर समीक्षा करता है। अतः अधिकांश थानेदारों का ध्यान अपराधों को कम रखने पर उतना नहीं रहता है, जितना अपराध के आंकड़ों को कम रखने पर रहता है। पुलिस के उच्चाधिकारी एवं शासक बात तो एफ़. आई. आर. अविलम्ब दर्ज़ किये जाने की कहते हैं, परंतु उनमें बहुत से मन ही मन आंकड़ा-नियंत्रण के खेल के पक्षधर होते हैं। आंकड़े कम रहने पर वे प्रेस एवं विपक्ष की आलोचना का डटकर सामना कर लेते हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि बढ़ती आबादी, नये आपराधिक कानून एवं समाज की बदलती सोच के कारण अपराधों का बढ़ना स्वाभाविक है, परंतु कम शासक ही साहसपूर्वक यह बात कह पाते हैं। जनमानस भी इस तथ्य को अंगीकार नहीं करता है। उत्तर प्रदेश पुलिस के वर्ष 1970 के आई. जी. श्री एन. एस. सक्सेना ने घोषित कर दिया था कि उ. प्र. में वर्ष में केवल डेढ़ लाख अपराध ही दर्ज होते हैं जब कि लगभग 4 लाख संज्ञेय अपराध घटित होते हैं। उन्होंने भरसक प्रयत्न भी किया कि सभी अपराध पंजीकृत हों। परिणाम यह हुआ कि एक वर्ष में ही आई. जी. बदल दिये गये। इसके विरुद्ध उ. प्र. की एक मुख्य मंत्री ने कार्यभार सम्हालते ही निर्देश निर्गत कर दिया था कि 6 माह में अपराधों में 70 प्रतिशत की कमी हो जानी चाहिये। मुख्य मंत्री के आदेश का अक्षरशः पालन करने हेतु कुछ कारगुज़ार पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट लिखाने आये लोगों को दूर से ही गरियाना और दौड़ाना प्रारम्भ कर दिया| जो नहीं कर पाये, वे मुख्य मंत्री की समीक्षा बैठक के दौरान दंडित हो गये और उनके स्थान पर अधिक कारगुज़ार अधिकारियों की नियुक्ति हो गई। परिणामतः उन मुख्य मंत्री ने अपराध-नियंत्रण में दक्ष होने की सुख्याति अर्जित कर शान से अपना कार्यकाल पूर्ण किया था।
ब. चुनावी सभा का गणित
मैं वर्ष 1974 में पुलिस अधीक्षक सहारनपुर के पद पर नियुक्त था। एक दिन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी सभा आयोजित हुई। सभा के उपरांत उसमें लगभग 20000 की भीड़ होने की सूचना एल. आई. यू. इंस्पेक्टर द्वारा इंटेलीजेंस मुख्यालय को भेज दी गई। उस वायरलेस की प्रतिलिपि जब म्रेरे अवलोकन हेतु प्रस्तुत हुई, तो मेरा गणित का स्कूली शौक जागृत हो गया। मैने हिसाब लगाया कि प्रधान मंत्री के मंच के सामने के चार सेक्टर्स में अधिकतम एक हज़ार व्यक्ति प्रति सेक्टर के हिसाब से चार हज़ार व्यक्ति आ सकते थे, उसके पीछे के चार सेक्टर्स में अधिकतम डेढ़ हज़ार प्रति सेक्टर के हिसाब से 6 हज़ार लोग आ सकते थे। उनके पीछे खड़े हुए लोग और दायें-बांये खड़े पुलिसजन एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों को जोड़ते हुए खींचतान कर दो हज़ार लोग और हो सकते थे। इस प्रकार किसी भी प्रकार 12 हज़ार से अधिक का योग नहीं बनता था। मैने एल. आई. यू. इंस्पेक्टर को बुलाकर कहा कि 10-12 हज़ार की संख्या को 20000 क्यों रिपोर्ट किया गया? मेरी अपेक्षा कहीं अधिक अनुभवी इंस्पेक्टर ने उत्तर दिया,
“सर, मैने तो फिर भी कम संख्या लिखकर भेजी है। अपनी जनप्रियता साबित करने हेतु नेता तो लखनऊ में 30 हज़ार के ऊपर की संख्या बतायेंगे। उ. प्र. शासन भी प्रधान मंत्री के सामने शासन की जनप्रियता की अच्छी छवि प्रस्तुत करने हेतु बढ़ी हुई संख्या ही रखना चाहेगा। 10-12 हज़ार की संख्या पर तो नेता प्रश्नचिन्ह लगा देंगे। उनमें जो आप से नाख़ुश होंगे, वे मुख्य मंत्री को यह भी कह देंगे कि एस. पी., सहारनपुर विपक्षी मानसिकता के हैं।“
अनुभवी इन्स्पेक्टर की बात में मुझे दम लगा।
स. चुनावी परिणाम का अनुमान
वर्ष 1977 में मैं इंटेलीजेंस मुख्यालय, लखनऊ में नियुक्त था। इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी ने संसद का चुनाव होना घोषित कर दिया था। उन दिनो इंटेलीजेंस के मुखिया श्री श्रीष चंद्र दीक्षित, डी. आई. जी. थे। वह अत्यंत समझदार एवं सुलझे हुए अधिकारी थे। उनसे मुख्य मंत्री ने चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान पूछा था। अतः डी. आई. जी. साहब ने मुख्यालय में नियुक्त पुलिस अधीक्षकों की मीटिंग बुलाई थी। प्रदेश के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के कांग्रेसी उम्मीदवार की स्थिति के विषय में सूचना एकत्र कर हम डी. आई. जी. को अवगत करा रहे थे। डी. आई. जी. साहब तदनुसार उनके नाम के आगे V (Victory), L (Lose) अथवा D (Doubtful) लिख देते थे| यदि कहीं पर कांग्रेस की हार में ज़रा भी संदेह होता था, तो डी. आई. जी. साहब उस नाम के सामने V (Victory) लिख देते थे। सुल्तानपुर के विषय में सूचना थी कि संजय गांधी न सिर्फ़ हारेंगे, वरन उनकी ज़मानत भी ज़ब्त हो जायेगी। हम सब अवाक थे। डी. आई. जी. साहब कुछ देर तक सोचते रहे, पर शीट पर संजय गांधी के नाम के आगे उन्होंने कुछ नहीं लिखा। आगे रायबरेली का नम्बर आया, तो वहां से भी इंदिरा गांधी के पक्का हारने की रिपोर्ट थी। कुछ देर सोचने के बाद डी. आई. जी. साहब ने इंदिरा गांधी के नाम के आगे V (Victory) लिख दिया और संजय गांधी के नाम के आगे D (Doubtful) लिख दिया। हम आश्चर्य से यह देख रहे थे, तो वह मुस्कराते हुए बोले,
“मैं आप सब से सहमत हूं कि फ़ील्ड रिपोर्ट पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। पर इन दोनो को हारता हुआ बताकर मैं अनावश्यक बहादुरी नहीं दिखाना चाहता हूं। अगर किसी प्रकार कांग्रेस जीत ही गई, तो मैं तो सदैव के लिये कांग्रेस का शत्रु घोषित हो जाऊंगा।“
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