Saturday, 22 August 2020

कलाकार से गलाकार बन खींचो मत मात्राये।

सम्मान्य रचनाकारों से 
*******************
                ●● गीतिका ●●

मात्रा-पतन दोष मत मानो, कमजोरी तो मानो  ।
नये सिरे से काव्य-सृजन के, सब गुण-दोष बखानो  ।

भाषा पहले बनी,व्याकरण बहुत बाद में आया  ;
फिर इसके अनुसार हुआ परिमार्जन, यह पहचानो  ।

कविता-कला कसौटी पर कस, आयी अलख जगाने;
नव रस से भरपूर हुई कण्ठस्थ सहज ही, जानो  ।

वार्णिक मात्रिक छन्द रचे अपनी क्षमता से  सबने  ,
यति गति लय तुक चरण तथा अवरोहारोह मिलानो  ।

एक-एक   अक्षर   शब्दों   का   संयोजन  कर  पाना ---
कितना है श्रमसाध्य कार्य यह,  कुछ-कुछ तो पहचानो  ।

कलाकार से गलाकार बन,खींचो मत मात्राएँ  ;
तर्क सुसङ्गत रखो, कुतर्कों से मत अपनी तानो ।

अनुस्वार अनुनासिक सबको, पुनः चलन में लेकर  ;
जब  जैसे  सम्भव  हो  वैसे, लेखन  तजो  पुरानो  ।

कुछ दिन के अभ्यास बाद  सब कुछ सम्भव हो रुचिकर, 
अखबारों  का  उदाहरण  दे, करो  न  बन्धु  बहानो ।

विश्व-पटल पर चमका दो फिर से शुचि हिन्दी भाषा  ,
अपवादों  को  छोड़ ,  ठान  पूरी  करने  की  ठानो  ।

संस्कृत  की  बेटी  है  हिन्दी,  वही  वर्णमाला  है ;
'घट' इसके अनुसार सुलेखन-सार  सदा  अपनानो  ।।

No comments:

Post a Comment